सत्ता परिवर्तन की चर्चा पर भड़के धर्मेंद्र प्रधान कांग्रेस पर साधा निशाना
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ सांसद और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के हितों और व्यवस्था में सुधार के नाम पर शुरू किए गए विरोध-प्रदर्शनों का वास्तविक उद्देश्य देश में अराजकता फैलाना और राजनीतिक व्यवस्था को अस्थिर करना है। प्रधान ने दावा किया कि सत्ता परिवर्तन यानी 'रिजीम चेंज' और बांग्लादेश से प्रेरणा लेने जैसी चर्चाओं ने इन आंदोलनों के पीछे छिपे राजनीतिक उद्देश्यों को उजागर कर दिया है।धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कांग्रेस और राहुल गांधी की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित और छात्र कल्याण के नाम पर किए जा रहे प्रदर्शनों को लेकर अब स्थिति स्पष्ट होती जा रही है। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक प्रक्रिया से सत्ता हासिल करने में असफल रहने वाले लोग संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
छात्रों के नाम पर अराजकता फैलाने का लगाया आरोप
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पोस्ट में कहा कि देशहित, व्यवस्था सुधारने और छात्रों के कल्याण के दावों के साथ शुरू हुए विरोध-प्रदर्शनों के उद्देश्य पर अब सवाल उठ रहे हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि खुले तौर पर सत्ता परिवर्तन की चर्चा और बांग्लादेश की घटनाओं से प्रेरणा लेने की बात करना दर्शाता है कि छात्रों की आड़ में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की जा रही है।प्रधान ने इसे एक सुनियोजित साजिश बताते हुए कहा कि राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए छात्रों से जुड़े मुद्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
बांग्लादेश का जिक्र कर विपक्ष को घेरा
भाजपा सांसद ने अपने बयान में बांग्लादेश की राजनीतिक घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग विदेशी घटनाओं से प्रेरणा लेकर भारत में सत्ता परिवर्तन का सपना देख रहे हैं।प्रधान ने कहा कि भारत में सरकार बदलने का फैसला केवल लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से होता है।उन्होंने दावा किया कि विदेशी ताकतों के सहारे सत्ता हासिल करने की सोच रखने वालों को यह समझना चाहिए कि भारतीय लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता के हाथ में होता है।हालांकि, विदेशी ताकतों की भूमिका और राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की साजिश संबंधी आरोपों के समर्थन में उनके बयान में कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।
राहुल गांधी पर जनादेश के अपमान का आरोप
धर्मेंद्र प्रधान ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह लगातार जनता के जनादेश का अपमान कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया से मनचाहा परिणाम नहीं मिलने पर कांग्रेस लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने का प्रयास करती हैप्रधान ने आरोप लगाया कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए जनता को परेशान करना कांग्रेस की पुरानी राजनीति का हिस्सा रहा है।उन्होंने राहुल गांधी पर संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया।
संविधान को लेकर भी राहुल गांधी पर तीखी टिप्पणी
भाजपा सांसद ने राहुल गांधी के संविधान से जुड़े राजनीतिक बयानों और गतिविधियों पर भी सवाल उठाए।उन्होंने राहुल गांधी को संविधान की प्रति लेकर घूमने वाला 'संविधान विरोधी' व्यक्ति बताया। प्रधान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का रवैया उसी राजनीतिक मानसिकता को दर्शाता है, जिसमें नागरिकों के अधिकारों का हनन हुआ था।उन्होंने राहुल गांधी पर सत्ता की इच्छा के कारण लोकतांत्रिक संस्थाओं और जनादेश की गरिमा को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।अपने बयान के अंत में प्रधान ने राहुल गांधी के लोकतंत्र के प्रति रवैये को शर्मनाक बताया। यह टिप्पणी उनके राजनीतिक आरोपों का हिस्सा थी।
चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन से बढ़ा विवाद
देश में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान का यह बयान सामने आया है।कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य प्रदर्शनकारी समूह चुनावी पारदर्शिता तथा मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं।वहीं, भाजपा नेताओं का आरोप है कि इन प्रदर्शनों की आड़ में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की जा रही है।कांग्रेस ने सत्ता परिवर्तन संबंधी आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि विपक्ष का उद्देश्य चुनावों के जरिए सरकार बदलना है। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा बताया है।
सत्ता परिवर्तन के मुद्दे पर तेज हुई सियासत
धर्मेंद्र प्रधान के बयान के बाद सत्ता परिवर्तन और छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।एक तरफ भाजपा नेता इन आंदोलनों के पीछे राजनीतिक साजिश होने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं विपक्ष चुनावी पारदर्शिता, छात्र हितों और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाने की बात कर रहा है।फिलहाल प्रधान के आरोप राजनीतिक बयान हैं। उनके आधार पर किसी साजिश के साबित होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। अब इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।