नई दिल्ली। राज्यसभा में मंगलवार को अयोध्या स्थित राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित चोरी का मुद्दा उठाने को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को इस मुद्दे को सदन में उठाने की अनुमति नहीं दी। इस दौरान सभापति ने कहा कि उन पर हमेशा खड़गे की ओर से दबाव रहता है।
मंगलवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद कुछ देर के लिए स्थगित कर दी गई थी। दोपहर 12 बजे जब कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो सभापति ने प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू कराई। इसी दौरान खड़गे अपनी सीट से खड़े हुए और अयोध्या राम मंदिर के लिए मिले दान से जुड़े कथित चोरी के मामले को सदन में उठाने की कोशिश की।
हालांकि, सभापति ने उन्हें इस मुद्दे पर बोलने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद सदन में कुछ देर के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस की स्थिति बनी।
खड़गे ने उठाना चाहा राम मंदिर दान का मुद्दा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित चोरी से जुड़े मामले को राज्यसभा में उठाने की मांग की। उनका प्रयास था कि इस विषय पर सदन में चर्चा हो और संबंधित मामले को सरकार के सामने रखा जाए।
हालांकि, सभापति ने यह कहते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया कि यह विषय सदन की कार्यवाही के निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के तहत उस समय उठाने के लिए स्वीकार्य नहीं है।
खड़गे के इस प्रयास के बाद सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि उन पर हमेशा विपक्ष के नेता की ओर से दबाव रहता है। सभापति की इस टिप्पणी के बाद सदन का माहौल कुछ समय के लिए गर्म हो गया।
‘झारखंड का मुद्दा’ भी उठाने की नहीं मिली अनुमति
सभापति ने अपने फैसले को स्पष्ट करते हुए एक अन्य उदाहरण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने इससे पहले झारखंड से जुड़े एक मुद्दे को भी सदन में उठाने की अनुमति नहीं दी थी।
सभापति के मुताबिक, चूंकि झारखंड से संबंधित मामला राज्य का विषय था, इसलिए उन्होंने सत्ताधारी दल के सदस्यों को भी उसे सदन में उठाने की अनुमति नहीं दी थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सदन की कार्यवाही में नियम सभी सदस्यों पर समान रूप से लागू होते हैं।
इस संदर्भ का इस्तेमाल करते हुए सभापति ने संकेत दिया कि राम मंदिर के दान से जुड़ा मुद्दा उठाने की अनुमति न देना किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि सदन की प्रक्रिया से संबंधित है।
प्रश्नकाल के दौरान हुआ घटनाक्रम
मंगलवार को राज्यसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद सभापति ने प्रश्नकाल की शुरुआत की। प्रश्नकाल के दौरान सांसद विभिन्न मंत्रालयों और सरकार से संबंधित मुद्दों पर सवाल पूछते हैं।
इसी दौरान खड़गे ने राम मंदिर के दान से जुड़े कथित चोरी के मामले को उठाने की कोशिश की। सभापति ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी और सदन की निर्धारित कार्यवाही आगे बढ़ाने की कोशिश की।
विपक्ष की ओर से इस मुद्दे को उठाने की कोशिश ऐसे समय हुई है, जब धार्मिक संस्थानों और उनसे जुड़े दान की राशि के प्रबंधन को लेकर राजनीतिक बहस लगातार होती रही है। राम मंदिर देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है और इसके निर्माण के लिए देशभर से बड़ी मात्रा में दान प्राप्त हुआ था।
सदन में नियमों को लेकर जोर
सभापति सीपी राधाकृष्णन ने अपने रुख के दौरान सदन की कार्यवाही में नियमों और प्रक्रियाओं के पालन पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी मुद्दे को सदन में उठाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि कोई मामला किसी विशेष राज्य के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा है, तो उसे राज्यसभा में उठाने की अनुमति देने के संबंध में भी नियमों का ध्यान रखा जाता है।
झारखंड के मामले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यदि सत्ताधारी दल के सदस्य भी किसी ऐसे विषय को उठाना चाहें, जो उस समय सदन की कार्यवाही के अनुरूप नहीं हो, तो उन्हें भी अनुमति नहीं दी जाती।
सत्ता पक्ष और विपक्ष में बढ़ी तनातनी
राम मंदिर दान का मुद्दा उठाने की अनुमति नहीं मिलने के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद एक बार फिर सामने आए। विपक्ष अक्सर सरकार पर महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने का आरोप लगाता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से सदन की नियमावली के तहत कार्यवाही चलाने पर जोर दिया जाता है।
मंगलवार की घटना भी इसी राजनीतिक खींचतान का हिस्सा नजर आई। खड़गे द्वारा मुद्दा उठाने की कोशिश और सभापति द्वारा उसे अनुमति नहीं दिए जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच असहमति सामने आई।
सभापति की टिप्पणी कि उन पर खड़गे का दबाव रहता है, ने इस घटनाक्रम को और राजनीतिक रंग दे दिया। हालांकि, सभापति ने अपने फैसले को नियमों और सदन की कार्यवाही से जोड़कर स्पष्ट करने की कोशिश की।
राम मंदिर दान को लेकर क्या है विवाद?
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से बड़ी संख्या में लोगों ने दान दिया था। मंदिर निर्माण और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर समय-समय पर विभिन्न सवाल और विवाद सामने आते रहे हैं। मंगलवार को खड़गे ने इसी संदर्भ में दान में कथित चोरी के मुद्दे को राज्यसभा में उठाने का प्रयास किया।
हालांकि, सभापति द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के कारण यह मुद्दा उस समय सदन में विस्तृत चर्चा का विषय नहीं बन सका।
विपक्ष की ओर से भविष्य में भी इस मामले को किसी अन्य संसदीय प्रक्रिया के तहत उठाने की कोशिश की जा सकती है। वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से सदन की नियमावली के अनुसार ही किसी भी मुद्दे पर चर्चा की अनुमति दिए जाने की बात कही जा सकती है।
आगे भी जारी रह सकती है राजनीतिक बहस
मंगलवार की घटना ने एक बार फिर राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक तनाव को सामने ला दिया। राम मंदिर से जुड़ा विषय होने के कारण इस मुद्दे का राजनीतिक महत्व भी काफी अधिक है।
फिलहाल सभापति ने खड़गे की मांग को स्वीकार नहीं किया और प्रश्नकाल की कार्यवाही को आगे बढ़ाया। उन्होंने झारखंड के मुद्दे का उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि नियमों के तहत किसी विषय को अनुमति नहीं दिए जाने का फैसला केवल विपक्ष के लिए नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के सदस्यों पर भी लागू होता है।
इस घटनाक्रम के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष राम मंदिर दान में कथित चोरी के मुद्दे को आगे किस संसदीय मंच पर उठाता है और सरकार की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है। मंगलवार की कार्यवाही ने साफ कर दिया कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और सदन के भीतर टकराव जारी रहने की संभावना है।