TMC के बागी सांसदों पर घमासान, महुआ बोलीं- जाएंगे अदालत

Update: 2026-07-19 13:21 GMT

New Delhi नई दिल्ली :   संसद के मानसून सत्र से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और केंद्र सरकार के बीच तीखी राजनीतिक तनातनी देखने को मिली। टीएमसी नेता एवं सांसद महुआ मोइत्रा ने बैठक में पार्टी से अलग हुए सांसदों को आमंत्रित किए जाने पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा अध्यक्ष द्वारा उनकी स्थिति पर अंतिम निर्णय लिए बिना ही सरकार उन्हें मान्यता देने का प्रयास कर रही है। महुआ मोइत्रा ने चेतावनी दी कि यदि लोकसभा अध्यक्ष बागी सांसदों की अयोग्यता याचिकाओं पर उचित निर्णय नहीं लेते हैं तो उनकी पार्टी न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी।

सर्वदलीय बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए महुआ मोइत्रा ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व में सभी विपक्षी दलों ने संसदीय कार्य मंत्री के उस निर्णय का विरोध किया, जिसके तहत नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के प्रतिनिधियों को बैठक में आमंत्रित किया गया। उन्होंने दावा किया कि यह दल तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों का समूह है, जिसे अभी तक औपचारिक मान्यता नहीं मिली है।

महुआ मोइत्रा ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अभी तक इन सांसदों के विलय या उनकी सदस्यता को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। उन्होंने बताया कि तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी से अलग हुए 20 सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की याचिकाएं दायर की हैं, जो अभी भी लंबित हैं। ऐसे में उन सांसदों को सर्वदलीय बैठक में शामिल करना नियमों और संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि लोकसभा अध्यक्ष इन लंबित याचिकाओं पर निर्णय नहीं लेते हैं और बागी सांसदों को अयोग्य घोषित नहीं किया जाता, तो पार्टी इस मामले को अदालत में चुनौती देने पर विचार करेगी। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नियमों का समान रूप से पालन होना चाहिए और किसी भी दल के साथ पक्षपात नहीं होना चाहिए।

दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर बड़ा राजनीतिक संकट पैदा हुआ था। पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी और बाद में नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का दामन थाम लिया। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने इन सांसदों के खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अयोग्यता याचिकाएं दाखिल की थीं।

सर्वदलीय बैठक के दौरान बागी सांसदों सुदीप बंदोपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार की मौजूदगी पर विपक्षी दलों ने भी आपत्ति जताई। विरोध स्वरूप विपक्ष के नेताओं ने कुछ समय के लिए बैठक का बहिर्गमन किया। हालांकि बाद में सभी विपक्षी दल बैठक में वापस लौट आए और आगे की कार्यवाही में शामिल हुए।

इस घटनाक्रम ने संसद के मानसून सत्र से पहले राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। अब सभी की निगाहें लोकसभा अध्यक्ष के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला नहीं होता है, तो यह मामला न्यायालय तक पहुंच सकता है। फिलहाल इस पूरे विवाद को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जबकि संसद सत्र के दौरान भी इस मुद्दे पर तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है।

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