लाइफ स्टाइल :  गुजरात की पारंपरिक रसोई अपने अनोखे स्वाद और स्थानीय सामग्रियों से तैयार होने वाले व्यंजनों के लिए मशहूर है। यहां हर मौसम के साथ खानपान का अंदाज भी बदल जाता है। सर्दियों के मौसम में बाजरे से बने पकवानों की मांग बढ़ जाती है। इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में एक खास नाम है ‘वघारेलो बाजरे नो रोटलो’। इसका स्वाद ऐसा होता है कि इसे खाने वाले लोग अगले साल सर्दियों के आने का इंतजार करने लगते हैं। ताजी सिकी बाजरे की रोटी, टमाटर-प्याज का मसालेदार तड़का, खट्टी छाछ और देसी घी का मेल इस व्यंजन को खास बनाता है।
क्या है वघारेलो बाजरे नो रोटलो?
‘वघारेलो बाजरे नो रोटलो’ गुजरात के पारंपरिक खानपान से जुड़ा एक देसी पकवान है। गुजराती में ‘रोटलो’ का अर्थ मोटी रोटी से है, जिसे आमतौर पर बाजरे के आटे से बनाया जाता है। वहीं, ‘वघारेलो’ का मतलब तड़का लगाकर या मसालों के साथ पकाया गया होता है। इस तरह यह पकवान बाजरे की रोटी को मसालेदार स्वाद के साथ दोबारा पकाकर तैयार किया जाता है।
इस डिश की खासियत यह है कि इसमें ताजी रोटी के साथ बची हुई बाजरे की रोटी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। रोटी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर टमाटर, प्याज, हरी मिर्च और दूसरे मसालों के साथ पकाया जाता है। इसके बाद इसमें खट्टी छाछ मिलाई जाती है, जिससे इसका स्वाद हल्का खट्टा, मसालेदार और बेहद लाजवाब हो जाता है। आखिर में देसी घी डालने से इसकी खुशबू और जायका और बढ़ जाता है।
11 महीने क्यों रहता है इस पकवान का इंतजार?
गुजरात के कई इलाकों में बाजरे से बने व्यंजन सर्दियों के खानपान का अहम हिस्सा माने जाते हैं। ठंड के मौसम में लोग गर्मागर्म रोटला, सब्जियां, छाछ और पारंपरिक देसी पकवानों का आनंद लेते हैं। वघारेलो बाजरे नो रोटलो भी इसी मौसमी खानपान की एक खास पहचान है।
इस व्यंजन का आकर्षण केवल इसके स्वाद तक सीमित नहीं है। इसे बनाने का तरीका, इसमें इस्तेमाल होने वाली स्थानीय सामग्री और परिवार के साथ बैठकर गर्मागर्म खाने का अनुभव इसे खास बनाता है। हालांकि, इसे तैयार करने के लिए किसी खास महीने का इंतजार करना जरूरी नहीं है, लेकिन पारंपरिक रूप से सर्दियों में इसका आनंद अधिक लिया जाता है। इसी वजह से इसे लेकर लोगों के बीच खास उत्साह देखने को मिलता है।
घर पर बनाने के लिए चाहिए ये सामग्री
वघारेलो बाजरे नो रोटलो बनाने के लिए बहुत महंगी या मुश्किल से मिलने वाली चीजों की जरूरत नहीं होती। इसे घर में मौजूद सामान्य सामग्री से आसानी से तैयार किया जा सकता है।
इसके लिए बाजरे की बनी हुई रोटियां, एक प्याज, एक या दो टमाटर, हरी मिर्च, अदरक, खट्टी छाछ, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, नमक, जीरा, राई, हींग, तेल और देसी घी की जरूरत होती है। स्वाद बढ़ाने के लिए हरा धनिया भी इस्तेमाल किया जा सकता है। सामग्री की मात्रा रोटियों की संख्या और खाने वालों के हिसाब से रखी जा सकती है।
आसान तरीके से ऐसे तैयार करें डिश
सबसे पहले बाजरे की रोटियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर रख लें। इसके बाद कड़ाही में थोड़ा तेल या घी गर्म करें। उसमें राई और जीरा डालें। तड़का चटकने लगे तो बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च और अदरक डालकर भूनें। प्याज हल्का सुनहरा होने पर कटे हुए टमाटर डालें और उन्हें नरम होने तक पकाएं।
अब इसमें हल्दी, लाल मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक डालकर मसाले को अच्छी तरह मिला लें। मसाले तैयार होने के बाद बाजरे की रोटी के टुकड़े डालें और उन्हें मिश्रण के साथ मिलाएं। इसके बाद थोड़ी-थोड़ी खट्टी छाछ डालते हुए पकाएं। छाछ की मात्रा इतनी रखें कि रोटी के टुकड़े नरम हो जाएं, लेकिन पकवान बहुत अधिक पतला न हो।
इस मिश्रण को धीमी आंच पर कुछ मिनट तक पकने दें। बीच-बीच में चलाते रहें, ताकि रोटी नीचे चिपके नहीं। जब रोटी मसालों और छाछ का स्वाद अच्छी तरह सोख ले, तो ऊपर से देसी घी और बारीक कटा हरा धनिया डाल दें। गर्मागर्म वघारेलो बाजरे नो रोटलो तैयार है।
स्वाद और पौष्टिकता का देसी मेल
बाजरे में फाइबर और कई जरूरी खनिज पाए जाते हैं। इसे भोजन में शामिल करने से संतुलित आहार का हिस्सा बनने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस पकवान की पौष्टिकता इसमें इस्तेमाल किए गए घी, तेल, नमक और छाछ की मात्रा पर भी निर्भर करती है। इसलिए इसे अपनी जरूरत और खानपान के अनुरूप तैयार किया जा सकता है।
इस डिश को सुबह के नाश्ते, दोपहर के भोजन या शाम के समय गर्मागर्म परोसा जा सकता है। इसके साथ दही, छाछ या कोई हल्की गुजराती चटनी भी रखी जा सकती है। इसकी खासियत यह है कि इसमें साधारण बाजरे की रोटी को एक नए और चटपटे अंदाज में पेश किया जाता है।
पारंपरिक स्वाद की खास पहचान
वघारेलो बाजरे नो रोटलो गुजरात की उस घरेलू पाक परंपरा की याद दिलाता है, जिसमें स्थानीय अनाज और रोजमर्रा की सामग्री से स्वादिष्ट भोजन तैयार किया जाता है। बाजरे की रोटी, खट्टेपन से भरपूर छाछ, प्याज-टमाटर का मसाला और देसी घी मिलकर इसे एक अलग पहचान देते हैं।
अगर आप सर्दियों में कुछ पारंपरिक, चटपटा और घर जैसा स्वाद चाहते हैं, तो यह गुजराती पकवान आजमाया जा सकता है। इसे बनाने में बहुत ज्यादा समय या जटिल प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती। सही मसालों और संतुलित छाछ के साथ तैयार किया गया वघारेलो बाजरे नो रोटलो साधारण रोटी को भी एक यादगार देसी डिश में बदल सकता है।
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