नई दिल्ली : 26 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक हस्तशिल्प और क्षेत्रीय व्यंजनों को विशेष महत्व दिया गया। सहारनपुर की प्रसिद्ध लकड़ी की नक्काशी से लेकर बिहार के मिथिला क्षेत्र के मखाने तक, भारतीय कला और खानपान की विविधता इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के सांस्कृतिक आकर्षण का हिस्सा बनी। संसद परिसर में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से विदेशी प्रतिनिधियों को भारत की पारंपरिक कलाओं, स्थानीय उत्पादों और सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराने की पहल की गई।भारत की मेजबानी में 26 और 27 अक्टूबर को आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन का मुख्य विषय 'जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों का सुदृढ़ीकरण' रखा गया है।
सहारनपुर की लकड़ी की नक्काशी बनी आकर्षण
उत्तर प्रदेश का सहारनपुर अपनी उत्कृष्ट लकड़ी की नक्काशी और हस्तशिल्प के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यहां के कारीगर लकड़ी पर फूल-पत्तियों, ज्यामितीय आकृतियों और पारंपरिक डिजाइनों की बारीक नक्काशी करते हैं।सहारनपुर की इस कला का इतिहास लगभग 400 वर्ष पुराना माना जाता है। शीशम की लकड़ी से तैयार सजावटी सामान, फर्नीचर, डिब्बे और अन्य हस्तनिर्मित वस्तुएं इसकी प्रमुख पहचान हैं।ब्रिक्स संसदीय मंच से जुड़े सांस्कृतिक आयोजनों में उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के हस्तशिल्प को स्थान दिया गया। इससे स्थानीय कारीगरों की कला को अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
मिथिला के मखाने ने बढ़ाई बिहार की पहचान
बिहार के मिथिला क्षेत्र का मखाना भारतीय पारंपरिक खाद्य संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अपनी पौष्टिकता और विशिष्ट स्वाद के कारण इसकी देश-विदेश में मांग बढ़ रही है।इससे पहले सितंबर में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मीडिया किट में बिहार के सत्तू और मखाने को शामिल किया गया था। इस पहल का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और पत्रकारों को भारत के क्षेत्रीय खाद्य उत्पादों से परिचित कराना था।मखाना उत्पादन से जुड़े किसानों और स्थानीय उद्यमियों के लिए ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन अपने उत्पादों की पहचान बढ़ाने का अवसर प्रदान करते हैं।
संसद परिसर में सजा भारतीय संस्कृति का बाजार
ब्रिक्स संसदीय मंच के अवसर पर संसद परिसर में सांस्कृतिक बाजार की भी व्यवस्था की गई। इसमें दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु सहित विभिन्न राज्यों के कारीगरों को अपनी कलाकृतियां प्रदर्शित करने का अवसर दिया गया।इस आयोजन का उद्देश्य विदेशी प्रतिनिधियों को भारतीय हस्तशिल्प की विविधता और परंपरागत निर्माण तकनीकों से परिचित कराना है।भारतीय हस्तशिल्प न केवल देश की सांस्कृतिक पहचान है, बल्कि लाखों कारीगर परिवारों की आजीविका से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलने की संभावनाएं बढ़ती हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया सम्मेलन का उद्घाटन
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को ऐतिहासिक संविधान सदन में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का उद्घाटन किया। उन्होंने सदस्य और साझेदार देशों से जन-केंद्रित विकास, वैश्विक शांति, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत बनाने का आह्वान किया।बिरला ने कहा कि विभिन्न देशों की भौगोलिक, सांस्कृतिक और भाषाई विविधता आपसी सहयोग को मजबूत करने का आधार बन सकती है।सम्मेलन में संसदीय संस्थाओं की मजबूती, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक, वैश्विक शासन व्यवस्था और सतत विकास जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
सांस्कृतिक कूटनीति से मजबूत होंगे अंतरराष्ट्रीय संबंध
ब्रिक्स संसदीय मंच में सांस्कृतिक कार्यक्रमों को शामिल करने का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आपसी समझ और संपर्क बढ़ाना भी है।भारतीय कला, हस्तशिल्प और खानपान के माध्यम से विदेशी प्रतिनिधियों को देश की विविध परंपराओं से परिचित कराया जा रहा है। कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिनिधिमंडलों के लिए संसद भ्रमण और दिल्ली के सांस्कृतिक स्थलों के दौरे की भी व्यवस्था की गई है।भारत के उपराष्ट्रपति की ओर से विदेशी अतिथियों के सम्मान में भोज का कार्यक्रम भी निर्धारित किया गया है।
स्थानीय कारीगरों और उत्पादों को मिलेगा वैश्विक मंच
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन स्थानीय उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है। इससे हस्तशिल्प, कृषि उत्पादों और क्षेत्रीय व्यंजनों की अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत हो सकती है।सहारनपुर की लकड़ी की कलाकारी और मिथिला के मखाने जैसे उत्पाद भारत की सांस्कृतिक तथा आर्थिक विविधता का प्रतिनिधित्व करते हैं।ब्रिक्स संसदीय मंच ने राजनीतिक और आर्थिक संवाद के साथ भारतीय विरासत को प्रस्तुत करने का भी अवसर दिया है। यह आयोजन दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग में व्यापार और कूटनीति के साथ संस्कृति, परंपरा और स्थानीय उद्यमिता की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।