नई दिल्ली: राजधानी में जलापूर्ति सुधारने और यमुना में बिना शोधन वाला गंदा पानी जाने से रोकने के लिए बुनियादी ढांचे के विस्तार की पहल की गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार, 22 अक्टूबर को दिल्ली जल बोर्ड की 8,941.22 करोड़ रुपये की लागत वाली 43 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं से लगभग डेढ़ करोड़ लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इनमें सीवेज शोधन, सीवर नेटवर्क, पानी की आपूर्ति और उपचारित पानी के दोबारा इस्तेमाल से जुड़े कार्य शामिल हैं। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य घरों और बस्तियों से निकलने वाले सीवेज को एकत्र कर शोधन संयंत्रों तक पहुंचाना है। साथ ही, उन क्षेत्रों में सुविधाएं बढ़ाने की योजना है, जहां सीवर नेटवर्क का विस्तार आवश्यक है। सरकार ने इसे यमुना पुनरुद्धार और दिल्ली की जल व्यवस्था सुधारने की व्यापक कोशिश का हिस्सा बताया है।
10 परियोजनाओं का उद्घाटन, 33 का शिलान्यास
कुल 43 परियोजनाओं में 2,827.11 करोड़ रुपये की 10 परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया। इसके अलावा 6,114.11 करोड़ रुपये की 33 परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई। इनमें जल और सीवेज शोधन संयंत्रों के साथ पंपिंग स्टेशन, घरेलू सीवर कनेक्शन और जलनिकासी से संबंधित ढांचा शामिल है। यह अंतर महत्वपूर्ण है कि सभी 43 परियोजनाएं एक साथ चालू नहीं हुई हैं। जिनका शिलान्यास किया गया है, उनका लाभ निर्माण और परिचालन शुरू होने के बाद मिलेगा। अलग-अलग क्षेत्रों में सुविधाओं का असर संबंधित परियोजनाओं की प्रगति और नेटवर्क से जुड़ाव पर निर्भर करेगा। 
ओखला में 124 एमजीडी क्षमता का संयंत्र
परियोजना पैकेज में ओखला का 124 मिलियन गैलन प्रतिदिन यानी एमजीडी क्षमता वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रमुख है। इसकी लागत लगभग 1,161 करोड़ रुपये बताई गई है। बड़े पैमाने पर सीवेज शोधन की क्षमता उपलब्ध कराना इस परियोजना का उद्देश्य है। इसके साथ आठ मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के उन्नयन पर लगभग 1,041 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। घोषित विवरण के अनुसार, इनकी संयुक्त क्षमता 78.2 एमजीडी से बढ़कर 140.8 एमजीडी होगी। इन कार्यों से लगभग 78.5 लाख लोगों को लाभ मिलने का अनुमान बताया गया है।  किसी संयंत्र की क्षमता बढ़ना महत्वपूर्ण है, लेकिन उसके प्रभाव के लिए सीवेज का वहां तक पहुंचना और निर्धारित मानकों के अनुसार शोधन होना भी जरूरी है। इसलिए संयंत्रों के साथ सीवर लाइनों और पंपिंग व्यवस्था का विस्तार भी इस पैकेज का हिस्सा है।
कॉलोनियों और गांवों तक पहुंचेगा सीवर नेटवर्क
बाहरी दिल्ली में विकेंद्रीकृत सीवेज शोधन संयंत्रों और सीवेज पंपिंग स्टेशनों से जुड़ी 29 सुविधाओं के विकास का प्रावधान है। इनके लिए करीब 3,113.67 करोड़ रुपये की लागत बताई गई है। घोषित योजना में 358 अनधिकृत कॉलोनियों और 113 गांवों को शामिल किया गया है, जहां लगभग 36.29 लाख लोग रहते हैं।
इसके अलावा 1,034 किलोमीटर लंबे सीवर नेटवर्क पर लगभग 1,691 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इन कार्यों का उद्देश्य उन इलाकों का सीवेज व्यवस्थित ढंग से एकत्र करना है, जहां पर्याप्त नेटवर्क नहीं होने से गंदा पानी नालों में पहुंचता है। विकेंद्रीकृत व्यवस्था में अपेक्षाकृत छोटे क्षेत्रों का सीवेज आसपास ही शोधित करने का अवसर मिलता है। हालांकि, किसी कॉलोनी को वास्तविक सुविधा मिलने के लिए स्थानीय लाइन, घरों के कनेक्शन और संबंधित संयंत्र के बीच पूरी व्यवस्था का चालू होना आवश्यक होगा।
चंद्रावल से जलापूर्ति सुधारने की योजना
पैकेज में चंद्रावल का 477 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला जल शोधन संयंत्र भी शामिल है। इसकी लागत लगभग 298.3 करोड़ रुपये बताई गई है। घोषित विवरण के मुताबिक, इससे करीब 22 लाख लोगों को लाभ मिलेगा और पुराने संयंत्रों के स्थान पर आधुनिक व्यवस्था उपलब्ध होगी। इसके साथ मुंडका में 4.5 किलोमीटर लंबे ट्रंक ड्रेन का कार्य शामिल है, जिसकी लागत लगभग 225.02 करोड़ रुपये है। इस तरह परियोजनाएं केवल नदी की सफाई तक सीमित नहीं हैं; पानी की आपूर्ति और निकासी से संबंधित ढांचे में सुधार भी इनका उद्देश्य है। 
यमुना की सफाई के लिए समयबद्ध काम पर जोर
द्वारका के श्याम विहार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। अमित शाह ने मई 2029 से पहले यमुना को साफ करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। मुख्यमंत्री ने भी परियोजनाओं को निर्धारित समय में पूरा करने पर जोर दिया। यह सरकार का घोषित लक्ष्य है, जिसकी उपलब्धि काम की प्रगति और प्रदूषण नियंत्रण के परिणामों से स्पष्ट होगी।  इससे पहले 18 अक्टूबर को आयोजित ‘चलो यमुना’ अभियान में 35 हजार से अधिक लोगों के भाग लेने की जानकारी दी गई थी। नदी किनारे सफाई के साथ अब जोर सीवेज को नदी में पहुंचने से पहले शोधित करने पर है। नई परियोजनाओं की उपयोगिता उनके समय पर निर्माण, नियमित संचालन और उपचारित पानी की गुणवत्ता से तय होगी। 
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