माता भगवती देवी शर्मा के जन्म शताब्दी समारोह में एलजी संधू का बड़ा संदेश
नई दिल्ली : 1 नवंबर 2026। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने रविवार को कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र 'वसुधैव कुटुंबकम' वैश्विक एकता, शांति और मानव कल्याण की मजबूत आधारशिला है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया जलवायु परिवर्तन, सामाजिक असमानता, स्वास्थ्य संकट और विभिन्न प्रकार के संघर्षों जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। इन समस्याओं का स्थायी समाधान आपसी सहयोग, करुणा और मानवीय मूल्यों के माध्यम से ही संभव है। उपराज्यपाल ने यह विचार नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के जन्म शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। इस अवसर पर भारत और ब्रिटेन की कई प्रमुख हस्तियों ने भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं और विश्व शांति में उनके योगदान पर अपने विचार रखे।उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने माता भगवती देवी शर्मा के जीवन और उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें सेवा, समर्पण और त्याग की प्रेरणादायी प्रतिमूर्ति बताया। उन्होंने कहा कि माताजी ने अपना जीवन समाज के कल्याण, आध्यात्मिक जागरण और मानवीय मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित किया। उनका जीवन यह संदेश देता है कि व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर समाज और मानवता की सेवा करना ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए।
संधू ने कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता उसकी समावेशी सोच है। 'वसुधैव कुटुंबकम' का अर्थ है कि संपूर्ण विश्व एक परिवार है। यह विचार केवल धार्मिक या आध्यात्मिक अवधारणा नहीं, बल्कि वैश्विक संबंधों को मजबूत बनाने का व्यावहारिक आधार भी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देशों और समाजों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए इस विचारधारा की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है।उपराज्यपाल ने अपने संबोधन में योग के महत्व पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति, आत्मनियंत्रण और संतुलित जीवनशैली को भी प्रोत्साहित करता है। आधुनिक जीवन की व्यस्तताओं और तनाव के बीच योग व्यक्ति को स्वस्थ तथा सकारात्मक जीवन जीने की दिशा प्रदान करता है।उन्होंने कहा कि गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी शर्मा की शिक्षाएं आज भी मानवता को शांति, सद्भाव और कल्याण का मार्ग दिखाती हैं। उनके विचारों में व्यक्तिगत विकास के साथ समाज और राष्ट्र के उत्थान की भावना निहित है। इन आदर्शों को जीवन में अपनाकर सामाजिक समरसता और मानवता के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत किया जा सकता है।
समारोह में ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य कृष्ण रावल ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता, योग, ध्यान और यज्ञ भारतीय संस्कृति की ऐसी महत्वपूर्ण देन हैं, जिनका लाभ पूरी दुनिया उठा सकती है। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत व्यक्ति के भीतर से होती है। जब व्यक्ति अपनी सोच में सकारात्मकता, करुणा और मानवता की भावना विकसित करता है, तभी समाज में स्थायी परिवर्तन संभव होता है।ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स के एक अन्य सदस्य लॉर्ड रसेल रूक ने कहा कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए आध्यात्मिक जागरण, विश्वास, योग और ध्यान की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। उन्होंने माता भगवती देवी शर्मा के जीवन को मानव सेवा और आध्यात्मिक समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण बताया। साथ ही अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा संचालित सामाजिक और आध्यात्मिक गतिविधियों की सराहना की।
इस दौरान चर्च ऑफ इंग्लैंड के एंग्लिकन बिशप राइट रेवरेंड लूसा ने विश्व में प्रेम, सहयोग और एकता की भावना बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जाति, धर्म, भाषा और राष्ट्रीयता के आधार पर उत्पन्न होने वाले विभाजनों से ऊपर उठकर लोगों को एक-दूसरे के प्रति अपनत्व विकसित करना चाहिए। उन्होंने भारतीय दर्शन के 'वसुधैव कुटुंबकम' सिद्धांत को वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में विशेष रूप से प्रासंगिक बताया।समारोह में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संस्कृति के प्रसार को लेकर भी चर्चा हुई। लॉर्ड रसेल रूक ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या को वर्ष 2027 में ब्रिटेन में प्रस्तावित जी-20 से संबंधित कार्यक्रम में भाग लेने का निमंत्रण दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डॉ. पंड्या के विचार और भारतीय संस्कृति का संदेश अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई दिशा प्रदान कर सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा माता भगवती देवी शर्मा की जन्म शताब्दी के अवसर पर 31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक तीन दिवसीय महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। समारोह की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चारण और ध्वजारोहण के साथ हुई थी। पहले दिन 20 हजार से अधिक लोगों ने कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने माता भगवती देवी शर्मा के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके जीवन की तपस्या, करुणा और सेवा भावना ने महिला सशक्तीकरण तथा सामाजिक सुधार के क्षेत्र में प्रेरणादायी भूमिका निभाई है। उन्होंने गायत्री परिवार के व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और राष्ट्र निर्माण के प्रयासों की सराहना की।महोत्सव के दौरान महिला सशक्तीकरण, सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक जागरण, विश्व बंधुत्व और मानव कल्याण जैसे विषयों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। दूसरे दिन 'वसुधैव कुटुंबकम' और विश्व शांति पर केंद्रित गतिविधियां रखी गईं। सामूहिक दीपयज्ञ के माध्यम से विश्व शांति और सद्भाव का संकल्प लेने का कार्यक्रम भी निर्धारित किया गया है।
आयोजकों के अनुसार, तीन दिवसीय समारोह का समापन 2 नवंबर को युग निर्माण के महासंकल्प के साथ होगा। इस आयोजन का उद्देश्य माता भगवती देवी शर्मा और पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा सेवा, सद्भाव और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू का संबोधन इसी व्यापक संदेश पर केंद्रित रहा कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए केवल नीतिगत प्रयास ही नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनशीलता और सहयोग की भावना भी आवश्यक है। उन्होंने भारतीय संस्कृति के 'वसुधैव कुटुंबकम' सिद्धांत को विश्व में शांति और एकता स्थापित करने की महत्वपूर्ण प्रेरणा बताया।