एक जिला तीन उत्पाद कार्यक्रम से हिमाचल प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा: CM
Shimla. शिमला। हिमाचल के प्रत्येक जिले के विशिष्ट उत्पादों को पहचान दिलवाने के उद्देश्य से सरकार नवीन कदम उठा रही है। इस क्रम में राज्य सरकार के वन डिस्ट्रिक्ट थ्री प्रोडक्ट (ओडीटीपी) कार्यक्रम के तहत प्रत्येक जिले के विशिष्ट उत्पादों को विशेष पहचान दिलाने तथा स्थानीय लोगों के लिए स्थाई आजीविका के अवसर सृजित करने के प्रयासों को गति प्रदान की जा रही है। इस पहल के अंतर्गत प्रत्येक जिले से तीन-तीन उत्पादों सहित प्रदेश के कुल 36 उत्पादों का चयन उनकी आर्थिक संभावनाओं, बाजार में मांग तथा स्थानीय महत्त्व के व्यापक आकलन के आधार पर किया गया है।
इनमें बिलासपुर से अदरक, रेशम उत्पादन (सेरीकल्चर) और मत्स्य पालन, चंबा से चंबा चप्पल, सफेद मक्की और ऊन, हमीरपुर से हल्दी, बांस और मक्की, कांगड़ा से कांगड़ा चाय, कांगड़ा लघु चित्रकला और गिलोय, किन्नौर से हिमाचली चुल्ली तेल, किन्नौरी शॉल और चिलगोजा, कुल्लू से ट्राउट मछली, हेम्प ऑयल और कुल्लू टोपी, लाहौल-स्पीति से सी-बकथॉर्न, पुल्ले और हरी मटर, मंडी से सेपू बड़ी, धातु शिल्प तथा पत्थर/लकड़ी की नक्काशी, शिमला से सेब आधारित उत्पाद, स्थानीय शहद, जौ का माल्ट एवं आटा तथा गुच्छी (मोरेल) मशरूम, सिरमौर से लहसुन, अदरक और सिरमौरी लोइया, सोलन से मशरूम, टमाटर और औषधि (फार्मास्यूटिकल) उत्पाद तथा ऊना से आलू, लीची और ड्रैगन फ्रूट शामिल हैं।
प्रदेश में उद्यमिता को प्रोत्साहन प्रदान करने और स्थानीय उत्पादकों को संभावित खरीदारों तथा उद्योगों से जोड़ने के लिए राज्य सरकार द्वारा तीन विक्रेता विकास कार्यक्रम और पांच रोजगार विकास कार्यक्रम आयोजित करवाए गए हैं। कार्यक्रम के अगले चरण में अक्टूबर 2026 में ओडीटीपी के तहत चयनित उत्पादों की एक भव्य प्रदर्शनी तथा रिवर्स बायर-सेलर मीट आयोजित की जाएगी। इस आयोजन में उत्पादकों, निर्यातकों, निवेशकों, खुदरा विक्रेताओं तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच पर लाया जाएगा, जिससे व्यापारिक साझेदारियों को बढ़ावा मिलेगा और उत्पादों को विस्तृत बाजार मिलेगा। इस पहल से स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाएं सुदृढ़ होंगी, युवाओं और महिलाओं में उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा तथा राज्य में मूल्य संवर्धन के नए अवसर सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य की आगामी औद्योगिक नीति में चिन्हित उत्पादों से जुड़े उद्यमों के लिए व्यापक प्रोत्साहन पैकेज प्रदान किया जाएगा। इसमें भूमि पर रियायत, स्टाम्प शुल्क में छूट, रियायती बिजली, एसजीएसटी प्रतिपूर्ति तथा प्राथमिकता क्षेत्र के दर्जे जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएगी, जिससे स्थानीय उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उद्योग निवेशक वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। इससे स्थानीय उद्यमियों को अपने कारोबार का विस्तार करने और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रभावी प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चयनित उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन पर विशेष बल दिया जाएगा। इसके लिए उत्पादकों को प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड करने के साथ-साथ उन्हें व्यापारिक मेलों, प्रदर्शनियों और बायर-सेलर मीट में भागीदारी के लिए भी सहयोग प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जिला तीन उत्पाद कार्यक्रम न केवल हिमाचल प्रदेश की समृद्ध विरासत और पारंपरिक कौशल के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर सृजित करने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और राज्य के समग्र आर्थिक विकास में भी मील पत्थर साबित होगा।