नई दिल्ली : 28 अक्टूबर 2026। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लाखों मरीजों और उनके परिवारों के लिए केंद्र सरकार ने राहत भरा फैसला लिया है। सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 137 दवाओं के व्यापारिक मुनाफे की सीमा निर्धारित कर दी है। इससे कई महंगी कैंसर रोधी दवाओं की कीमतों में 70 प्रतिशत तक की कमी आने की उम्मीद है। नई कीमतें 9 नवंबर 2026 से पूरे देश में लागू होंगी। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने इस संबंध में 17 अक्टूबर को अधिसूचना जारी की थी। सरकार का उद्देश्य कैंसर के इलाज को अधिक किफायती बनाना और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।
137 कैंसर रोधी दवाओं की कीमतों में होगी कटौती
केंद्र सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले औषधि विभाग ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 137 गैर-अनुसूचित दवाओं के व्यापारिक मार्जिन को नियंत्रित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत दवाओं के वितरण और बिक्री से जुड़े व्यापारिक मुनाफे की सीमा 30 प्रतिशत निर्धारित की गई है।सरकार के इस फैसले से उन मरीजों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें लंबे समय तक महंगी दवाओं और इंजेक्शन का इस्तेमाल करना पड़ता है।हालांकि सभी दवाओं की कीमतों में समान कटौती नहीं होगी। कीमतों में कमी दवा के मौजूदा मूल्य और व्यापारिक मार्जिन के आधार पर अलग-अलग होगी।
9 नवंबर से देशभर में लागू होंगी नई कीमतें
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि संशोधित कीमतें 9 नवंबर 2026 से प्रभावी होंगी। इसके बाद अस्पतालों, मेडिकल स्टोर और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को निर्धारित नई दरों पर ही संबंधित दवाएं उपलब्ध करानी होंगी।दवा निर्माता कंपनियों को अपनी संशोधित मूल्य सूची सार्वजनिक करने और इसकी जानकारी अस्पतालों तथा दवा विक्रेताओं तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।सरकार ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि मरीजों को दवाओं की वास्तविक कीमतों की जानकारी आसानी से मिल सके। अस्पतालों को अपनी वेबसाइट और फार्मेसी में संशोधित कीमतें प्रदर्शित करनी होंगी।
ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और फेफड़ों के कैंसर के मरीजों को राहत की उम्मीद
सरकार के फैसले में कई महत्वपूर्ण कैंसर रोधी दवाएं शामिल हैं। इनमें इम्यूनोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी और कैंसर उपचार से जुड़ी सहायक दवाएं भी शामिल हैं।इन दवाओं में डेनोसुमैब, पेगफिलग्रास्टिम और बेवेसिजुमैब जैसी दवाएं शामिल हैं। डेनोसुमैब का इस्तेमाल स्तन और प्रोस्टेट कैंसर से संबंधित कुछ स्थितियों में किया जाता है। पेगफिलग्रास्टिम का उपयोग कीमोथेरेपी के दौरान श्वेत रक्त कोशिकाओं की कमी से होने वाली जटिलताओं को रोकने के लिए किया जाता है।वहीं बेवेसिजुमैब का उपयोग कोलन, ओवेरियन और सर्वाइकल कैंसर सहित कुछ प्रकार के कैंसर के इलाज में किया जाता है।सरकार के अनुसार, सूची में ऐसी इम्यूनोथेरेपी दवाएं भी शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल 20 से अधिक प्रकार के कैंसर के उपचार में किया जाता है।
543 ब्रांड की संशोधित कीमतें सामने आईं
27 अक्टूबर को एनपीपीए ने गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं की संशोधित अधिकतम खुदरा कीमतों की सूची प्रकाशित की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसमें 543 दवा ब्रांडों की नई कीमतें सामने आई हैं।कुछ जेनेरिक दवाओं में बड़ी कटौती दिखाई गई है। उदाहरण के तौर पर, सुनिटिनिब की एक सूचीबद्ध कीमत 889 रुपये से घटकर 285.69 रुपये और ओलापारिब की एक कीमत 15,398 रुपये से घटकर 2,695 रुपये होने की जानकारी सामने आई है।हालांकि कुछ पेटेंट वाली महंगी दवाओं की सूचीबद्ध कीमतों में बदलाव नहीं हुआ है। इसलिए मरीजों के लिए जरूरी है कि वे अपनी दवा के ब्रांड, मात्रा और पैकिंग के अनुसार नई कीमत की पुष्टि करें।
अस्पतालों और मेडिकल स्टोरों पर रहेगी निगरानी
सरकार ने आदेश के पालन की जिम्मेदारी दवा कंपनियों के साथ अस्पतालों और मेडिकल स्टोर संचालकों को भी दी है।राज्य औषधि नियंत्रकों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि संशोधित कीमतों का पालन हो और मरीजों से अधिक राशि नहीं वसूली जाए।यदि कोई कंपनी निर्धारित नियमों का उल्लंघन करती है, तो औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश, 2013 और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।कंपनियों को दवाओं का उत्पादन और आपूर्ति मौजूदा स्तर पर बनाए रखने के लिए भी कहा गया है, ताकि कीमतों में कटौती के बाद बाजार में दवाओं की कृत्रिम कमी पैदा न हो।
कैंसर के महंगे इलाज से मरीजों को मिलेगी आर्थिक राहत
भारत में कैंसर का इलाज कई परिवारों के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती बना हुआ है। जांच, सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और नियमित दवाओं पर काफी खर्च करना पड़ सकता है।विशेष रूप से लंबे समय तक चलने वाली दवा आधारित चिकित्सा में मरीजों को बार-बार महंगे इंजेक्शन और दवाएं खरीदनी पड़ती हैं।ऐसे में दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों में कटौती होने से उपचार संबंधी खर्च में कमी आ सकती है। हालांकि मरीज की कुल बचत इस बात पर निर्भर करेगी कि उसके उपचार में कौन-सी दवाएं इस्तेमाल हो रही हैं और उनकी कीमत में कितनी कमी की गई है।
पहले भी कैंसर की दवाओं की कीमतें घटा चुकी है सरकार
यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने कैंसर की दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाया है।वर्ष 2019 में भी एनपीपीए ने 42 कैंसर रोधी दवाओं के व्यापारिक मार्जिन को सीमित करने का फैसला किया था। उस पहल के बाद विभिन्न ब्रांडों की अधिकतम खुदरा कीमतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई थी।अब 137 दवाओं को इस व्यवस्था के दायरे में लाकर सरकार ने मूल्य नियंत्रण का विस्तार किया है।
मरीज कैसे पता करें अपनी दवा की नई कीमत?
मरीज अपनी कैंसर रोधी दवा की संशोधित कीमत जानने के लिए राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट [NPPA](https://nppa.gov.in/en?utm_source=chatgpt.com) पर जा सकते हैं।इसके अलावा सरकार के Pharma Sahi Daam ऐप के माध्यम से भी दवाओं की कीमतों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।मरीजों को सलाह दी जाती है कि वे दवा खरीदते समय बिल जरूर लें और चिकित्सक द्वारा लिखी गई दवा का नाम, डोज तथा ब्रांड जांचकर ही भुगतान करें।9 नवंबर से लागू होने वाली नई कीमतें कैंसर उपचार के खर्च को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। हालांकि यह कटौती सभी कैंसर दवाओं पर लागू नहीं होगी, लेकिन अधिसूचित दवाओं का इस्तेमाल करने वाले मरीजों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
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