नई दिल्ली: IDBI बैंक की रीस्ट्रक्चरिंग से बैंकिंग इकोसिस्टम मजबूत होगा: वित्त मंत्री सीतारमण। नई दिल्ली, 14 अक्टूबर: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि IDBI बैंक की रणनीतिक रीस्ट्रक्चरिंग (पुनर्गठन) का सरकार का फैसला, आर्थिक सुधारों और वित्तीय क्षेत्र में बदलाव के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट में, वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने इस रीस्ट्रक्चरिंग को मंजूरी दी है।
इससे विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के जरिए बैंक के विकास के अगले चरण का रास्ता खुलेगा, जबकि सरकार के पास बैंक की कुछ हिस्सेदारी (माइनॉरिटी स्टेक) बनी रहेगी। मंत्री ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, IDBI बैंक की रणनीतिक रीस्ट्रक्चरिंग को CCEA की मंजूरी मिलने के साथ ही, भारत के सुधारों का सफर आज एक और मील के पत्थर तक पहुंच गया है।" उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में बैंक की स्थिति सुधारने में मदद करने के बाद, अब सरकार एक रणनीतिक निवेशक को लाकर विकास के नए अवसर पैदा कर रही है। मंत्री के अनुसार, इस कदम से बैंकिंग इकोसिस्टम मजबूत होगा और भारत में बैंकिंग सेवाएं वैश्विक मानकों के और करीब पहुंच सकेंगी। वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, "बैंक की रिकवरी में मदद करने के बाद, अब हम विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के जरिए इसके विकास के अगले चरण को संभव बना रहे हैं, जबकि सरकार के पास बैंक की कुछ हिस्सेदारी बनी रहेगी।
इससे न केवल बैंकिंग इकोसिस्टम मजबूत होगा, बल्कि बैंकिंग सेवाएं वैश्विक मानकों से भी आगे निकल सकेंगी। यह इस बात को पुख्ता करता है कि भारत की विकास गाथा मजबूत है, अर्थव्यवस्था लचीली है और सुधारों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता अडिग है।" इससे पहले, CCEA ने IDBI बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी को 52,878 करोड़ रुपये में 'कनाडा इंक' (फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की एक सहायक कंपनी) को बेचने की मंजूरी दी थी। इस सौदे में भारत सरकार की 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री शामिल है। इस सौदे के बाद, सरकार के पास बैंक की 15 प्रतिशत हिस्सेदारी बनी रहेगी, जबकि LIC के पास 19 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी। वित्त मंत्री सीतारमण ने इस सौदे को 'रणनीतिक विनिवेश' के बजाय 'रणनीतिक पुनर्गठन' बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह सौदा पूरा होने के बाद भी सरकार और LIC, दोनों ही इस ऋणदाता संस्था में शेयरधारक बने रहेंगे।