नई दिल्ली : 28 अक्टूबर 2026। देश में बढ़ती महंगाई, खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों और घरेलू कर्ज को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार की आर्थिक नीतियों के कारण आम आदमी पर वित्तीय दबाव लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने खाद्य महंगाई, घरेलू कर्ज में वृद्धि और परिवारों की बचत में गिरावट का हवाला देते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि त्योहारों के समय महंगाई का बोझ लोगों की कमाई पर भारी पड़ रहा है।
त्योहारों के बीच महंगाई पर खरगे ने उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने दावा किया कि देश के आम नागरिकों के लिए बढ़ती कीमतों का सामना करना कठिन होता जा रहा हैखरगे ने आरोप लगाया कि त्योहारों के दौरान आवश्यक वस्तुओं की महंगाई लोगों की आमदनी और बचत को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को आम नागरिकों की आर्थिक परेशानियों पर ध्यान देना चाहिए।कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने बयान में मतदान के अधिकार से जुड़े राजनीतिक आरोप भी लगाए। उन्होंने केंद्र सरकार के रवैये की आलोचना करते हुए महंगाई को नागरिकों के जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।हालांकि, ये खरगे के राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें सरकार की ओर से स्वीकार किए गए निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
खाद्य महंगाई 7.74 प्रतिशत पहुंचने का दिया हवाला
खरगे ने अपने बयान में खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि को प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने दावा किया कि खाद्य महंगाई दर 2.13 प्रतिशत से बढ़कर 7.74 प्रतिशत तक पहुंच गई है।सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भी सितंबर 2026 में देश की खाद्य महंगाई दर 7.74 प्रतिशत दर्ज की गई थी। वहीं, इसी अवधि में खुदरा महंगाई दर 5.54 प्रतिशत रही।ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर 6.08 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 4.88 प्रतिशत दर्ज की गई। खाद्य महंगाई ग्रामीण क्षेत्रों में 8.06 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 7.18 प्रतिशत रही।ये आंकड़े 12 अक्टूबर 2026 को जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की रिपोर्ट में सामने आए थे।खाद्य महंगाई बढ़ने का सीधा संबंध घरेलू बजट से होता है। अनाज, सब्जियां, दूध, तेल और अन्य जरूरी खाद्य पदार्थों पर परिवारों को अपनी आमदनी का महत्वपूर्ण हिस्सा खर्च करना पड़ता है।
घरेलू कर्ज में 36.7 प्रतिशत बढ़ोतरी का दावा
कांग्रेस अध्यक्ष ने घरेलू कर्ज के मुद्दे पर भी मोदी सरकार को घेरा। उन्होंने अपने बयान में दावा किया कि परिवारों पर कर्ज का बोझ 36.7 प्रतिशत बढ़ा है।खरगे ने सवाल उठाया कि यदि अर्थव्यवस्था में लगातार विकास हो रहा है, तो आम परिवारों की वित्तीय स्थिति पर दबाव क्यों बना हुआ है।घरेलू कर्ज में वृद्धि आर्थिक बहस का महत्वपूर्ण विषय है। इसमें आवास ऋण, वाहन ऋण, व्यक्तिगत ऋण और अन्य प्रकार की उधारी शामिल हो सकती है।हालांकि, घरेलू कर्ज बढ़ने का अर्थ हमेशा आर्थिक संकट नहीं होता। कई बार बढ़ती आय, आवास खरीदने की मांग और औपचारिक बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार भी कर्ज में वृद्धि का कारण बनते हैं।इसलिए कर्ज की वास्तविक स्थिति समझने के लिए परिवारों की आय, बचत, ब्याज भुगतान और ऋण चुकाने की क्षमता जैसे संकेतकों का अध्ययन करना जरूरी है।
घरेलू बचत में गिरावट को लेकर भी चिंता
