SCO बैठक में भारत की बड़ी भागीदारी, ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति ने राजनाथ सिंह का किया स्वागत
दुशान्बे। ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान भारत की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। मंगलवार, 20 अक्टूबर को ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान ने राष्ट्रपति भवन 'पैलेस ऑफ द नेशन' में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और एससीओ के अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत किया। इस अवसर पर विभिन्न देशों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। राजनाथ सिंह संगठन की शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए ताजिकिस्तान पहुंचे हैं। बैठक में व्यापार, अर्थव्यवस्था, निवेश, क्षेत्रीय संपर्क, नवाचार और सांस्कृतिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा प्रस्तावित है। भारत की भागीदारी को मध्य एशियाई देशों के साथ संबंध मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्रपति इमोमाली रहमान ने किया प्रतिनिधियों का स्वागत
ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान ने दुशान्बे स्थित पैलेस ऑफ द नेशन में एससीओ के सदस्य देशों से आए प्रतिनिधियों का स्वागत किया।
इस दौरान भारत की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उपस्थित रहे। एससीओ की बैठक में विभिन्न सदस्य देशों के प्रतिनिधि क्षेत्रीय सहयोग और साझा हितों से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श करने के लिए एकत्र हुए हैं।
ताजिकिस्तान इस महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी कर रहा है। ऐसे में राजधानी दुशान्बे एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनी हुई है।
एससीओ का यह मंच सदस्य देशों को आर्थिक विकास, व्यापारिक संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
सोमवार को दुशान्बे पहुंचे थे राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार, 19 अक्टूबर को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे पहुंचे थे।
वह 19 और 20 अक्टूबर को आयोजित एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
दुशान्बे पहुंचने पर ताजिकिस्तान के रक्षा मंत्री इमोमाली सोबिरजोदा ने उनका स्वागत किया।
इस अवसर पर ताजिकिस्तान के विदेश मंत्रालय के एशिया-प्रशांत विभाग के प्रमुख शेराली जोनोन भी उपस्थित थे।
राजनाथ सिंह का स्वागत स्थानीय भारतीय समुदाय और ताजिक नागरिकों ने भी किया। कुछ स्थानीय लोगों ने हिंदी भाषा में उनसे बातचीत की और भारतीय संस्कृति के प्रति अपना लगाव व्यक्त किया।
ताजिकिस्तान के रक्षा मंत्री से हुई द्विपक्षीय बातचीत
एससीओ बैठक से पहले राजनाथ सिंह ने ताजिकिस्तान के रक्षा मंत्री इमोमाली सोबिरजोदा के साथ महत्वपूर्ण मुलाकात की।
इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और ताजिकिस्तान के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा की।
बैठक में प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और दोनों देशों के रक्षा संस्थानों के बीच साझेदारी बढ़ाने जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
ताजिकिस्तान के रक्षा मंत्री ने भारत के रक्षा मंत्री की यात्रा पर प्रसन्नता व्यक्त की और दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने की इच्छा जताई।
भारत और ताजिकिस्तान लंबे समय से रक्षा तथा सुरक्षा संबंधी विषयों पर सहयोग करते रहे हैं।
इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
व्यापार और निवेश पर रहेगा विशेष जोर
भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय ने 18 अक्टूबर को जारी आधिकारिक बयान में बताया था कि एससीओ की इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाना है।
बैठक में विशेष रूप से व्यापार, अर्थव्यवस्था, निवेश, परिवहन संपर्क, नवाचार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
इसके अलावा संगठन के तहत चल रही विभिन्न सहयोग परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी।
सदस्य देशों के प्रतिनिधि एससीओ के वित्तीय और संस्थागत कामकाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार करेंगे।
आर्थिक गतिविधियों में सहयोग बढ़ाने और सदस्य देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को सुगम बनाने पर चर्चा होने की उम्मीद है।
भारत के लिए महत्वपूर्ण है एससीओ का मंच
शंघाई सहयोग संगठन एशिया और यूरेशिया के प्रमुख बहुपक्षीय संगठनों में शामिल है।
इसमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस सहित कुल दस पूर्ण सदस्य देश शामिल हैं।
भारत वर्ष 2017 में इस संगठन का पूर्ण सदस्य बना था।
एससीओ के माध्यम से भारत क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास, व्यापार, ऊर्जा और परिवहन संपर्क से जुड़े मुद्दों पर अन्य सदस्य देशों के साथ संवाद करता है।
मध्य एशियाई देशों के साथ भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। ऐसे में यह संगठन भारत को इन देशों के साथ आर्थिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
डिजिटल तकनीक और नवाचार में भारत की भूमिका
भारत एससीओ के विभिन्न मंचों पर डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, स्टार्टअप और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर देता रहा है।
भारत सरकार के अनुसार, सदस्य देशों के बीच तकनीकी अनुभव साझा करना और डिजिटल सुविधाओं को बढ़ावा देना क्षेत्रीय विकास में सहायक हो सकता है।
इसके साथ ही भारत लोगों के बीच संपर्क और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी महत्वपूर्ण मानता है।
संगठन की बैठक में इन क्षेत्रों में चल रही पहलों की प्रगति पर विचार किए जाने की संभावना है।
भारत की ओर से ऐसे सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे सदस्य देशों को व्यावहारिक और पारस्परिक लाभ मिल सके।
मध्य एशिया में सुरक्षा सहयोग की बढ़ती अहमियत
एससीओ के सदस्य देशों के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण विषय है।
मध्य एशिया की भौगोलिक स्थिति और अफगानिस्तान से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों के कारण इस क्षेत्र में आतंकवाद, उग्रवाद और सीमा पार अपराधों को लेकर सहयोग आवश्यक माना जाता है।
भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर देता रहा है।
ताजिकिस्तान भी अफगानिस्तान की सीमा से लगा हुआ देश है। ऐसे में क्षेत्रीय स्थिरता उसके लिए महत्वपूर्ण विषय है।
हालांकि शासनाध्यक्ष परिषद की इस बैठक का प्रमुख घोषित एजेंडा आर्थिक और बहुपक्षीय सहयोग है, लेकिन एससीओ के व्यापक ढांचे में सुरक्षा से जुड़े विषय भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
पिछले वर्ष मॉस्को में हुई थी बैठक
एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद की पिछली बैठक 18 नवंबर 2025 को रूस की राजधानी मॉस्को में आयोजित हुई थी।
उस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने किया था।
इस बार भारत की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हिस्सा ले रहे हैं।
भारत की निरंतर भागीदारी यह दर्शाती है कि देश एससीओ के विभिन्न मंचों के माध्यम से क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
भारत-ताजिकिस्तान संबंधों को मिलेगी मजबूती
राजनाथ सिंह की ताजिकिस्तान यात्रा को दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत करने के अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।
भारत और ताजिकिस्तान के बीच रक्षा, सुरक्षा, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग की संभावनाएं मौजूद हैं।
दुशान्बे में हुई द्विपक्षीय बातचीत से इन क्षेत्रों में आगे सहयोग बढ़ाने की दिशा तय करने में मदद मिल सकती है।
इसके साथ ही एससीओ के अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधियों से संवाद भारत के लिए क्षेत्रीय हितों पर अपनी प्राथमिकताएं सामने रखने का अवसर है।
ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान की ओर से राजनाथ सिंह और अन्य प्रतिनिधियों का स्वागत इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक का प्रमुख घटनाक्रम रहा। अब बैठक के औपचारिक निष्कर्षों और सदस्य देशों के बीच संभावित सहमति पर नजर रहेगी।