नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के मॉनसून सत्र के तीसरे दिन मंगलवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों ने चावल की बोरियां लेकर विधानसभा परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। AAP नेताओं ने आरोप लगाया कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) से दिल्ली के गरीबों और प्रवासी आबादी के लिए मिलने वाला सब्सिडी वाला चावल कथित तौर पर जरूरतमंदों तक पहुंचाने के बजाय एक निजी कंपनी को बेच दिया गया।

AAP की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने इस मामले में सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली के गरीबों के लिए निर्धारित चावल की कथित तौर पर ‘ब्लैक-मार्केटिंग’ की गई और उसे हरियाणा की एक निजी कंपनी को बेच दिया गया। हालांकि, ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि इस स्तर पर नहीं हुई है।

चावल की बोरियों के साथ विधानसभा परिसर में प्रदर्शन

मंगलवार को AAP विधायक चावल की बोरियां लेकर विधानसभा परिसर पहुंचे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जिस खाद्यान्न का इस्तेमाल दिल्ली के गरीब परिवारों और प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए किया जाना था, उसके वितरण में कथित तौर पर अनियमितता हुई है।

प्रदर्शन के दौरान AAP नेताओं ने सरकार से पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पार्टी का कहना है कि गरीबों के लिए निर्धारित सब्सिडी वाले अनाज को किसी निजी कारोबारी संस्था तक पहुंचाना गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

AAP नेताओं ने इस मुद्दे को विधानसभा के भीतर भी उठाने की कोशिश की और सरकार से जवाब मांगने की बात कही।

सौरभ भारद्वाज ने विभाग पर लगाए गंभीर आरोप

सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी इस मामले को उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा से जुड़े विभाग की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

भारद्वाज के मुताबिक, संबंधित विभाग ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) से असम स्थित नॉर्थ-ईस्ट कॉरपोरेशन को सब्सिडी वाला चावल उपलब्ध कराने की सिफारिश की थी। उनका आरोप है कि यह चावल दिल्ली के गरीबों और प्रवासी आबादी के बीच वितरण के लिए निर्धारित था।

उन्होंने दावा किया कि निर्धारित लाभार्थियों तक पहुंचने के बजाय चावल कथित रूप से हरियाणा की एक निजी कंपनी को बेच दिया गया। AAP नेता ने इसे गरीबों के हिस्से के खाद्यान्न की कथित ‘ब्लैक-मार्केटिंग’ करार दिया।

हालांकि, भारद्वाज के इन आरोपों पर सरकार या संबंधित विभाग की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया का उल्लेख इन उपलब्ध जानकारियों में नहीं है। इसलिए आरोपों की वास्तविकता और चावल के वितरण की पूरी प्रक्रिया जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

गरीबों और प्रवासी आबादी के लिए था चावल: AAP

AAP का कहना है कि सब्सिडी वाले चावल का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को राहत देना था। पार्टी के मुताबिक, दिल्ली में बड़ी संख्या में गरीब और प्रवासी परिवार ऐसे हैं, जिनके लिए सस्ते या सब्सिडी वाले खाद्यान्न का महत्व काफी अधिक है।

पार्टी नेताओं ने सवाल उठाया कि यदि सरकारी योजना के तहत उपलब्ध कराए गए चावल का उद्देश्य जरूरतमंदों तक पहुंचाना था, तो वह निजी कंपनी तक कैसे पहुंचा। AAP ने सरकार से इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।

पार्टी का आरोप है कि खाद्यान्न के आवंटन, परिवहन और वितरण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए। इसके अलावा यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि चावल किस संस्था को, किस आधार पर और किन शर्तों पर दिया गया।

FCI की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की मांग

AAP नेताओं ने मामले में FCI से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की मांग की है। पार्टी यह जानना चाहती है कि दिल्ली के लिए निर्धारित सब्सिडी वाले चावल की मात्रा कितनी थी और उसे किन एजेंसियों के माध्यम से वितरित किया जाना था।

यदि चावल को किसी अन्य संस्था या कंपनी को भेजा गया, तो उसके लिए अनुमति किस स्तर पर दी गई और उसका उद्देश्य क्या था, यह भी जांच का अहम हिस्सा हो सकता है।

विपक्ष का कहना है कि खाद्यान्न वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता जरूरी है। खासकर जब खाद्यान्न गरीबों और जरूरतमंद परिवारों के लिए निर्धारित हो, तब उसके आवंटन और वितरण में किसी भी तरह की गड़बड़ी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

राजनीतिक टकराव बढ़ने के आसार

चावल वितरण को लेकर AAP के आरोपों ने दिल्ली की राजनीति में एक और विवाद खड़ा कर दिया है। विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान विपक्ष और सरकार के बीच कई मुद्दों पर टकराव देखने को मिल रहा है। ऐसे में सब्सिडी वाले चावल का मामला भी राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन सकता है।

AAP ने इस मामले को गरीबों के अधिकार और खाद्य सुरक्षा से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

दूसरी ओर, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के परिणाम सामने आना जरूरी होगा। यह भी स्पष्ट किया जाना बाकी है कि चावल के आवंटन और आपूर्ति की प्रक्रिया में किन-किन संस्थाओं की भूमिका थी।

जांच से साफ होगी तस्वीर

फिलहाल पूरा मामला AAP द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। चावल की बोरियां लेकर विधानसभा परिसर में किया गया प्रदर्शन इस मुद्दे को जनता के बीच उठाने की पार्टी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

अब इस मामले में सरकार और संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। यदि सरकार आरोपों को गलत बताती है तो उसे चावल के आवंटन और वितरण से जुड़े दस्तावेज सामने रखकर स्थिति स्पष्ट करनी होगी। वहीं, यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करनी होगी।

AAP की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। ऐसे में मामले की वास्तविक तस्वीर सरकारी रिकॉर्ड, FCI से जुड़े दस्तावेज और संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल विधानसभा के बाहर चावल की बोरियों के साथ हुआ प्रदर्शन दिल्ली में गरीबों के लिए खाद्यान्न वितरण व्यवस्था को लेकर एक नया राजनीतिक मुद्दा जरूर बन गया है।

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