नई दिल्ली: एआईएमआईएम के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (विशेष गहन पुनरीक्षण - एसआईआर) की पूरी प्रक्रिया और तरीकों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट (सुप्रीम कोर्ट) का रुख किया है। सोसाइटी ने सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका (ताजा याचिका) के साथ-साथ एक याचिका (समीक्षा याचिका) भी दायर की है।
मामले से जुड़े मुख्य सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका और मांगेंपारदर्शिता का अभाव: याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग (ईसी) द्वारा चलाए जा रहे एसआईआर अभियान में नियुक्ति की भारी कमी है। बूथ-वार बूथ-वार की पूरी सार्वजनिक सूची की जाए: सोसा ने मांग की है कि जिन बूथ-वार के नाम की सूची से हटा दिया गया है, उनका कारण और बूथ-वार पूरी सार्वजनिक सूची की जाए। एकल पर प्रश्न: आवेदन में यह तर्क दिया गया है कि संविधान के अनुसार 324 के तहत चुनाव आयोग एक बहु-सदस्यीय संस्था है।
ऐसे में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) द्वारा मतदाता सूची में शामिल जजमेंट एजूकेशन के स्थान पर नामांकन से होना चाहिए। थोक उद्देश्य (बल्क फॉर्म 7 आपत्तियां) पर चिंता: आवेदन में आरोप लगाया गया है कि विशेष समूह और महिला दस्तावेज को सामूहिक रूप से बनाने के लिए थोक फॉर्म 7 आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं।. याचिका याचिका (समीक्षा याचिका) सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में पहले एसआईआर प्रक्रिया के पक्ष में एक फैसला सुनाया था। ओसाई ने उस आदेश को वापस लेने और उस पर ध्यान देने (रिव्यू एंड रिकॉल) करने की सिफारिश की है।
टैगिंगराहुल गांधी और मल्लिकार्जुन के साथ अन्य कैथोलिक नेताओं ने भी एसआईआर प्रक्रिया में सांसदों को लेकर भर्ती क्षेत्र की जगह बनाई। ओसाइ के वकील (निज़ामुद्दीन पाशा) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में मामला उठाने के बाद पी ने इसे अन्य संबंधित मुकदमों के साथ जोड़ने पर सहमति जताई है।ओसामी का राजनीतिक और कानूनी रुख ओसासी ने कहा कि उनकी पार्टी (एआईएमआईएम) पहले दिन से एसआईआर के खिलाफ है और अपने कानूनी, राजनीतिक और जन-प्रदर्शन दल के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर किसी एक दल या नेता का अधिकार नहीं है; सभी को लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज करने का अधिकार है।