हैदराबाद। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर संचालित किए जा रहे करोड़ों रुपये के फर्जी कॉल सेंटर घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी की हैदराबाद जोनल टीम ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या सात हो गई है। जांच एजेंसी के मुताबिक, जुलाई 2025 से सितंबर 2026 के बीच ठगी से जुड़े 927 स्वीकृत लेनदेन का रिकॉर्ड मिला है, जिनकी कुल राशि लगभग 261 करोड़ रुपये है। इस खुलासे के बाद जांच एजेंसी ने गिरोह के आर्थिक नेटवर्क और विदेशों में भेजी गई रकम की पड़ताल तेज कर दी है।मिली जानकारी के अनुसार, ईडी ने 3 नवंबर को हर्षिल नयनभाई रावल, जसवंत सिंह, चेतन मुंजाल और प्रणव पिठाडिया को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 19(1) के तहत गिरफ्तार किया। चारों आरोपियों को हैदराबाद के नामपल्ली स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन लोगों की फर्जी कॉल सेंटर नेटवर्क के संचालन, ठगी की रकम के संग्रह और अवैध धन को अलग-अलग माध्यमों से स्थानांतरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका थी।ईडी की जांच में सामने आया है कि यह कथित गिरोह भारत में संचालित कॉल सेंटरों के माध्यम से अमेरिकी नागरिकों से संपर्क करता था। आरोपियों से जुड़े कर्मचारी खुद को अमेरिकी सरकारी विभागों का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते थे। इसके बाद अलग-अलग बहानों से उन्हें नकदी, सोना या अन्य माध्यमों से भुगतान करने के लिए तैयार किया जाता था।जांच एजेंसी के मुताबिक, ठगी की रकम एकत्र करने के लिए अमेरिका में कई बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद धन को अलग-अलग खातों, हवाला नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से दूसरे देशों तक पहुंचाए जाने की आशंका है। ईडी अब इस नेटवर्क के सभी आर्थिक लेनदेन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
पटियाला और पुणे में चल रहे थे फर्जी कॉल सेंटर
ईडी ने इससे पहले 15 सितंबर 2026 को पंजाब के पटियाला, महाराष्ट्र के पुणे और चंडीगढ़ में चार परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान तीन सक्रिय कॉल सेंटरों का पता चला था। इनमें दो पटियाला और एक पुणे में संचालित हो रहे थे। छापेमारी के समय इन परिसरों में लगभग 220 लोग काम करते पाए गए थे।तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और नकदी जब्त की गई थी। जांच एजेंसी का कहना है कि इन उपकरणों से मिले रिकॉर्ड ने कथित अंतरराष्ट्रीय ठगी नेटवर्क की कार्यप्रणाली समझने में मदद की है।जांच में प्रणव पिठाडिया को पटियाला स्थित कॉल सेंटरों के संचालन और प्रबंधन से जुड़ा बताया गया है। ईडी के अनुसार, इन केंद्रों से कुल 242 कर्मचारी जुड़े थे, जिनमें 110 कॉल करने वाले कर्मचारी शामिल थे। पिठाडिया पर भुगतान संबंधी स्वीकृतियों और निपटान की प्रक्रिया संभालने तथा कथित अवैध रकम को अमेरिकी बैंक खातों और दुबई से जुड़े खातों तक पहुंचाने का आरोप है।
हवाला और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए रकम भेजने का संदेह
जांच एजेंसी ने हर्षिल नयनभाई रावल की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया है। ईडी का आरोप है कि रावल गिरोह के मुख्य वित्तीय रिकॉर्ड संभालता था। इनमें कथित मुनाफे, साझेदारों के हिस्से और दुबई भेजी गई रकम का विवरण शामिल था। जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि ठगी से प्राप्त धन का कुछ हिस्सा संपत्तियों में निवेश किया गया।वहीं, जसवंत सिंह पर अमेरिका में पीड़ितों से नकदी और अन्य कीमती सामान एकत्र कराने तथा उसके बाद भुगतान को अलग-अलग माध्यमों से भारत तक पहुंचाने में समन्वय करने का आरोप है। ईडी के मुताबिक, इस प्रक्रिया में हवाला और टोकन आधारित लेनदेन का इस्तेमाल किया गया।चेतन मुंजाल पर फर्जी कॉल सेंटरों को संरक्षण उपलब्ध कराने और कथित अपराध की आय से धन प्राप्त करने का आरोप लगाया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, मुंजाल रबदित्ता कॉरपोरेट्स में 25 प्रतिशत हिस्सेदार है। यह कंपनी काला घोड़ा रेस्तरां कारोबार से जुड़ी है। ईडी का दावा है कि इस व्यवसाय में लगभग 23.19 लाख रुपये की कथित अपराध से अर्जित रकम पहुंची थी। ये सभी जांच एजेंसी के आरोप हैं, जिनकी न्यायिक प्रक्रिया में जांच होना बाकी है।
397 अमेरिकी बैंक खातों का मिला सुराग
ईडी की जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। एजेंसी ने अमेरिका के कम से कम 15 बैंकों में संचालित 397 खातों की पहचान की है, जिनका कथित रूप से पीड़ितों से रकम प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किया गया। इनमें से 313 खाते वेल्स फार्गो बैंक से जुड़े बताए गए हैं।जांच में कुछ खातों के फर्जी पहचान, दूसरे व्यक्तियों के नाम या अवैध रूप से हासिल की गई बैंकिंग जानकारी के आधार पर इस्तेमाल किए जाने का संदेह है।जांच एजेंसी ने 79 डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच भी की है। इनमें 65 मोबाइल फोन, 13 लैपटॉप एवं कंप्यूटर तथा एक डेटा स्टोरेज डिस्क शामिल है। इनसे कथित ठगी से संबंधित बातचीत, लेनदेन के रिकॉर्ड, कॉलिंग डेटा और क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट की जानकारी मिली है।जांच के दौरान अमेरिकी सरकारी अधिकारियों के नाम पर बनाए गए कथित फर्जी पहचान पत्र और बैज भी मिले। इसके अलावा अमेरिकी न्याय विभाग, वित्त विभाग तथा अन्य संस्थाओं के नाम पर तैयार किए गए दस्तावेजों का रिकॉर्ड भी बरामद हुआ है। एजेंसी के अनुसार, जब्त फोन से 6,463 अमेरिकी फोन नंबरों पर संपर्क किए जाने का विवरण मिला है।
पहले गिरफ्तार तीन आरोपी जेल में बंद
इस मामले में ईडी पहले ही विकास निमार, ताराचंद निमार और मोहम्मद इरफान अंसारी को गिरफ्तार कर चुकी है। विकास की गिरफ्तारी 27 जुलाई, ताराचंद की 5 अगस्त और इरफान अंसारी की 10 अगस्त को हुई थी। तीनों फिलहाल चंचलगुड़ा केंद्रीय जेल में बंद हैं।जांच एजेंसी ने लगभग 400 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों की भी पहचान की है, जिनकी जांच की जा रही है। इनमें चंडीगढ़ से जुड़ी जमीन और अन्य संपत्तियों के साथ क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट भी शामिल हैं। ईडी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इनमें से कितनी संपत्ति कथित अपराध की आय से अर्जित की गई और किन संपत्तियों को कानूनी प्रावधानों के तहत कुर्क किया जा सकता है।फिलहाल ईडी की जांच जारी है। एजेंसी इस कथित घोटाले से जुड़े अन्य व्यक्तियों, कंपनियों, बैंक खातों और विदेशों में भेजी गई रकम की जानकारी जुटा रही है। चार नई गिरफ्तारियों के बाद जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है। हालांकि, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा।