दिल्ली की हवा में घुला जहर, 19 दिन बाद AQI खराब

Update: 2026-07-12 15:11 GMT

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली की वायु गुणवत्ता एक बार फिर खराब श्रेणी में पहुंच गई है। 19 दिनों के बाद दिल्ली की हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार रविवार को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 261 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है। हालांकि, मौजूदा स्थिति को देखते हुए अभी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) लागू करने की जरूरत नहीं समझी गई है।

इससे पहले 22 जून को दिल्ली का AQI 221 दर्ज किया गया था, जो खराब श्रेणी में था। इसके बाद हवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ था, लेकिन अब एक बार फिर प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की GRAP उप समिति ने रविवार शाम बैठक कर दिल्ली-एनसीआर की मौजूदा वायु गुणवत्ता और मौसम की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में मौसम विभाग और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) पुणे से मिले पूर्वानुमानों के आधार पर स्थिति का आकलन किया गया।

बैठक में सामने आया कि दिल्ली की हवा खराब होने की मुख्य वजह स्थानीय प्रदूषण नहीं बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से आई धूल है। बताया गया कि अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान के आसपास बने धूल भरे तूफान का असर उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों पर पड़ा, जिससे दिल्ली-एनसीआर की हवा भी प्रभावित हुई।

धूल भरी हवाओं के कारण वातावरण में बड़े आकार के धूल कणों की मात्रा बढ़ गई, जिससे वायु गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की मौसमी परिस्थितियों में हवा में मौजूद प्रदूषक तत्वों का स्तर बढ़ सकता है और AQI खराब श्रेणी में पहुंच सकता है।

CAQM ने बताया कि अगले कुछ समय तक दिल्ली की हवा खराब श्रेणी में बनी रह सकती है। हालांकि, धूल का असर कम होने के बाद अगले एक-दो दिनों में वायु गुणवत्ता में सुधार होने की संभावना जताई गई है। इसी को देखते हुए GRAP का पहला चरण लागू नहीं करने का फैसला लिया गया है।

GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की गंभीर स्थिति से निपटने के लिए लागू किए जाने वाले चरणबद्ध उपाय हैं। इसके तहत निर्माण कार्यों, वाहनों और अन्य प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर अलग-अलग स्तरों पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं।

अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। यदि AQI में और गिरावट आती है या प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी तक पहुंचता है तो GRAP के तहत जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं।

दिल्ली में मौसम और हवा की दिशा प्रदूषण के स्तर को काफी प्रभावित करती है। गर्मी और मानसून के बीच कई बार बाहरी क्षेत्रों से आने वाली धूल भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित करती है।

राजधानी के लोगों को भी खराब हवा के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को सुबह और देर शाम के समय अधिक प्रदूषण वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी जाती है।

फिलहाल दिल्ली की हवा पर प्रशासन की नजर बनी हुई है और आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति के आधार पर आगे के कदम उठाए जाएंगे।

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