वांगचुक अस्पताल पहुंचे, दीपके का अनशन शुरू

Update: 2026-07-18 04:15 GMT

नई दिल्ली : जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने के बाद मामला और तूल पकड़ गया है। इस कार्रवाई के बाद सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) की ओर से दिल्ली पुलिस पर वांगचुक को कथित तौर पर जबरन ले जाने का आरोप लगाया गया है। वहीं, सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू कर दी है और देशभर के लोगों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की है।

जानकारी के अनुसार, सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे थे। उनकी मांगों को लेकर वह लगातार सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान स्वास्थ्य में गिरावट को देखते हुए दिल्ली पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर गई। पुलिस की ओर से इसे स्वास्थ्य संबंधी स्थिति को देखते हुए उठाया गया कदम बताया गया, जबकि सीजेपी ने आरोप लगाया कि वांगचुक को उनकी इच्छा के विरुद्ध वहां से हटाया गया।

सीजेपी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे वांगचुक को पुलिस ने जबरन अस्पताल पहुंचाया। संगठन ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और इसे दबाने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।

वहीं, अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक के समर्थन में जंतर-मंतर पर नया अनशन शुरू करने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि जब तक संबंधित मुद्दों पर उचित समाधान नहीं निकलता, तब तक वह भूख हड़ताल जारी रखेंगे। उन्होंने देश के नागरिकों से अपील की कि वे अपने-अपने शहरों में शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपनी आवाज उठाएं।

दीपके ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखें। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी आंदोलन की ताकत उसकी शांतिपूर्ण प्रकृति और जनता की भागीदारी से बढ़ती है।

सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख से जुड़े पर्यावरणीय और सामाजिक मुद्दों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने कई मौकों पर क्षेत्र की समस्याओं, स्थानीय लोगों की मांगों और विकास से जुड़े विषयों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। उनके अनशन को लेकर देश के कई हिस्सों में चर्चा रही है और विभिन्न संगठनों ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

वांगचुक के समर्थकों का कहना है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए और संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए। उनका कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण आंदोलन जनता की समस्याओं को सामने रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कदम उठाने की बात कही जाती रही है। अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल करने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक हो जाती है।

सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने की घटना के बाद अब जंतर-मंतर पर आंदोलन का स्वरूप बदल गया है। अभिजीत दीपके के अनशन शुरू करने से इस मामले ने फिर से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। देश के विभिन्न हिस्सों में समर्थकों और संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।

राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि शांतिपूर्ण आंदोलनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच संवाद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे मामलों में समाधान के लिए बातचीत और संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करता है।

फिलहाल, जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन और सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति पर सभी की नजरें बनी हुई हैं। वहीं, अभिजीत दीपके के अनशन के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और आंदोलन से जुड़े पक्षों के बीच आगे किस प्रकार की बातचीत होती है और इस मुद्दे का समाधान किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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