Urea, में आत्मनिर्भर बनेगा भारत, राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 को मिली मंजूरी
New Delhi नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की अहम बैठक में देश की आर्थिक, औद्योगिक और बुनियादी ढांचा क्षमता को मजबूत करने वाले कई बड़े फैसलों को मंजूरी दी गई है। सरकार ने भारत को यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 को मंजूरी दी है। इसके तहत देश में एक करोड़ टन अतिरिक्त यूरिया उत्पादन क्षमता विकसित की जाएगी।
इसके अलावा डिजिटल क्षेत्र में भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए ₹1.27 लाख करोड़ की ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना को मंजूरी दी गई है। वहीं, रेलवे नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए ओडिशा और झारखंड में ₹3,907 करोड़ की दो बड़ी मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी हरी झंडी दी गई है।
यूरिया उत्पादन में बढ़ेगी आत्मनिर्भरता
कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश में यूरिया की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में भारत को हर साल करीब 4 करोड़ टन यूरिया की आवश्यकता होती है, जबकि घरेलू उत्पादन लगभग 3 करोड़ टन है। उत्पादन और मांग के बीच करीब एक करोड़ टन का अंतर है, जिसे पूरा करने के लिए भारत को यूरिया का आयात करना पड़ता है।
राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 के तहत देश में प्राकृतिक गैस आधारित 8 से 9 नए आधुनिक यूरिया संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना है।
इस नीति में निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत कंपनियों को स्थिर और परिवर्तनीय लागत के आधार पर स्मार्ट सब्सिडी व्यवस्था मिलेगी। साथ ही यूरिया संयंत्र संचालित करने वाली कंपनियों को 12 से 16 प्रतिशत तक सुनिश्चित रिटर्न देने का प्रावधान किया गया है। विदेशी मुद्रा विनिमय में होने वाले उतार-चढ़ाव से बचाव के लिए भी वित्तीय सुरक्षा व्यवस्था तैयार की जाएगी।
सेमीकॉन 2.0 से मजबूत होगा भारत का चिप उद्योग
कैबिनेट ने देश के सेमीकंडक्टर क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना को भी मंजूरी दी है। इस योजना के लिए अगले छह वर्षों में ₹1,27,500 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया गया है।
सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से देश में करीब ₹4 लाख करोड़ का संचयी निवेश आएगा। इसके तहत सालाना ₹2 लाख करोड़ के चिप उत्पादन और ₹1 लाख करोड़ के निर्यात का लक्ष्य रखा गया है।
सेमीकंडक्टर चिप का इस्तेमाल मिसाइल, ड्रोन, कंप्यूटर, स्मार्टफोन, कैमरा और जहाजों सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में होता है। सरकार का लक्ष्य भारत को चिप निर्माण और डिजाइन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना है।
योजना के तहत पहली सेमीकंडक्टर फैब यूनिट वर्ष 2028 तक शुरू होने की संभावना है। वर्तमान में देश में 105 से अधिक स्टार्टअप चिप डिजाइन के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इन्हें आधुनिक तकनीक और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
इसके अलावा 315 विश्वविद्यालयों में 68 हजार से अधिक छात्रों को आधुनिक ईडीए टूल्स के जरिए चिप डिजाइनिंग का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। आने वाले समय में इस कार्यक्रम का विस्तार किया जाएगा।
ओडिशा-झारखंड में रेलवे नेटवर्क का विस्तार
कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूत करने और खनिज क्षेत्रों में परिवहन सुविधा बढ़ाने के लिए दो रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत ₹3,907 करोड़ है और इन्हें वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें ओडिशा के पारादीप-हरिदासपुर रेलखंड का दोहरीकरण और झारखंड-ओडिशा सीमा पर राजखरसावां-डांगोपोसी रेलखंड पर चौथी लाइन का निर्माण शामिल है।
करीब 145 किलोमीटर लंबे इस नए रेल नेटवर्क से ओडिशा और झारखंड के 1,526 गांवों की लगभग 14 लाख आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। इससे व्यापार, खनिज परिवहन और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार के अनुसार, इन रेल परियोजनाओं से हर साल करीब 6 करोड़ लीटर तेल आयात की बचत होगी और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 29 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी। यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
कैबिनेट के ये फैसले कृषि, तकनीक और परिवहन क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।