नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली को वैश्विक मेडिकल हब बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। मुख्यमंत्री ने मंगलवार (3 नवंबर 2026) को कहा कि दिल्ली में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित करने के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने बताया कि राजधानी के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटें 595 से बढ़ाकर 820 और स्नातकोत्तर यानी पीजी की सीटें 553 से बढ़ाकर 762 की जा रही हैं। इस फैसले से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले युवाओं के लिए नए अवसर उपलब्ध होंगे और भविष्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह जानकारी सिविल लाइंस स्थित संत परमानंद अस्पताल में नवनिर्मित अत्याधुनिक आईवीएफ सेंटर के उद्घाटन के दौरान दी। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, अस्पतालों की सुविधाएं बढ़ाने और चिकित्सा शिक्षा का विस्तार करने के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य दिल्ली को ऐसा चिकित्सा केंद्र बनाना है, जहां देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों से आने वाले मरीजों को भी आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी को बेहतर मेडिकल हब बनाने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। निजी अस्पतालों, चिकित्सा संस्थानों और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र से जुड़ी अन्य संस्थाओं की भागीदारी भी आवश्यक है। सरकारी और निजी क्षेत्र के सहयोग से आधुनिक उपकरण, विशेषज्ञ डॉक्टर और बेहतर उपचार सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं।उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रति एक हजार आबादी पर पांच अस्पताल बिस्तरों के मानक की दिशा में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री के अनुसार, दिल्ली की बढ़ती आबादी और मरीजों की जरूरतों को देखते हुए स्वास्थ्य ढांचे का लगातार विस्तार जरूरी है।
मेडिकल शिक्षा को लेकर मुख्यमंत्री ने बताया कि एमबीबीएस की वर्तमान 595 सीटों को बढ़ाकर 820 करने की योजना है। इससे कुल 225 अतिरिक्त सीटें उपलब्ध होंगी। इसी तरह पीजी की 553 सीटों को बढ़ाकर 762 किया जाएगा, जिससे विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा के लिए 209 नई सीटें मिलेंगी।इस तरह दोनों पाठ्यक्रमों में कुल 434 अतिरिक्त सीटें उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। यह कदम उन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, जो चिकित्सा क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं।
एमबीबीएस और पीजी की सीटें बढ़ने से चिकित्सा संस्थानों की प्रशिक्षण क्षमता में वृद्धि होगी। इसके साथ ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, नई सीटों पर प्रवेश संबंधित नियामकीय स्वीकृतियों और निर्धारित प्रवेश प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।मुख्यमंत्री ने अस्पतालों के विस्तार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि राजधानी में पांच परियोजनाओं पर कुल 503.49 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य अस्पतालों की क्षमता और चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करना है।
दिल्ली सरकार द्वारका के इंदिरा गांधी अस्पताल में नया मेडिकल कॉलेज विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 805.99 करोड़ रुपये है। नया मेडिकल कॉलेज बनने से राजधानी में चिकित्सा शिक्षा के अवसर बढ़ने के साथ मरीजों को उपचार की अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध कराने में भी मदद मिल सकती है।स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए सरकार डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने पर भी ध्यान दे रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में 4,000 से अधिक नए पद स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा 1,200 से अधिक नर्सों और 954 सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है।
स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पर्याप्त चिकित्सा कर्मचारियों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है। नए पदों और नियुक्तियों से सरकारी अस्पतालों में मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने की क्षमता बेहतर होने की उम्मीद है।मुख्यमंत्री ने बताया कि जीबी पंत अस्पताल में न्यूरो आईसीयू सहित आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और सुविधाओं का विकास किया गया है। इसके अलावा दिल्ली के 16 सरकारी अस्पतालों में कुल 300 डायलिसिस मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं।
डायलिसिस सुविधाओं का विस्तार गुर्दे की गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए महत्वपूर्ण है। सरकारी अस्पतालों में ऐसी सुविधाएं बढ़ने से जरूरतमंद मरीजों को उपचार प्राप्त करने में सहूलियत मिल सकती है।सरकार प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, दिल्ली में 415 आयुष्मान आरोग्य मंदिर और 29 जन औषधि केंद्र शुरू किए गए हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य लोगों को प्राथमिक उपचार और किफायती दवाओं तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना है।
डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी सरकार ने कई कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि राजधानी में एक करोड़ से अधिक आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता यानी आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं। इसके अलावा 38 सरकारी अस्पतालों में डिजिटल हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है।डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का प्रबंधन और चिकित्सा सेवाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में उपचार के दौरान अपने स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेज संभालने में सुविधा मिल सकती है।
महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नवजात शिशुओं के लिए 56 प्रकार की जांच नि:शुल्क उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा 10 हजार नि:शुल्क कैंसर जांच करने और नौ से 14 वर्ष की बालिकाओं को एचपीवी टीकाकरण उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है।मुख्यमंत्री के अनुसार, विधवा और दिव्यांग पेंशन योजनाओं के 5.28 लाख से अधिक लाभार्थियों तथा उनके परिवारों को भी स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत शामिल किया गया है।संत परमानंद अस्पताल में शुरू किए गए नए आईवीएफ सेंटर के बारे में बताया गया कि यहां संतान प्राप्ति में कठिनाइयों का सामना करने वाले दंपतियों को आधुनिक प्रजनन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। केंद्र में इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन यानी आईवीएफ और इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म
इंजेक्शन
यानी आईसीएसआई जैसी सेवाएं मिलेंगी।
इसके अलावा विशेषज्ञ डॉक्टरों और भ्रूण विज्ञान विशेषज्ञों की मदद से मरीजों को आवश्यक जांच, उपचार और परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इसे राजधानी में आधुनिक चिकित्सा सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।दिल्ली सरकार के इन प्रयासों का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा, आधुनिक अस्पतालों, विशेषज्ञ डॉक्टरों और डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाओं को एक साथ मजबूत करना है।हालांकि, घोषणाओं का वास्तविक लाभ मरीजों और विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए परियोजनाओं का समय पर पूरा होना, आवश्यक स्वीकृतियां मिलना और अस्पतालों में पर्याप्त कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा।
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