नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हुई मॉडल और अभिनेत्री त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में शुक्रवार, 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने भोपाल की सत्र अदालत में चल रही सुनवाई पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने मामले की सुनवाई भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और दोनों आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह याचिका मृतका के पिता नवनिधि शर्मा ने दाखिल की है।भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश दिया। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई है कि भोपाल में मामले की निष्पक्ष सुनवाई प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर उन्होंने मुकदमे को दिल्ली की किसी सक्षम अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट ने CBI और दोनों आरोपियों को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने त्विषा शर्मा के पति समर्थ सिंह और उनकी सास गिरिबाला सिंह को नोटिस जारी किया है। दोनों इस मामले में आरोपी हैं।गिरिबाला सिंह पूर्व जिला न्यायाधीश हैं, जबकि समर्थ सिंह पेशे से अधिवक्ता हैं। मृतका के पिता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि आरोपियों की स्थानीय पहचान और पेशेवर संबंधों के कारण भोपाल में निष्पक्ष सुनवाई को लेकर आशंका बनी हुई है।अदालत ने CBI सहित संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।
पिता ने दिल्ली में मुकदमा चलाने की मांग की
त्विषा के पिता नवनिधि शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि भोपाल की सत्र अदालत में लंबित मुकदमे को दिल्ली स्थानांतरित किया जाए।याचिका में कहा गया है कि निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए सुनवाई ऐसे स्थान पर होनी चाहिए, जहां किसी प्रकार के स्थानीय प्रभाव की आशंका न हो।पिता ने आरोप लगाया कि मामले की शुरुआती जांच और न्यायिक कार्यवाही के दौरान कुछ ऐसी परिस्थितियां सामने आईं, जिनसे उन्हें निष्पक्ष सुनवाई को लेकर चिंता हुई।हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। फिलहाल अदालत ने संबंधित पक्षों का जवाब मांगा है।
12 मई को भोपाल में हुई थी त्विषा की मौत
जानकारी के अनुसार, 33 वर्षीय त्विषा शर्मा 12 मई 2026 को भोपाल स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं।त्विषा की शादी दिसंबर 2025 में अधिवक्ता समर्थ सिंह से हुई थी। शादी के कुछ महीनों बाद उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।इस घटना के बाद मृतका के परिवार ने पति और सास पर दहेज उत्पीड़न तथा मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे।मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। बाद में प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जांच CBI को सौंप दी गई।
CBI ने दाखिल किया था आरोपपत्र
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने मामले की जांच के बाद अगस्त 2026 में भोपाल की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था।जांच के दौरान गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों को शामिल किया गया। मामले में दहेज उत्पीड़न, आत्महत्या के लिए उकसाने और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं।त्विषा की मौत के बाद पोस्टमार्टम और जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे थे। इस मामले में दिल्ली एम्स के मेडिकल विशेषज्ञों से दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया था।
पूर्व जिला जज की भूमिका को लेकर उठे सवाल
मृतका के पिता ने अपनी याचिका में गिरिबाला सिंह के पूर्व न्यायिक पद का उल्लेख किया है।गिरिबाला सिंह भोपाल में जिला न्यायाधीश के पद पर कार्य कर चुकी हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि इसी वजह से स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष सुनवाई को लेकर उनकी आशंका बढ़ गई है।परिवार ने न्यायालय से मांग की है कि मामले की सुनवाई ऐसे वातावरण में हो, जहां सभी पक्ष बिना किसी दबाव के अपनी बात रख सकें।हालांकि, यह याचिकाकर्ता की आशंका है और सुप्रीम कोर्ट ने अभी यह नहीं माना है कि भोपाल की न्यायिक प्रक्रिया वास्तव में प्रभावित हुई है।
अगले आदेश तक भोपाल में नहीं चलेगा ट्रायल
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद भोपाल की सत्र अदालत में इस मामले की सुनवाई फिलहाल आगे नहीं बढ़ेगी।अब CBI, समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह की ओर से जवाब दाखिल किए जाने के बाद अदालत मुकदमे को दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग पर आगे विचार करेगी।यह स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी केस दिल्ली ट्रांसफर करने का अंतिम आदेश नहीं दिया है। फिलहाल केवल भोपाल में चल रही सुनवाई पर रोक लगाई गई है।