नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की हिरासत को लेकर सियासी विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दोनों नेताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ममता बनर्जी ने दोनों नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग की है। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी ने इस मुद्दे पर समर्थन देने के लिए उनका आभार जताया है। इस बीच सोमवार, 19 अक्टूबर को दिल्ली की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत ने आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी। इसके बाद दोनों नेताओं को फिलहाल तिहाड़ जेल में ही रहना होगा।
ममता बनर्जी ने हिरासत को लेकर उठाए सवाल
ममता बनर्जी ने कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं की हिरासत पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताने वाले युवाओं के खिलाफ इस प्रकार की कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है।
उन्होंने हिरासत की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे राज्य प्रायोजित दमन से जोड़ा और दोनों नेताओं को तत्काल रिहा करने की मांग की। ममता बनर्जी के बयान के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
वहीं, सीजेपी ने समर्थन के लिए ममता बनर्जी का आभार जताया है। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सभी राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए।
दो दिन और बढ़ाई गई न्यायिक हिरासत
दिल्ली की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत ने सोमवार को सीजेपी नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया।
दोनों नेताओं को 13 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था। इसके अगले दिन 14 अक्टूबर को उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद सोमवार को दोनों को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया।
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताएं जाहिर करते हुए उनकी हिरासत बढ़ाने का अनुरोध किया। पुलिस का कहना था कि दोनों नेताओं की रिहाई से सार्वजनिक शांति प्रभावित होने की आशंका है।
इसके बाद अदालत ने दो दिन की अतिरिक्त हिरासत का आदेश दिया। मामले में अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को निर्धारित है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़ा है मामला
आशुतोष रांका और सौरव दास के खिलाफ कार्रवाई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ी है। कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर विरोध जता रहे थे।
जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर परिसर में प्रवेश करने का प्रयास किया। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने बंद गेट और बैरिकेड पार करके उस स्थान पर प्रवेश किया, जिसे हाल ही में अधिसूचित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया था।
दिल्ली पुलिस ने इसे बिना अनुमति प्रवेश और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े नियमों का उल्लंघन बताया। इसी आधार पर सीजेपी नेताओं के खिलाफ निवारक कार्रवाई की गई।
पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है और किसी भी प्रदर्शन के दौरान निर्धारित नियमों का पालन किया जाना आवश्यक है।
सीजेपी ने कार्रवाई को बताया अनुचित
कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने नेताओं की हिरासत को अनुचित बताते हुए पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
पार्टी के कानूनी प्रतिनिधियों का आरोप है कि आशुतोष रांका और सौरव दास की रिहाई की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी की जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि दोनों नेताओं की ओर से आवश्यक जमानती दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने के बावजूद उनकी रिहाई नहीं हो सकी।
सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने न्यायिक प्रक्रिया को लेकर असंतोष जताया है। पार्टी का आरोप है कि सुनवाई और जमानत संबंधी प्रक्रियाओं में सामने आई बाधाओं से दोनों नेताओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित हुई है।
हालांकि, अदालत ने अपने आदेश में पूर्व में दिए गए शांति बनाए रखने संबंधी आश्वासनों के उल्लंघन और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का उल्लेख किया है।
अदालत के फैसले को चुनौती देने की तैयारी
सीजेपी की कानूनी टीम ने न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के फैसले पर असहमति जताई है। पार्टी के वकीलों का कहना है कि उपलब्ध कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करते हुए आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।
अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि हिरासत को जारी रखने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि दोनों नेताओं की गतिविधियों को देखते हुए सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए कार्रवाई जरूरी थी।
अब मामले में अगली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत के समक्ष हिरासत की आवश्यकता, जमानती दस्तावेजों और पुलिस की आपत्तियों पर आगे विचार किया जा सकता है।
विपक्षी नेताओं का भी मिल रहा समर्थन
सीजेपी नेताओं की हिरासत का विरोध केवल ममता बनर्जी तक सीमित नहीं है। इससे पहले दक्षिण भारत के कई प्रमुख विपक्षी नेताओं ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे।
भारत राष्ट्र समिति के केटी रामाराव, द्रमुक नेता एमके स्टालिन और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन सहित कई नेताओं ने विरोध प्रदर्शन करने वाले युवाओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है।
इन नेताओं का तर्क है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और असहमति व्यक्त करने के अधिकार की रक्षा होनी चाहिए।
हालांकि, प्रशासन का पक्ष है कि प्रदर्शन का अधिकार कानून-व्यवस्था और निर्धारित नियमों के दायरे में आता है।
21 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी नजरें
सीजेपी नेताओं की हिरासत को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। ममता बनर्जी के समर्थन के बाद यह मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया है।
आशुतोष रांका और सौरव दास के समर्थक उनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं, जबकि दिल्ली पुलिस अपनी कार्रवाई को सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए आवश्यक बता रही है।
अब 21 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। इस दौरान दोनों नेताओं की रिहाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकता है।
फिलहाल यह मामला केवल दो नेताओं की हिरासत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन के अधिकार, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर व्यापक बहस का विषय बन चुका है।