Delhi's के तालाबों को लेकर NGT सख्त, अवैध कब्जे हटाकर मूल स्वरूप में बहाल करने का आदेश
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने दिल्ली में तालाबों और प्राकृतिक जलस्रोतों पर बढ़ते अतिक्रमण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अधिकरण ने संबंधित अधिकारियों को तालाबों पर हुए अवैध कब्जों की पहचान कर कानून के अनुसार कार्रवाई करने तथा जलाशयों के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक जलस्रोतों को सुरक्षित रखना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और इनके संरक्षण में लापरवाही पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिले में स्थित एक तालाब से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अधिकरण ने अधिकारियों को अतिक्रमण की सूची तैयार करने और कानूनी प्रक्रिया के तहत कब्जे हटाने की कार्रवाई शुरू करने को कहा। साथ ही तालाब में कचरा डालने तथा बिना उपचारित सीवेज के प्रवाह को रोकने के निर्देश भी दिए गए।
तालाबों के संरक्षण को लेकर NGT ने जताई चिंता
एनजीटी ने जलाशयों की लगातार बिगड़ती स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। अधिकरण के सामने पेश रिपोर्टों में तालाब क्षेत्र में अतिक्रमण होने की बात सामने आई थी।अधिकरण ने कहा कि जलाशयों की सुरक्षा के लिए ऐसे उपाय अपनाए जाने चाहिए, जिनसे उनकी प्राकृतिक जल संचयन क्षमता प्रभावित न हो। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने और कार्रवाई की प्रगति से अवगत कराने के निर्देश दिए गए।दिल्ली में कई तालाब और पारंपरिक जलस्रोत शहरीकरण, निर्माण गतिविधियों और अवैध कब्जों के कारण प्रभावित हुए हैं। ऐसे में इनका संरक्षण राजधानी की पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अवैध कब्जों की पहचान कर कार्रवाई करने के निर्देश
एनजीटी ने संबंधित अधिकारियों को तालाब की भूमि पर मौजूद सभी अतिक्रमणों की पहचान करने तथा उनकी सूची तैयार करने को कहा है।अधिकरण ने स्पष्ट किया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए ही की जानी चाहिए। किसी भी निर्माण को बिना उचित प्रक्रिया अपनाए ध्वस्त नहीं किया जा सकता।साथ ही दिल्ली हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट या अन्य सक्षम अदालतों द्वारा दिए गए आदेशों का पालन करना भी आवश्यक होगा।एनजीटी के इस निर्देश का उद्देश्य जलाशयों को अतिक्रमण से मुक्त कराना और भविष्य में उनकी भूमि पर अवैध कब्जे रोकना है।
पक्की दीवार की जगह पौधों से घेराबंदी का सुझाव
तालाब के संरक्षण को लेकर एनजीटी ने एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय सुझाव भी दिया है। अधिकरण ने अधिकारियों से कहा कि तालाब के चारों ओर स्थायी कंक्रीट की दीवार बनाने के बजाय पौधों और झाड़ियों की सहायता से जैविक घेराबंदी यानी बायो-फेंसिंग की संभावनाओं पर विचार किया जाए।अधिकरण के अनुसार, पक्की दीवारों के कारण आसपास के क्षेत्रों से आने वाला बारिश का पानी तालाब तक पहुंचने में बाधित हो सकता है। इससे जलाशय की प्राकृतिक जलभराव क्षमता प्रभावित हो सकती है।पेड़ों और झाड़ियों से घेराबंदी करने पर तालाब की सुरक्षा के साथ हरियाली बढ़ाने और प्रदूषण नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।
तालाबों में कचरा और गंदा पानी डालने पर रोक
एनजीटी ने तालाब की नियमित सफाई सुनिश्चित करने और उसमें ठोस कचरा डालने से रोकने के निर्देश भी दिए हैं।अधिकरण ने अधिकारियों को तालाब के आसपास चेतावनी बोर्ड लगाने और बिना उपचारित सीवेज के प्रवेश को रोकने के उपाय करने को कहा है।इसके अतिरिक्त दिल्ली नगर निगम और दिल्ली जल बोर्ड से आवश्यक सहयोग की अपेक्षा जताई गई है, ताकि तालाब को प्रदूषण और अतिक्रमण से बचाने के लिए प्रभावी कार्रवाई हो सके।
भूजल स्तर सुधारने में महत्वपूर्ण हैं तालाब
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, तालाब केवल पानी जमा करने के स्थान नहीं हैं, बल्कि प्राकृतिक जलचक्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।बारिश का पानी तालाबों में एकत्र होने से भूजल पुनर्भरण में मदद मिलती है। इसके अतिरिक्त तालाब स्थानीय जैव विविधता को संरक्षण प्रदान करते हैं और आसपास के पर्यावरण को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।जलाशयों के खत्म होने से बारिश के पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है और भूजल संरक्षण की क्षमता भी कम हो सकती है।
अधिकारियों से मांगी गई कार्रवाई की रिपोर्ट
एनजीटी ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया था कि वे तालाब के संरक्षण, अतिक्रमण हटाने, कचरे की सफाई और सीवेज रोकने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करें।इस मामले में 8 सितंबर 2026 को अगली सुनवाई निर्धारित की गई थी। उपलब्ध जुलाई 2026 की रिपोर्ट के आधार पर दिए गए इन निर्देशों के बाद की अनुपालन स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।