नई दिल्ली/शिमला : 28 अक्टूबर 2026। हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में भाग लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकतंत्र, पारदर्शिता और जनकेंद्रित विकास का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। भारत की संसद की मेजबानी में 26 और 27 अक्टूबर को आयोजित इस सम्मेलन में पठानिया ने कहा कि जनकेंद्रित विकास का रास्ता संवाद, सहयोग और साझा जिम्मेदारी से होकर गुजरता है। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और समावेशी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया, जबकि राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश भी उपस्थित रहे।
ब्रिक्स संसदीय मंच पर कुलदीप पठानिया का महत्वपूर्ण संबोधन
हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक सफलता तभी संभव है, जब विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।उन्होंने कहा कि संसद और विधानसभाएं केवल कानून बनाने वाली संस्थाएं नहीं हैं, बल्कि ये जनता की आकांक्षाओं, अधिकारों और आवश्यकताओं का प्रतिनिधित्व करती हैं।पठानिया ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। जब नागरिकों की आवाज नीति निर्माण की प्रक्रिया में प्रभावी रूप से शामिल होती है, तभी विकास का वास्तविक उद्देश्य पूरा होता है।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मजबूत संसद और विधानसभाएं नागरिकों तथा सरकार के बीच महत्वपूर्ण कड़ी का काम करती हैं।
11 सदस्य और 10 साझेदार देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी
भारत की संसद ने 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की मेजबानी की। नई दिल्ली स्थित संविधान सदन में आयोजित सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई संसदीय प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया।आयोजन से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, इसमें ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था।लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन का मुख्य विषय 'जनकेंद्रित विकास के लिए संसदों को मजबूत बनाना' रखा गया।इस दौरान वैश्विक चुनौतियों, संसदीय सहयोग, डिजिटल प्रौद्योगिकी और लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रभावशीलता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संविधान सदन में विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों और संसदीय पदाधिकारियों से मुलाकात की।
संसद में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी: पठानिया
कुलदीप सिंह पठानिया ने अपने संबोधन में संसदीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।उन्होंने कहा कि जब निर्णय लेने की प्रक्रिया पारदर्शी होती है, तो जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास मजबूत होता है।उन्होंने संसदीय समितियों की भूमिका का भी उल्लेख किया। पठानिया के अनुसार, प्रभावी समितियां सरकारी कामकाज की निगरानी और नीतियों के मूल्यांकन में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।इसके अलावा कानून निर्माण की गुणवत्ता सुधारना, नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना और सार्वजनिक हित के मुद्दों पर प्रभावी चर्चा करना भी आवश्यक है।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए संसदों को नागरिकों के और करीब लाना होगा।
महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
हिमाचल विधानसभा अध्यक्ष ने लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।उन्होंने कहा कि जब महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में बराबर अवसर मिलते हैं, तो नीतियां अधिक संवेदनशील और परिणामोन्मुखी बनती हैं।पठानिया ने इसे जनकेंद्रित विकास की मूल भावना से जोड़ा।उनके अनुसार, विकास से संबंधित निर्णयों में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी आवश्यक है।उन्होंने युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जोड़ने और उनकी आकांक्षाओं को नीति निर्माण में उचित स्थान देने की आवश्यकता भी बताई।इस तरह उन्होंने समावेशी लोकतंत्र और समान भागीदारी को विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया।
डिजिटल तकनीक से मजबूत होंगी लोकतांत्रिक संस्थाएं
