नई दिल्ली : 28 अक्टूबर 2026। दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को विश्वविद्यालय परिसर में कथित तोड़फोड़ और हिंसा की घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियों को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कथित हिंसा में शामिल लोगों को उपद्रवी बताते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही। साथ ही छात्रों की समस्याओं और मांगों पर विचार करने के लिए सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित करने की जानकारी दी। जोशी ने कहा कि छात्रों की जायज समस्याओं पर बातचीत हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
जामिया में तोड़फोड़ पर प्रह्लाद जोशी ने जताई नाराजगी
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बुधवार को जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में हुई कथित हिंसक घटनाओं की निंदा की।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में जो कुछ हुआ, वह दुर्भाग्यपूर्ण है और ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।जोशी ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखना छात्रों का अधिकार है, लेकिन विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना स्वीकार्य नहीं है।उन्होंने दिल्ली पुलिस से घटना की गंभीरता से जांच करने की अपील की।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जिन लोगों की हिंसा और तोड़फोड़ में भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।हालांकि, घटना में शामिल व्यक्तियों की पहचान और उनकी जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच के बाद ही होगा।
सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन
प्रह्लाद जोशी ने बताया कि विश्वविद्यालय के छात्रों की विभिन्न मांगों पर विचार करने के लिए सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है।इस समिति में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ डीन और प्रोफेसरों को शामिल किया गया है।समिति का मुख्य उद्देश्य प्रदर्शनकारी छात्रों की शिकायतों को सुनना और उनके समाधान के लिए उचित सुझाव देना है।केंद्रीय मंत्री के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के साथ बातचीत के जरिए विवाद समाप्त करने का प्रयास कर रहा है।उन्होंने कहा कि छात्रों की सभी मांगों और संबंधित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समिति का गठन किया गया है।इससे विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच संवाद आगे बढ़ने की उम्मीद है।
छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर 17 दिनों से प्रदर्शन
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 12 अक्टूबर से छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर आंदोलन जारी है।बुधवार को प्रदर्शन का 17वां दिन रहा। छात्र जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ (JMISU) को दोबारा सक्रिय करने और चुनाव की निश्चित तारीख घोषित करने की मांग कर रहे हैं।विश्वविद्यालय में वर्ष 2006 के बाद से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं।प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि निर्वाचित छात्र संघ नहीं होने के कारण उन्हें अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने प्रभावी ढंग से रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।कुछ छात्र अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल भी कर रहे हैं।छात्रों का कहना है कि जब तक चुनाव की स्पष्ट समयसीमा तय नहीं की जाती, आंदोलन समाप्त करना मुश्किल होगा।
रात में गेट और CCTV कैमरे तोड़ने का आरोप
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मंगलवार देर रात परिसर में हुई घटनाओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।प्रशासन के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों और बाहरी लोगों के समूह ने विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।आरोप है कि कुछ नकाबपोश लोगों ने परिसर में प्रवेश करके गेट, दीवारों और निगरानी व्यवस्था को क्षतिग्रस्त किया।विश्वविद्यालय के गेट नंबर 4C को नुकसान पहुंचने और सीसीटीवी नियंत्रण कक्ष तथा कैमरों के प्रभावित होने की बात भी सामने आई है।प्रशासन ने दावा किया कि कुछ लोगों के पास डंडे और अन्य सामान मौजूद था।हालांकि, कथित तोड़फोड़ में शामिल लोगों की पहचान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बुधवार की शुरुआती रिपोर्टों में दिल्ली पुलिस ने कहा था कि उस समय तक उसे घटना से संबंधित औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी। बाद में केंद्रीय मंत्री ने शिकायत दर्ज होने की बात कही।
छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बातचीत बेनतीजा
जामिया में आंदोलन समाप्त कराने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है।विश्वविद्यालय प्रशासन ने घोषणा की है कि छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे।हालांकि, छात्र इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं।उनका कहना है कि विश्वविद्यालय ने संविधान को मंजूरी देने की निश्चित तारीख नहीं बताई है।छात्र मांग कर रहे हैं कि संविधान तैयार करने और उसे मंजूरी देने की समयसीमा स्पष्ट की जाए।प्रदर्शनकारी प्रतिनिधियों ने 20 दिसंबर तक संविधान की प्रक्रिया पूरी करने और उसके बाद चुनाव कार्यक्रम घोषित करने का प्रस्ताव रखा है।बातचीत के बावजूद दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी है।
दिल्ली पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा, धारा 163 लागू
जामिया विश्वविद्यालय में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।विश्वविद्यालय के बाहर पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए हैं।कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए हैं।पुलिस ने लोगों से निर्धारित नियमों का पालन करने और अनधिकृत जमावड़े से बचने की अपील की है।विश्वविद्यालय के प्रवेश द्वारों पर भी निगरानी बढ़ाई गई है।हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया है कि सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण उनकी आवाजाही प्रभावित हो रही है और आवश्यक सुविधाओं तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।
आठ नवंबर तक ऑनलाइन कक्षाएं और परीक्षाएं
विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में जारी तनाव को देखते हुए शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन में बदलाव किया है।प्रशासन के निर्णय के अनुसार, आठ नवंबर तक कक्षाएं ऑनलाइन माध्यम से संचालित की जाएंगी।मध्य सेमेस्टर की परीक्षाएं भी ऑनलाइन कराने की व्यवस्था की गई है।विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह कदम छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी छात्रों ने ऑनलाइन कक्षाओं और परिसर की सुविधाओं पर प्रतिबंध लगाने का विरोध किया है।उनका आरोप है कि पुस्तकालय और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच प्रभावित होने से विद्यार्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे से बढ़ी राजनीतिक हलचल
जामिया में जारी छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हुई हैं।बुधवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने के लिए विश्वविद्यालय पहुंचने का कार्यक्रम सामने आया।दोपहर में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी का भूख हड़ताल कर रहे छात्रों से मुलाकात करने का कार्यक्रम था।छात्र संघ चुनाव को लेकर जारी आंदोलन में विभिन्न राजनीतिक और छात्र संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में शांति बनाए रखने और शैक्षणिक गतिविधियां सामान्य करने पर जोर दिया है।
छात्रों की मांगों और सुरक्षा के बीच समाधान की चुनौती
जामिया मिल्लिया इस्लामिया का विवाद अब केवल छात्र संघ चुनाव तक सीमित नहीं रह गया है।इसके साथ परिसर की सुरक्षा, पुलिस कार्रवाई, शैक्षणिक गतिविधियों और छात्रों के अधिकारों से जुड़े सवाल भी सामने आए हैं।केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने स्पष्ट किया है कि छात्रों की समस्याओं का समाधान बातचीत से निकालने का प्रयास किया जाएगा, लेकिन हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।वहीं, छात्र प्रतिनिधि चुनाव की स्पष्ट समयसीमा और आंदोलन से संबंधित अनुशासनात्मक कार्रवाइयों के समाधान की मांग कर रहे हैं।अब सात सदस्यीय समिति की रिपोर्ट और विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले फैसले पर निगाहें रहेंगी।फिलहाल, कथित तोड़फोड़ के आरोपों की जांच और छात्र संघ चुनाव पर सहमति बनना इस विवाद के समाधान के लिए दो महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
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