Education मंत्रालय में बड़ा बदलाव, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर

Update: 2026-07-25 09:24 GMT

नई दिल्ली   :    राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और NEET परीक्षा से जुड़े विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आई है। मेडिकल अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों की ओर से लगातार जवाबदेही तय करने और शिक्षा मंत्रालय की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे थे। इसी बीच धर्मेंद्र प्रधान की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संदेश जारी कर अपने पद से त्यागपत्र देने की जानकारी साझा किए जाने की बात सामने आई है।

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संदेश में शिक्षा क्षेत्र से अपने लंबे जुड़ाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह पिछले कई दशकों से छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधारों से जुड़े कार्यों में सक्रिय रहे हैं। उनके अनुसार एक मजबूत, समावेशी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था ही मजबूत राष्ट्र के निर्माण की आधारशिला है।

उन्होंने अपने वक्तव्य में देश के युवाओं की उम्मीदों और उनकी चिंताओं का सम्मान करने की बात कही। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि छात्रों को निष्पक्ष अवसर मिल सकें।

इस्तीफे की खबर की पृष्ठभूमि NEET-UG परीक्षा में सामने आई कथित अनियमितताओं से जुड़ी बताई जा रही है। परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों ने विरोध प्रदर्शन किए थे। कई छात्र संगठनों ने इस मामले में जिम्मेदारी तय करने और कड़ी कार्रवाई की मांग की थी।

विवाद सामने आने के बाद सरकार की ओर से जांच और सुधारात्मक कदम उठाए जाने की बात कही गई थी। मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपे जाने, परीक्षा प्रक्रिया में बदलाव और भविष्य की परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कदम उठाने की जानकारी भी सामने आई थी।

छात्र संगठनों का कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि लाखों युवा वर्षों की मेहनत के बाद इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं। वहीं सरकार की ओर से भी परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जाती रही है।

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संदेश में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किए गए प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं का भरोसा बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

इस घटनाक्रम के बाद शिक्षा मंत्रालय और केंद्र सरकार की आगे की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। छात्र आंदोलन, परीक्षा सुधार और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में भी चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।

NEET जैसे बड़े स्तर की परीक्षाओं में लाखों अभ्यर्थी शामिल होते हैं, ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता और निष्पक्षता को लेकर सरकार पर लगातार दबाव रहा है। अब इस पूरे मामले में आगे क्या प्रशासनिक और राजनीतिक कदम उठाए जाते हैं, इस पर देशभर के छात्रों और शिक्षा जगत की नजर बनी हुई है।

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