ब्रिक्स संसदीय मंच में आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर भी चर्चा की गई।सम्मेलन के प्रमुख विषयों में यह सुनिश्चित करना शामिल था कि डिजिटल तकनीक और एआई का इस्तेमाल मानव हितों को केंद्र में रखकर किया जाए।कुलदीप पठानिया ने संसदीय संस्थाओं को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।डिजिटल माध्यमों से विधायी दस्तावेजों की उपलब्धता, नागरिकों के साथ संवाद और संसदीय कार्यवाही की पारदर्शिता बढ़ाने की संभावनाएं हैं।हालांकि, नई तकनीकों का उपयोग करते समय नागरिकों की गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और समान पहुंच जैसे मुद्दों पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
विधायी नियमों में एकरूपता पर भी रखे विचार
सम्मेलन के दौरान आयोजित पीठासीन अधिकारियों की समिति की बैठक में कुलदीप सिंह पठानिया ने विधायी संस्थाओं के कार्य संचालन और प्रक्रिया नियमों पर भी विचार रखे।उन्होंने कहा कि संसदीय नियम केवल तकनीकी प्रावधान नहीं हैं, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही, पारदर्शिता और जनप्रतिनिधित्व के महत्वपूर्ण आधार हैं।पठानिया ने बताया कि भारत की संसदीय व्यवस्था संघीय ढांचे पर आधारित है, जिसमें केंद्र और राज्यों की अलग-अलग विधायी संस्थाएं हैं।उन्होंने कहा कि कुछ विधायी प्रक्रियाओं में एकरूपता उपयोगी हो सकती है, लेकिन सभी राज्यों की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं।इसलिए नियमों में समानता लाते समय राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं का भी सम्मान किया जाना चाहिए।
हिमाचल विधानसभा की कार्यप्रणाली का दिया उदाहरण
कुलदीप पठानिया ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर हिमाचल प्रदेश विधानसभा की कार्यप्रणाली का भी उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि हिमाचल विधानसभा में बजट और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की व्यवस्था है।विधायी संस्थाओं में सार्थक बहस और विचार-विमर्श के माध्यम से जनता से जुड़े मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठाया जा सकता है।पठानिया ने कहा कि विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के अनुभवों का आदान-प्रदान लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक सक्षम बनाने में सहायक हो सकता है।उन्होंने संसदीय कार्य संचालन को बेहतर बनाने के लिए संवाद और संस्थागत सहयोग की आवश्यकता बताई।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल की सराहना
हिमाचल विधानसभा अध्यक्ष ने 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के आयोजन के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की सराहना की।उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन विभिन्न देशों की संसदों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर प्रदान करते हैं।सम्मेलन में वैश्विक शासन को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने, विकास में समान अवसर उपलब्ध कराने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को नई चुनौतियों के अनुरूप मजबूत करने पर भी विचार किया गया।इसके अलावा जलवायु परिवर्तन, आर्थिक असमानता और सतत विकास जैसी वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए संसदीय सहयोग को महत्वपूर्ण माना गया।
ब्रिक्स मंच पर भारत की संसदीय भूमिका महत्वपूर्ण
ब्रिक्स संसदीय मंच सदस्य देशों के बीच संसदीय सहयोग और नीतिगत संवाद का अवसर प्रदान करता है।इस सम्मेलन में संसदीय प्रतिनिधि अपने देशों के अनुभव साझा करते हैं और साझा चुनौतियों से निपटने के तरीकों पर विचार करते हैं।भारत की मेजबानी में हुए इस आयोजन में जनकेंद्रित विकास को प्रमुख विषय बनाया गया।सम्मेलन के समापन अवसर पर 27 अक्टूबर को संयुक्त घोषणा भी जारी की गई, जिसमें लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने और सतत तथा समावेशी विकास के प्रति सहयोग पर जोर दिया गया।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर हिमाचल की भागीदारी बनी महत्वपूर्ण
कुलदीप सिंह पठानिया की ब्रिक्स संसदीय मंच में भागीदारी हिमाचल प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण रही।उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती, पारदर्शिता, महिलाओं की भागीदारी और नागरिकों के अधिकारों से जुड़े विषय उठाए।उनके संबोधन का प्रमुख संदेश था कि विकास का वास्तविक उद्देश्य केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना भी है।पठानिया ने कहा कि जब संसदें जवाबदेह होंगी, नागरिकों की आवाज सुनी जाएगी और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा, तभी लोकतंत्र अधिक सार्थक बनेगा।
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