नई दिल्ली : शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शुक्रवार रात अपने आंदोलन को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि वह महात्मा गांधी नहीं हैं और लोगों को अपनी जिंदगी में खुद अपना हीरो बनने की कोशिश करनी चाहिए। वांगचुक ने कहा कि वह भले ही अनशन के 13वें दिन पहले की तुलना में कम ऊर्जावान महसूस कर रहे हैं, लेकिन अपने उद्देश्य और आंदोलन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो संदेश जारी कर अपने स्वास्थ्य और आंदोलन की स्थिति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक उपवास के कारण शरीर पर असर पड़ रहा है, लेकिन लोगों के समर्थन और उद्देश्य के प्रति विश्वास उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है।
अनशन के 13वें दिन वीडियो संदेश
अपने वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि अनशन के 13वें दिन उन्हें पिछले दिन की तुलना में कम ऊर्जा महसूस हो रही है। उन्होंने कहा कि लगातार उपवास के कारण शारीरिक कमजोरी स्वाभाविक है, लेकिन उनका हौसला अभी भी मजबूत है।
उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन की सफलता केवल एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और अपने अधिकारों व भविष्य के लिए खुद आगे आना होगा।
"मैं गांधी नहीं हूं"
वांगचुक ने अपने संदेश में कहा कि लोग अक्सर आंदोलनों को किसी एक व्यक्ति से जोड़ देते हैं, लेकिन उनका मानना है कि हर व्यक्ति के अंदर बदलाव लाने की क्षमता होती है।
उन्होंने कहा कि वह महात्मा गांधी नहीं हैं और न ही खुद को किसी महान नेता के रूप में पेश करना चाहते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी जिंदगी के हीरो खुद बनें और समाज के लिए अपनी भूमिका निभाएं।
आंदोलन के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई
क्लाइमेट एक्टिविस्ट ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं है, बल्कि व्यापक मुद्दों को लेकर है। उन्होंने कहा कि वह अपने उद्देश्य को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं और जब तक जरूरी होगा, आंदोलन जारी रखेंगे।
उन्होंने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की अपील की।
स्वास्थ्य पर भी दी जानकारी
वांगचुक ने बताया कि लंबे अनशन के कारण शरीर में कमजोरी महसूस हो रही है। हालांकि, उन्होंने कहा कि मानसिक रूप से वह अभी भी मजबूत हैं और आंदोलन को लेकर उनका संकल्प कायम है।
उनके समर्थकों का कहना है कि वांगचुक के अनशन को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ रही है और बड़ी संख्या में लोग उनके समर्थन में सामने आ रहे हैं।
पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं वांगचुक
सोनम वांगचुक लंबे समय से शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु से जुड़े मुद्दों पर काम करते रहे हैं। वह लद्दाख क्षेत्र में शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में अपने कार्यों के लिए जाने जाते हैं।
उन्होंने हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को लेकर लगातार आवाज उठाई है। उनके अभियानों में पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय समुदायों के अधिकार और सतत विकास जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं।
समर्थकों से संयम बनाए रखने की अपील
वांगचुक ने अपने समर्थकों से अपील की कि वे आंदोलन के दौरान अनुशासन और शांति बनाए रखें। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक आंदोलन की ताकत उसकी शांतिपूर्ण प्रक्रिया और लोगों की भागीदारी में होती है।
उन्होंने कहा कि समाज में बदलाव लाने के लिए केवल किसी एक व्यक्ति पर निर्भर रहने के बजाय सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
आगे की रणनीति पर नजर
सोनम वांगचुक के बयान के बाद अब उनके आंदोलन और आगे की रणनीति पर नजर बनी हुई है। उनके समर्थक लगातार उनके संदेशों को साझा कर रहे हैं और आंदोलन से जुड़े मुद्दों को उठा रहे हैं।
फिलहाल वांगचुक का अनशन जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि शारीरिक चुनौतियों के बावजूद वह अपने उद्देश्य से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि लोगों की भागीदारी और जागरूकता ही किसी भी बदलाव की सबसे बड़ी ताकत होती है।