नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम में **प्रोफेसर तारिक मंसूर** को एक बार फिर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय यानी AMU के पूर्व कुलपति तारिक मंसूर को भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी ने उन्हें लगातार दूसरी बार इस पद की जिम्मेदारी देकर उन पर भरोसा कायम रखा है। शिक्षा जगत से राजनीति में आए मंसूर की नियुक्ति को भाजपा की संगठनात्मक रणनीति के साथ मुस्लिम समुदाय, खासकर पसमांदा समाज के बीच पहुंच बढ़ाने की कोशिश से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। इसमें राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, राम माधव, बैजयंत जय पांडा और रेखा वर्मा जैसे नेताओं के साथ तारिक मंसूर का नाम भी शामिल है। उत्तर प्रदेश से आने वाले मंसूर वर्तमान में राज्य विधान परिषद के सदस्य हैं।
AMU के कुलपति रह चुके हैं तारिक मंसूर
तारिक मंसूर का लंबा करियर शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ा रहा है। राजनीति में आने से पहले उनकी पहचान मुख्य रूप से शिक्षाविद और चिकित्सक के तौर पर थी। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई की और बाद में इसी संस्थान में अध्यापन तथा चिकित्सा क्षेत्र में जिम्मेदारियां निभाईं।
वह जेएन मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग से जुड़े रहे और आगे चलकर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति बने। मंसूर ने मई 2017 में AMU के कुलपति का पद संभाला था।
कुलपति के रूप में उनका कार्यकाल कई महत्वपूर्ण घटनाओं और विवादों के बीच रहा। विश्वविद्यालय से जुड़े प्रशासनिक और शैक्षणिक मामलों में वह लगातार चर्चा में रहे।
2023 में दिया था कुलपति पद से इस्तीफा
तारिक मंसूर ने अप्रैल 2023 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने उन्हें विधान परिषद के लिए मनोनीत किया।
इसके कुछ ही महीनों बाद भाजपा ने उन्हें राष्ट्रीय संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी। जुलाई 2023 में तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम में तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया था।
अब नितिन नबीन की नई राष्ट्रीय टीम में भी उन्हें उसी पद पर बरकरार रखा गया है। इस तरह वह लगातार दूसरी बार भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने हैं।
पसमांदा मुस्लिमों के बीच BJP का प्रमुख चेहरा
तारिक मंसूर की भाजपा में भूमिका को केवल एक संगठनात्मक नियुक्ति तक सीमित नहीं माना जाता। पार्टी पिछले कुछ वर्षों से मुस्लिम समाज के पसमांदा वर्ग के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोर देती रही है।
पसमांदा मुस्लिमों में सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े समुदायों को शामिल किया जाता है। भाजपा केंद्र और राज्य सरकारों की कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के आधार पर इस वर्ग तक पहुंच बनाने की कोशिश करती रही है।
तारिक मंसूर एक शिक्षित और प्रमुख मुस्लिम चेहरे के तौर पर पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। भाजपा के कार्यक्रमों और बैठकों में वह अल्पसंख्यक समाज से जुड़े विषयों पर पार्टी का पक्ष रखते दिखाई देते रहे हैं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी बढ़ा कद
तारिक मंसूर का उत्तर प्रदेश से जुड़ाव भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य में मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी-खासी आबादी है और कई विधानसभा सीटों पर उनकी भूमिका चुनावी नतीजों को प्रभावित करती है।
ऐसे में मंसूर को दोबारा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाना भाजपा की सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी ने नई टीम में उत्तर प्रदेश को मजबूत प्रतिनिधित्व भी दिया है।
मंसूर के अलावा राज्य से स्मृति ईरानी, रेखा वर्मा और अन्य नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी दी गई है। वहीं कुंवर बासित अली को भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।
दूसरी बार जिम्मेदारी मिलने के क्या मायने?
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भाजपा संगठन का महत्वपूर्ण पद है। राष्ट्रीय उपाध्यक्षों को विभिन्न राज्यों, संगठनात्मक अभियानों और विशेष कार्यक्रमों की जिम्मेदारी दी जा सकती है। तारिक मंसूर को लगातार दूसरी बार यह पद मिलना बताता है कि पार्टी नेतृत्व उनके काम और संगठनात्मक उपयोगिता को महत्व दे रहा है।
उनका शिक्षा जगत का अनुभव, उत्तर प्रदेश से जुड़ाव और मुस्लिम समुदाय के बीच संपर्क भाजपा के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। आने वाले समय में पार्टी उन्हें अल्पसंख्यक आउटरीच से जुड़े अभियानों में भी बड़ी भूमिका दे सकती है।
नितिन नबीन की नई टीम में तारिक मंसूर की मौजूदगी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि भाजपा ने संगठन में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाने का प्रयास किया है। अब नजर इस बात पर होगी कि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में मंसूर को आगामी विधानसभा चुनावों और संगठन विस्तार के लिए कौन-कौन सी नई जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं।