मुंबई/नई दिल्ली,  विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अपने समकक्ष शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ बातचीत के दौरान कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति "गहरी चिंता" का विषय बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भारत बातचीत और कूटनीति के जरिए शांति को बढ़ावा देने के सभी प्रयासों का समर्थन करेगा। UAE के उप प्रधानमंत्री भी रहे अल नाहयान सोमवार रात दो दिवसीय दौरे पर मुंबई पहुंचे। उनकी यह भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब सऊदी अरब पर हौथी विद्रोहियों द्वारा हमलों की एक नई लहर देखी गई है।
बैठक की शुरुआत में अपने संबोधन में, जयशंकर ने इस बात का भी जिक्र किया कि कैसे भारत और UAE के बीच 'व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते' (CEPA) ने द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंधों को काफी मजबूत किया है। उन्होंने कहा, "खाड़ी क्षेत्र की स्थिति गहरी चिंता का विषय बनी हुई है। हम मिलकर काम करना जारी रखेंगे और बातचीत तथा कूटनीति को बढ़ावा देने वाले सभी प्रयासों का समर्थन करेंगे।"
उन्होंने कहा, "हम व्यापार, ऊर्जा और उर्वरकों के मुक्त, सुरक्षित और निर्बाध प्रवाह का समर्थन करते रहेंगे। मैं आपको और आपके माध्यम से UAE के नेतृत्व को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने UAE में रहने वाले भारतीय समुदाय की भलाई सुनिश्चित की है।" जयशंकर ने यह भी कहा कि वैश्विक चुनौतियों और क्षेत्रीय कठिनाइयों के बावजूद, दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी "नए मानक" स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा, "CEPA पर हस्ताक्षर होने के बाद से द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है। दोनों तरफ से निवेश भी लगातार बढ़ रहा है, जो एक-दूसरे की अर्थव्यवस्थाओं में हमारे व्यवसायों के भरोसे को दर्शाता है।"
उन्होंने कहा, "रक्षा, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग अब एक रणनीतिक रूप ले रहा है। हमारे लोगों के बीच के संबंध हमारे समुदायों के जीवन को समृद्ध बना रहे हैं। हमारी सांस्कृतिक साझेदारी भी तेजी से आगे बढ़ रही है।" 2022 में नई दिल्ली और अबू धाबी के बीच CEPA समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद से द्विपक्षीय व्यापार और लोगों के बीच संबंधों में काफी तेजी आई है। CEPA, स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली और द्विपक्षीय निवेश संधि की बदौलत, दोनों देश एक-दूसरे के प्रमुख व्यापारिक और निवेश साझेदार बन गए हैं।
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