नई दिल्ली  : 28 अक्टूबर 2026। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायपालिका के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़े अवमानना मामले में बुधवार को महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत को 17 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। वहीं, वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की अनुमति दी गई है। दोनों को 17 नवंबर 2026 को दोपहर दो बजे अदालत के समक्ष उपस्थित होना होगा। यह मामला सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की ओर से दायर आपराधिक अवमानना याचिका से संबंधित है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने बुधवार को सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए।
17 नवंबर को दोपहर 2 बजे होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अगली तारीख पर दोनों प्रतिवादियों की उपस्थिति आवश्यक होगी।न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने संजय राउत को अदालत में स्वयं उपस्थित रहने का निर्देश दिया।वहीं, पत्रकार निखिल वागले को फिलहाल वर्चुअल माध्यम से पेश होने की अनुमति दी गई है। हालांकि, अदालत ने यह संभावना खुली रखी है कि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें भविष्य में व्यक्तिगत रूप से भी उपस्थित होने के लिए कहा जा सकता है।पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई 17 नवंबर को निर्धारित की है।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने दायर की याचिका
यह मामला सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से दायर आपराधिक अवमानना याचिका से जुड़ा है।एससीबीए ने आरोप लगाया है कि संजय राउत और निखिल वागले ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायपालिका के संबंध में ऐसी टिप्पणियां कीं, जिनसे सर्वोच्च न्यायालय की प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है।बार एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय और राहुल कौशिक ने अदालत में पक्ष रखा। उनके साथ अधिवक्ता प्रज्ञा बघेल और मीनेश दुबे भी उपस्थित रहे।याचिकाकर्ताओं ने संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायपालिका की आलोचना और उसकी संस्थागत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली टिप्पणियों के बीच अंतर होना चाहिए।हालांकि, यह याचिकाकर्ता पक्ष का आरोप है और मामले में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।
अटॉर्नी जनरल ने दी थी अवमानना कार्रवाई की सहमति
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने इस मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी की लिखित सहमति प्राप्त की थी।अटॉर्नी जनरल ने 15 अक्टूबर को दोनों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए सहमति दी थी।उन्होंने संबंधित टिप्पणियों को प्रथम दृष्टया आपत्तिजनक बताते हुए कहा था कि इनसे सर्वोच्च न्यायालय और मुख्य न्यायाधीश के प्रति सम्मान कम होने की आशंका है।इसके बाद एससीबीए ने न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 15 के तहत याचिका दाखिल की।यह सहमति अवमानना संबंधी न्यायिक प्रक्रिया शुरू करने से जुड़ी थी, न कि किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करने से।
16 अक्टूबर को जारी हुआ था कारण बताओ नोटिस
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर को संजय राउत और निखिल वागले को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।उस समय मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने दोनों से पूछा था कि उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों न की जाए।अदालत ने प्रारंभिक चरण में दोनों को व्यक्तिगत पेशी से छूट दी थी। साथ ही उन्हें अपना जवाब दाखिल करने का अवसर प्रदान किया गया था।मामले को 28 अक्टूबर को उपयुक्त पीठ के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश भी दिया गया था।बुधवार की सुनवाई में अदालत ने पिछली व्यवस्था में बदलाव करते हुए संजय राउत की व्यक्तिगत और वागले की वर्चुअल उपस्थिति सुनिश्चित करने का आदेश दिया।
निखिल वागले ने बिना शर्त मांगी माफी
बुधवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह पत्रकार निखिल वागले की ओर से अदालत में उपस्थित हुईंउन्होंने बताया कि वागले ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के लिए बिना शर्त और ईमानदारी से माफी मांग ली है।इंदिरा जयसिंह ने अदालत को अवगत कराया कि वागले का पत्रकारिता में पांच दशक से अधिक का करियर रहा है और उन्होंने अवमानना नोटिस मिलने के बाद संबंधित पोस्ट हटा दिया था।उन्होंने कहा कि वागले अपनी टिप्पणी का बचाव नहीं करना चाहते हैं।हालांकि, एससीबीए की ओर से दलील दी गई कि विवादित पोस्ट हटाने में पांच दिन का समय लगा था।अदालत ने माफी और पोस्ट हटाने की बात का संज्ञान लिया। इसके बाद वागले के मुंबई में रहने के कारण उन्हें फिलहाल वर्चुअल माध्यम से पेश होने की अनुमति दी गई।
संजय राउत की ओर से वकील उपस्थित नहीं हुआ
सुनवाई के दौरान शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत की ओर से कोई अधिवक्ता मौखिक बहस के लिए उपस्थित नहीं हुआ।हालांकि, रिकॉर्ड में अधिवक्ता विष्णु शर्मा की ओर से वकालतनामा दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई।अदालत ने पाया कि राउत की ओर से दाखिल जवाबी हलफनामे की प्रति रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं थी।इस पर पीठ ने रजिस्ट्री को संबंधित दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया।इसके साथ ही अदालत ने संजय राउत को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहा।सुनवाई के दौरान एससीबीए ने राउत की कुछ अन्य सोशल मीडिया टिप्पणियों का भी उल्लेख किया।
आखिर किस विवाद से शुरू हुआ मामला?
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करना चाहता था।मुख्य न्यायाधीश ने प्रतिनिधिमंडल से व्यक्तिगत मुलाकात करने के बजाय उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाने और अदालत के समक्ष याचिका दाखिल करने का रास्ता सुझाया था।इसके बाद पत्रकार निखिल वागले ने सोशल मीडिया पर मुख्य न्यायाधीश को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।वहीं, संजय राउत ने न्यायपालिका की निष्पक्षता और न्यायाधीशों के राजनीतिक व्यक्तियों से कथित संबंधों को लेकर सवाल उठाए थे।एससीबीए ने इन टिप्पणियों को न्यायपालिका की संस्थागत प्रतिष्ठा के खिलाफ बताते हुए अवमानना याचिका दाखिल की।
न्यायपालिका की गरिमा से जुड़ा है पूरा मामला
बुधवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने कहा कि यह मामला केवल किसी एक न्यायाधीश से संबंधित नहीं, बल्कि पूरी न्यायिक संस्था से जुड़ा हुआ है।अदालत ने न्यायपालिका की संस्थागत प्रतिष्ठा के महत्व पर जोर दिया।दूसरी ओर, निखिल वागले की वकील इंदिरा जयसिंह ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायपालिका की आलोचना के लिए उचित स्थान होने की बात रखी।भारतीय कानून में न्यायालय के फैसलों की निष्पक्ष और उचित आलोचना तथा आपराधिक अवमानना के बीच महत्वपूर्ण कानूनी अंतर है।न्यायालय की अवमानना अधिनियम के तहत किसी टिप्पणी का मूल्यांकन उसके शब्दों, संदर्भ और न्यायिक प्रक्रिया पर संभावित प्रभाव के आधार पर किया जाता है।
अब 17 नवंबर की सुनवाई पर रहेंगी निगाहें
सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद 17 नवंबर को होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण हो गई है।उस दिन सांसद संजय राउत को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा, जबकि निखिल वागले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपना पक्ष रख सकेंगे।अदालत इस दौरान दोनों के जवाब, वागले की माफी और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की दलीलों पर आगे विचार कर सकती है।फिलहाल, दोनों के खिलाफ अवमानना के आरोपों पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई से स्पष्ट होगा कि इस मामले में आगे क्या न्यायिक कार्रवाई की जाएगी।
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