खरगे ने कहा कि घरेलू वित्तीय बचत में चार प्रतिशत की गिरावट आई है। उन्होंने इसे आम परिवारों पर बढ़ते आर्थिक दबाव से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा।इस बीच, कांग्रेस ने बुधवार को घरेलू बचत और आर्थिक असमानता का मुद्दा भी उठाया। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में शुद्ध घरेलू वित्तीय बचत घटकर 21.69 लाख करोड़रुपये रह गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 22.57 लाख करोड़ रुपये थी।रिपोर्ट के अनुसार, परिवारों की उधारी वित्तीय परिसंपत्तियों में बढ़ोतरी की तुलना में तेजी से बढ़ने के कारण शुद्ध बचत पर असर पड़ा।घरेलू बचत का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह परिवारों को बीमारी, बेरोजगारी और अचानक आने वाले आर्थिक संकट से निपटने में मदद करती है।
खुदरा और थोक महंगाई को लेकर सरकार से सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने खुदरा महंगाई के साथ थोक महंगाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने थोक महंगाई दर 11.39 प्रतिशत होने का आंकड़ा प्रस्तुत किया।हालांकि, इस विशिष्ट थोक महंगाई दर की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों से नहीं हो सकी है। इसलिए इसे खरगे के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।खरगे ने कहा कि महंगाई से जुड़े आंकड़े देश की आर्थिक परिस्थितियों के बारे में महत्वपूर्ण सवाल खड़े करते हैं।अर्थशास्त्र के अनुसार, खुदरा और थोक महंगाई अलग-अलग संकेतक हैं। खुदरा महंगाई उपभोक्ताओं द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव दर्शाती है, जबकि थोक महंगाई थोक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों के परिवर्तन को मापती है।
2014 से पहले के भाजपा के नारों की दिलाई याद
खरगे ने भारतीय जनता पार्टी को वर्ष 2014 से पहले महंगाई के मुद्दे पर चलाए गए राजनीतिक अभियानों की भी याद दिलाई।उन्होंने कहा कि भाजपा सत्ता में आने से पहले महंगाई के खिलाफ अभियान चलाती थी और तत्कालीन सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराती थी।कांग्रेस अध्यक्ष ने भाजपा से सवाल किया कि अब सत्ता में रहते हुए वह महंगाई के मुद्दे पर क्या कदम उठा रही है। उन्होंने सरकार से आम लोगों की आर्थिक परेशानियों पर जवाबदेही की मांग की।कांग्रेस ने रोजगार और आर्थिक असमानता का मुद्दा भी उठायामहंगाई के साथ कांग्रेस ने रोजगार, आमदनी और आर्थिक असमानता को भी राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बनाया है।28 अक्टूबर को कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि आर्थिक विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि केवल सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के आंकड़ों से आम नागरिक की आर्थिक स्थिति का पूरा आकलन नहीं किया जा सकताकांग्रेस ने सरकार से रोजगार के नए अवसर पैदा करने, महंगाई पर नियंत्रण के उपाय करने और घरेलू वित्तीय दबाव कम करने की मांग की है।दूसरी ओर, केंद्र सरकार आर्थिक विकास के संकेतकों और जीडीपी वृद्धि को अपनी आर्थिक नीतियों की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करती रही है। सरकार विपक्ष के आर्थिक कुप्रबंधन संबंधी आरोपों को भी खारिज करती रही है।
महंगाई और घरेलू कर्ज पर बढ़ सकती है राजनीतिक बहस
खरगे के ताजा बयान के बाद महंगाई, घरेलू बचत और कर्ज के मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।कांग्रेस इन विषयों को आम लोगों की रोजमर्रा की आर्थिक परेशानियों से जोड़कर सरकार से जवाब मांग रही है। वहीं, आर्थिक स्थिति का व्यापक आकलन करने के लिए महंगाई के साथ रोजगार, वास्तविक मजदूरी, घरेलू आय और विकास दर जैसे आंकड़ों को भी देखना आवश्यक है।फिलहाल सितंबर 2026 की 5.54 प्रतिशत खुदरा महंगाई और 7.74 प्रतिशत खाद्य महंगाई के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि कीमतों का दबाव आर्थिक चर्चा का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। आने वाले समय में महंगाई पर नियंत्रण और घरेलू वित्तीय स्थिति में सुधार सरकार के सामने अहम चुनौतियां रहेंगी।