Jantar -मंतर पर जश्न का माहौल, अभिजीत दीपके बोले- झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए

Update: 2026-07-25 10:14 GMT

नई दिल्ली  :   केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन में उत्साह का माहौल देखने को मिला। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके इस फैसले के बाद भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति या संगठन की जीत नहीं है, बल्कि देशभर के छात्रों के संघर्ष, धैर्य और एकजुटता का परिणाम है।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की सूचना मिलते ही जंतर-मंतर पर मौजूद छात्रों और कार्यकर्ताओं के बीच खुशी की लहर दौड़ गई। प्रदर्शन स्थल पर नारेबाजी और जश्न का माहौल बन गया। छात्रों ने इसे अपने लंबे आंदोलन की सफलता बताते हुए एक-दूसरे को बधाई दी। कई प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनकी आवाज आखिरकार सरकार तक पहुंची और लगातार संघर्ष के बाद यह बड़ा फैसला सामने आया।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि "झुकती है दुनिया, बस झुकाने वाला चाहिए।" उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से छात्र लगातार अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर डटे हुए थे। आंदोलन के दौरान उनसे बार-बार पूछा जाता था कि क्या सरकार इस मुद्दे पर कोई कदम उठाएगी और क्या इस्तीफा होगा, लेकिन छात्रों ने अपना संघर्ष जारी रखा।

अभिजीत दीपके ने कहा कि बीते 36 दिनों से छात्र हर दिन धैर्य और दृढ़ता के साथ आंदोलन कर रहे थे। उन्होंने बताया कि कई लोगों को विश्वास नहीं था कि इस तरह का आंदोलन कोई बड़ा बदलाव ला पाएगा, लेकिन छात्रों की एकजुटता और लगातार प्रयासों ने यह साबित कर दिया कि लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई आवाज प्रभाव डाल सकती है।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं था, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर था। छात्रों की मांग थी कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाया जाए और ऐसी व्यवस्थाएं तैयार की जाएं, जिससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सके।

जंतर-मंतर पर मौजूद छात्रों ने भी इस फैसले को अपने संघर्ष की जीत बताया। उनका कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले लाखों युवाओं का भविष्य जुड़ा होता है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई जरूरी है, ताकि छात्रों का भरोसा शिक्षा व्यवस्था पर बना रहे।

हालांकि, आंदोलनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल किसी एक व्यक्ति के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। वे परीक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार, पारदर्शिता और छात्रों के हितों की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक व्यवस्था में ठोस बदलाव नहीं किए जाते, तब तक उनकी आवाज जारी रहेगी।

जंतर-मंतर पर हुए इस घटनाक्रम के बाद छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। आंदोलनकारी इसे युवाओं की एकजुट शक्ति का उदाहरण बता रहे हैं और आगे भी शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहने की बात कह रहे हैं।

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