नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के नेतृत्व में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को भारतीय वायुसेना के 29वें वायुसेना प्रमुख यानी 'चीफ ऑफ द एयर स्टाफ' (CAS) के रूप में कार्यभार संभाला। पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) पहुंचकर देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने अपनी माता श्रीमती निर्मला दीक्षित और सास श्रीमती कमला पांडे को नमन कर उनका आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर सैन्य परंपराओं के साथ पारिवारिक संस्कारों की झलक भी देखने को मिली।
एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित भारतीय वायुसेना के अनुभवी वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल हैं। उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM), अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM), वायु सेना पदक (VM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) जैसे प्रतिष्ठित सैन्य सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है। इन सम्मानों का संबंध सशस्त्र बलों में विशिष्ट सेवाओं, उत्कृष्ट नेतृत्व और कर्तव्यनिष्ठा से है।
वायुसेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने के बाद राष्ट्रीय समर स्मारक पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि देना भारतीय सशस्त्र बलों की गौरवशाली परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है। यह स्मारक देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले सैनिकों के सम्मान में स्थापित किया गया है। यहां देश के सर्वोच्च सैन्य अधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति शहीदों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं।
एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने भी पदभार ग्रहण करने के बाद पुष्पांजलि अर्पित कर देश के वीर जवानों को नमन किया। यह कार्यक्रम भारतीय वायुसेना के नए नेतृत्व के कार्यकाल की शुरुआत का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
इस अवसर का एक भावनात्मक पहलू तब सामने आया, जब नए वायुसेना प्रमुख ने अपनी माता निर्मला दीक्षित और सास कमला पांडे को नमन किया। सैन्य नेतृत्व के सर्वोच्च पदों में से एक पर पहुंचने के बाद परिवार के वरिष्ठ सदस्यों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का यह क्षण विशेष रहा। यह दृश्य भारतीय पारिवारिक परंपराओं में माता-पिता और बुजुर्गों के प्रति सम्मान की भावना को भी दर्शाता है।
एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने निवर्तमान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का स्थान लिया है। अमर प्रीत सिंह लगभग 42 वर्षों की विशिष्ट सैन्य सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं। इससे पहले आशुतोष दीक्षित वायुसेना उपप्रमुख के पद पर कार्यरत थे। रक्षा मंत्रालय ने छह अक्टूबर 2026 को उनकी नियुक्ति की घोषणा की थी।
Press Information Bureau+1
आशुतोष दीक्षित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र हैं। उन्हें छह दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की लड़ाकू विमान शाखा में कमीशन मिला था। करीब चार दशक लंबे सैन्य करियर में उन्होंने अभियान संचालन, उड़ान परीक्षण, सैन्य क्षमताओं के विकास और संयुक्त सैन्य मुख्यालयों से जुड़े कई महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी निभाई है।
वह एक अनुभवी लड़ाकू विमान पायलट होने के साथ योग्य उड़ान प्रशिक्षक और प्रायोगिक परीक्षण पायलट भी हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उन्हें 3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। उन्होंने मिराज-2000, मिग श्रृंखला के विभिन्न लड़ाकू विमानों, जगुआर और परिवहन विमानों सहित कई प्रकार के विमानों का संचालन किया है।
भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण में भी आशुतोष दीक्षित की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने जगुआर और मिग-27 विमानों के उन्नयन से जुड़ी परियोजनाओं को अंतिम रूप देने में योगदान दिया। इसके अलावा स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस के शुरुआती और अंतिम परिचालन मंजूरी संबंधी कार्यों में भी उनकी भूमिका रही है।
अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने मिराज-2000 लड़ाकू विमान स्क्वाड्रन की कमान संभाली। इसके अतिरिक्त पश्चिमी क्षेत्र में एक अग्रिम वायुसेना सहायता इकाई और वायुसेना स्टेशन बीदर का नेतृत्व भी किया। बीदर भारतीय वायुसेना के महत्वपूर्ण लड़ाकू विमान प्रशिक्षण केंद्रों में शामिल है।
आशुतोष दीक्षित दक्षिणी वायु कमान में एयर डिफेंस कमांडर, दक्षिण-पश्चिमी वायु कमान में वरिष्ठ एयर स्टाफ अधिकारी और वायुसेना के डिप्टी चीफ के पदों पर भी कार्य कर चुके हैं। इन जिम्मेदारियों के दौरान उन्हें परिचालन तैयारियों, रक्षा खरीद और सैन्य क्षमता विकास से जुड़े विषयों पर काम करने का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ।
इसके बाद उन्होंने केंद्रीय वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में जिम्मेदारी संभाली। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष के मुख्यालय में चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के पद पर कार्यरत थे। वायुसेना प्रमुख बनने से पहले वह वाइस चीफ ऑफ द एयर स्टाफ थे।
एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने बांग्लादेश के डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और नई दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज से भी उच्च सैन्य शिक्षा प्राप्त की है। उनके अनुभव में रणनीतिक योजना, रक्षा प्रबंधन और तीनों सेनाओं के बीच समन्वय जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।
नए वायुसेना प्रमुख के सामने भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता और आधुनिकीकरण को आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। लड़ाकू विमानों की उपलब्धता बढ़ाना, स्वदेशी विमान परियोजनाओं को गति देना और नई तकनीकों को सैन्य क्षमताओं में शामिल करना प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है।
भारतीय वायुसेना के सामने लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या बढ़ाने की चुनौती भी है। पुराने विमानों के चरणबद्ध रूप से सेवा से हटने और नए विमानों की आपूर्ति में देरी के कारण बेड़े के आधुनिकीकरण का विषय महत्वपूर्ण बना हुआ है। तेजस एमके-1ए जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमानों की आपूर्ति और भविष्य की खरीद परियोजनाओं की प्रगति पर भी नए नेतृत्व के दौरान नजर रहेगी।
भारतीय वायुसेना देश की हवाई सीमाओं की सुरक्षा, रणनीतिक अभियानों और आपात परिस्थितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच आधुनिक लड़ाकू विमानों, वायु रक्षा प्रणालियों और उन्नत तकनीक की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में आशुतोष दीक्षित का व्यापक परिचालन और तकनीकी अनुभव वायुसेना के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पदभार ग्रहण करने के बाद राष्ट्रीय समर स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि और परिवार की वरिष्ठ महिलाओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने का उनका कार्यक्रम चर्चा में रहा। सैन्य सेवा में अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है।
एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित के नेतृत्व में भारतीय वायुसेना के सामने राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने के साथ आधुनिक सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने की जिम्मेदारी होगी। उनका लंबा सैन्य अनुभव और विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर निभाई गई जिम्मेदारियां इस नए कार्यकाल की प्रमुख विशेषताएं हैं।