नई दिल्ली : 28 अक्टूबर 2026। दिल्ली के प्रतिष्ठित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। बुधवार को विरोध प्रदर्शन के 17वें दिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मंगलवार देर रात नकाबपोश लोगों ने परिसर में घुसकर पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की। प्रशासन के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय के गेट, दीवारों और सीसीटीवी कैमरों को नुकसान पहुंचाया। इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी के जामिया पहुंचने की भी चर्चा है। हालांकि, 28 अक्टूबर को उनके प्रस्तावित दौरे की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं हो सकी है। कैंपस के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए हैं।
नकाबपोश प्रदर्शनकारियों पर पत्थरबाजी और तोड़फोड़ का आरोप
जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन ने बुधवार को बयान जारी कर मंगलवार रात हुई घटनाओं पर गहरी चिंता जताई। विश्वविद्यालय का आरोप है कि प्रदर्शनकारी छात्रों और कुछ स्थानीय लोगों के समूह ने परिसर के कई हिस्सों में तोड़फोड़ की।प्रशासन के मुताबिक, गेट नंबर 4C को गिरा दिया गया, जबकि अन्य प्रवेश द्वारों और दीवारों को भी नुकसान पहुंचाया गया। आरोप है कि कुछ लोगों ने पत्थरबाजी की और सीसीटीवी नियंत्रण कक्ष तथा निगरानी कैमरों को क्षतिग्रस्त कर दिया।विश्वविद्यालय ने दावा किया कि तोड़फोड़ करने वालों में कुछ नकाबपोश लोग भी शामिल थे। कथित तौर पर लोहे की छड़ों, हथौड़ों और अन्य औजारों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इन घटनाओं में शामिल लोगों की पहचान और उनकी भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने जताई चिंता
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें कुछ लोग गेट पर चढ़ते और परिसर में नारेबाजी करते दिखाई दे रहे हैं।प्रशासन का कहना है कि इन घटनाओं से विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचने के साथ छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।विश्वविद्यालय के अधिकारियों के मुताबिक, घटना की सूचना मिलने पर प्रॉक्टोरियल टीम और शिक्षक मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास करने वाली कुछ महिला शिक्षकों और छात्रावास अधिकारियों को धमकियों का सामना करना पड़ा।दिल्ली पुलिस ने शुरुआती रिपोर्टों में कहा कि मंगलवार रात की कथित तोड़फोड़ के संबंध में उस समय तक कोई नई औपचारिक शिकायत नहीं मिली थी।T
छात्र संघ बहाली की मांग को लेकर 17 दिनों से आंदोलन
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 12 अक्टूबर से छात्र संघ की बहाली को लेकर प्रदर्शन चल रहा है। छात्र विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक तरीके से छात्र संघ चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं।विश्वविद्यालय में वर्ष 2006 के बाद से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि छात्र संघ का गठन उनके प्रतिनिधित्व और विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने समस्याएं रखने के लिए आवश्यक है।इसके अलावा छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और चुनाव की स्पष्ट तारीख घोषित करने की भी मांग कर रहे हैं।कई छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक चुनाव संबंधी ठोस कार्यक्रम सामने नहीं आएगा, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
राहुल गांधी के दौरे को लेकर चर्चा
जामिया विश्वविद्यालय में जारी आंदोलन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी बढ़ गई हैं। कांग्रेस के कई नेताओं ने प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में बयान दिए हैं।कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और इमरान मसूद विश्वविद्यालय के आंदोलन को लेकर पहले ही सक्रिय रहे हैं। इमरान प्रतापगढ़ी ने छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।इस बीच राहुल गांधी के बुधवार को जामिया पहुंचने की चर्चा है। हालांकि, उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में उनके दौरे का निश्चित समय या आधिकारिक कार्यक्रम सामने नहीं आया है।दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन ने बाहरी लोगों और राजनीतिक हस्तक्षेप पर चिंता जताते हुए कहा है कि इससे परिसर की शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
कांग्रेस सांसदों के खिलाफ दर्ज हो चुकी है एफआईआर
जामिया में जारी विवाद के बीच कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और इमरान मसूद के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार की शिकायत में आरोप लगाया गया कि कांग्रेस सांसदों ने बिना अनुमति परिसर में प्रवेश किया। शिकायत में गेट का ताला तोड़ने और दीवार फांदकर परिसर में घुसने जैसी घटनाओं का उल्लेख किया गया है।मामले में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, अनधिकृत प्रवेश और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।हालांकि, एफआईआर में लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित होना बाकी है। दूसरी तरफ प्रदर्शनकारी छात्रों ने भी पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन पर उनके आंदोलन को दबाने तथा जबरन हटाने का आरोप लगाया है।
8 नवंबर तक ऑनलाइन कक्षाएं, परिसर में कड़ी सुरक्षा
विश्वविद्यालय परिसर में तनाव को देखते हुए प्रशासन ने शैक्षणिक गतिविधियों में भी बदलाव किया है। छात्रों की सुरक्षा का हवाला देते हुए कक्षाएं ऑनलाइन माध्यम से संचालित की जा रही हैं।उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 8 नवंबर तक ऑनलाइन कक्षाएं चलाने की व्यवस्था की गई है। इसके बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी।विश्वविद्यालय के आसपास पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। प्रशासन का कहना है कि शैक्षणिक वातावरण और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है।दिल्ली पुलिस ने परिसर के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश भी लागू किए हैं।
चुनाव कराने पर प्रशासन तैयार, फिर भी नहीं थमा विवाद
विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र संघ चुनाव को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव दिया है। इसके अनुसार, छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे।हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि संविधान को मंजूरी मिलने की निश्चित समयसीमा निर्धारित नहीं की गई है। इसी वजह से वे आंदोलन समाप्त करने को तैयार नहीं हैं।केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बातचीत जारी होने की बात कही है। उन्होंने छात्रों से शांति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं करने की अपील की है।
जामिया विवाद में अब आगे क्या?
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में जारी विवाद अब छात्र संघ चुनाव, विश्वविद्यालय की सुरक्षा और राजनीतिक हस्तक्षेप जैसे कई मुद्दों से जुड़ गया है।जहां छात्र प्रतिनिधित्व और चुनाव की स्पष्ट तारीख की मांग कर रहे हैं, वहीं प्रशासन परिसर में शांति और सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां बहाल करने पर जोर दे रहा है।मंगलवार रात की कथित तोड़फोड़ ने इस गतिरोध को और गंभीर बना दिया है। अब सभी की नजर प्रशासन और छात्रों के बीच अगली बातचीत तथा कथित तोड़फोड़ के मामले में होने वाली जांच पर है।
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