WhatsApp समेत सभी चैटिंग ऐप्स पर नया रेगुलेशन! सरकार बना रही कॉमन फ्रेमवर्क

Update: 2026-07-11 13:20 GMT

New Delhi नई दिल्ली : व्हाट्सएप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार देश में संचालित सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए समान नियम लागू करने की तैयारी कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) एक ऐसे साझा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क पर काम कर रहा है, जो किसी एक ऐप या कंपनी तक सीमित न होकर सभी मैसेजिंग सेवाओं पर समान रूप से लागू होगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार का उद्देश्य डिजिटल कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म्स के लिए एक समान सुरक्षा और पारदर्शिता मानक तय करना है, ताकि यूजर्स की गोपनीयता, सुरक्षा और डेटा संरक्षण को बेहतर तरीके से सुनिश्चित किया जा सके। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है, जब व्हाट्सएप के नए यूजरनेम फीचर को लेकर सरकार और प्लेटफॉर्म के बीच चिंता सामने आई है।

दरअसल, व्हाट्सएप एक ऐसे फीचर पर काम कर रहा है, जिसके तहत यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए दूसरे लोगों से बातचीत कर सकेंगे। इस फीचर में यूजर अपने लिए एक अलग यूजरनेम बना सकेंगे, जिसके जरिए उन्हें मैसेज किया जा सकेगा। हालांकि, सरकार ने इस व्यवस्था को लेकर कुछ चिंताएं जताई हैं।

सरकार की चिंता मुख्य रूप से यूजर पहचान, सुरक्षा और जवाबदेही से जुड़ी बताई जा रही है। मौजूदा व्यवस्था में व्हाट्सएप अकाउंट मोबाइल नंबर से जुड़ा होता है, जिससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में पहचान करना अपेक्षाकृत आसान होता है। नए यूजरनेम सिस्टम में मोबाइल नंबर छिप जाने से सुरक्षा एजेंसियों के लिए जांच प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

इसी को देखते हुए केंद्र सरकार सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए एक समान नीति बनाने पर विचार कर रही है। इस नीति के तहत यूजर की पहचान, डेटा सुरक्षा, शिकायत निवारण व्यवस्था और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही जैसे मुद्दों को शामिल किया जा सकता है।

भारत में व्हाट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के करोड़ों यूजर्स हैं। ऐसे में सरकार का मानना है कि अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स के लिए अलग नियम होने के बजाय सभी के लिए एक समान मानक होना जरूरी है।

सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित नियमों में यूजर की निजता और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जाएगी। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि नई तकनीक और फीचर्स के कारण साइबर अपराध, फर्जी पहचान और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसी समस्याओं को बढ़ावा न मिले।

हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से इस संबंध में कोई अंतिम नियम या आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। मंत्रालय विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रहा है और आने वाले समय में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के साथ चर्चा के बाद नए दिशा-निर्देश तैयार किए जा सकते हैं।

व्हाट्सएप का यूजरनेम फीचर यूजर्स की प्राइवेसी बढ़ाने के उद्देश्य से लाया जा रहा है, लेकिन सरकार चाहती है कि ऐसे बदलावों के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत बनी रहे। आने वाले समय में तय होगा कि भारत में मैसेजिंग सेवाओं के संचालन के लिए किस तरह के नए मानक लागू किए जाते हैं।

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