नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र के 17वें दिन मंगलवार को भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिला। सदन में विपक्ष के हंगामे और विरोध के बीच राज्यसभा ने ‘ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया। यह विधेयक लोकसभा से पहले ही पारित हो चुका है। विधेयक के कानून बनने के बाद देश के विभिन्न न्यायाधिकरणों में अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए ‘नेशनल ट्रिब्यूनल कमीशन’ के गठन का रास्ता साफ होगा। वहीं लोकसभा में भी भारी हंगामे के बीच दो महत्वपूर्ण विधेयक बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित कर दिए गए। इसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
राज्यसभा में दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ‘ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026’ को सदन में रखा और इसे पारित कराने का प्रस्ताव पेश किया। विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को बोलने की अनुमति नहीं मिलने पर विपक्षी सांसदों ने नाराजगी जताई। इसके बाद इंडिया ब्लॉक के कई सांसदों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
विधेयक पर सरकार का पक्ष रखते हुए कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की ‘सुधार एक्सप्रेस’ का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि विधेयक का उद्देश्य न्यायाधिकरणों के अधिकार क्षेत्र में बदलाव करना नहीं है, बल्कि अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया में दक्षता, स्वतंत्रता, पारदर्शिता और पात्रता के संबंध में एकरूपता लाना है।
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, न्यायाधिकरणों के युक्तिकरण की प्रक्रिया वर्ष 2016 में शुरू की गई थी और वर्ष 2021 में इससे संबंधित कानून लाया गया था। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर तैयार किए गए नए कानून के प्रभावी होने के बाद ‘न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम, 2021’ निरस्त हो जाएगा। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से न्यायाधिकरणों के कामकाज में सुधार होगा और नियुक्तियों की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
प्रस्तावित ‘नेशनल ट्रिब्यूनल कमीशन’ का मुख्यालय नई दिल्ली में होगा। इसमें एक अध्यक्ष के अलावा चार सदस्य होंगे। इनमें दो न्यायिक और दो तकनीकी सदस्य शामिल होंगे। अध्यक्ष के पद के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या किसी हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश पात्र होंगे। सरकार का कहना है कि आयोग का उद्देश्य ट्रिब्यूनल व्यवस्था को मजबूत करना, नियुक्तियों में निष्पक्षता सुनिश्चित करना और न्यायालयों पर लंबित मामलों के बोझ को कम करने में मदद करना है।
उधर, लोकसभा में भी मंगलवार को विपक्ष के भारी हंगामे के बीच दो विधेयक पारित किए गए। इनमें ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ और ‘राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026’ शामिल हैं। केरल नाम परिवर्तन विधेयक के जरिए राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव रखा गया है। विधेयक के विरोध को लेकर केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस तथा केरल के विपक्षी नेताओं पर निशाना साधा।
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम संशोधन विधेयक का उद्देश्य सहकारी क्षेत्र को मजबूत करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने से जुड़ा बताया गया है। सरकार का कहना है कि सहकारी समितियों को मजबूत करने से ग्रामीण स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
संसद परिसर में भी मंगलवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव देखने को मिला। मकर द्वार के बाहर दोनों पक्षों के सांसदों ने नारेबाजी की। विपक्षी सांसद छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, गृह मंत्री अमित शाह से जवाब और राम मंदिर के चंदे में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहे थे। वहीं भाजपा सांसदों ने झारखंड में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
इसी दौरान कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के संसद पहुंचने पर भाजपा सांसदों ने राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी की। इस पर प्रियंका गांधी ने कहा कि राहुल गांधी झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों से पहले ही मिल चुके हैं। संसद के भीतर और बाहर जारी इस राजनीतिक खींचतान के कारण मानसून सत्र के दौरान लगातार हंगामे की स्थिति बनी हुई है। अब बुधवार को दोनों सदनों की कार्यवाही सुबह 11 बजे से शुरू होगी, जहां विपक्ष और सरकार के बीच टकराव जारी रहने की संभावना है।