करौंदे को हल्के में न लें, मेटाबॉलिज्म से लेकर शुगर कंट्रोल तक करता है कमाल
लाइफ स्टाइल : बरसात का मौसम अपने साथ कई तरह के मौसमी फल लेकर आता है। इन्हीं में से एक है करौंदा, जो आकार में छोटा जरूर होता है, लेकिन पोषक तत्वों के मामले में किसी सुपरफूड से कम नहीं माना जाता। लाल या गुलाबी रंग का यह खट्टा-मीठा फल बाजार में सिर्फ कुछ महीनों के लिए ही उपलब्ध रहता है। बावजूद इसके, अधिकांश लोग इसके स्वास्थ्य लाभों से अनजान रहते हैं और इसे अपनी नियमित डाइट का हिस्सा नहीं बनाते। पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि अगर करौंदे को विदेशी फलों की तरह पहचान और प्रचार मिलता, तो इसकी लोकप्रियता और कीमत दोनों कहीं अधिक होती।
जानी-मानी न्यूट्रीशनिस्ट लीमा महाजन के अनुसार, करौंदा कई तरह के बायोएक्टिव कंपाउंड्स से भरपूर होता है। इसमें फिनोलिक एसिड, फ्लेवोनॉइड्स और एंथोसायनिन्स जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करते हैं। यही तत्व शरीर की कोशिकाओं की सुरक्षा करते हैं और कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने में भी सहायक माने जाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, करौंदे का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसमें मौजूद फाइटोकेमिकल्स शरीर के उन जैविक तंत्रों को सक्रिय करने का काम करते हैं, जो वसा को जमा करने की बजाय उसे ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करने में मदद करते हैं। इसका मतलब है कि नियमित और संतुलित मात्रा में करौंदे का सेवन वजन प्रबंधन में सहायक हो सकता है। हालांकि, केवल करौंदा खाने से वजन कम नहीं होगा। इसके लिए संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है।
करौंदा ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में भी उपयोगी माना जाता है। न्यूट्रीशनिस्ट का कहना है कि इसमें मौजूद बायोएक्टिव तत्व भोजन के बाद अचानक बढ़ने वाले ब्लड शुगर स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। यदि इसे संतुलित आहार के हिस्से के रूप में शामिल किया जाए, तो यह शरीर में ग्लूकोज के बेहतर उपयोग में सहायक हो सकता है। हालांकि, मधुमेह से पीड़ित लोगों को अपनी दवाओं या उपचार में किसी भी प्रकार का बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
करौंदा विटामिन सी का भी अच्छा स्रोत माना जाता है। विटामिन सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने और घाव भरने की प्रक्रिया को बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बरसात के मौसम में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, ऐसे में विटामिन सी से भरपूर फल शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं।
इसके अलावा करौंदे में फाइबर भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है। फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने, कब्ज की समस्या कम करने और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद करता है। यही कारण है कि यह वजन नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भी उपयोगी माना जाता है।
करौंदे में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक माने जाते हैं। ये शरीर में सूजन को कम करने और ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मदद करते हैं। हालांकि, किसी भी खाद्य पदार्थ को हृदय रोगों का उपचार नहीं माना जा सकता, लेकिन संतुलित आहार के हिस्से के रूप में इसका सेवन समग्र स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हो सकता है।
इस फल का सेवन कई तरीकों से किया जा सकता है। इसे सीधे धोकर खाया जा सकता है। इसके अलावा करौंदे का अचार, चटनी, मुरब्बा, जैम या सलाद भी बनाया जाता है। कुछ लोग इसे दही या अन्य पारंपरिक व्यंजनों के साथ भी खाना पसंद करते हैं। कोशिश करें कि इसका सेवन कम मसाले और कम चीनी के साथ किया जाए, ताकि इसके प्राकृतिक पोषक तत्वों का अधिक लाभ मिल सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौसमी फल हमेशा शरीर के लिए अधिक लाभदायक होते हैं, क्योंकि वे प्राकृतिक रूप से उसी मौसम की जरूरतों के अनुसार पोषण प्रदान करते हैं। करौंदा भी ऐसा ही एक फल है, जो कम कीमत में कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व उपलब्ध कराता है। इसलिए जब भी यह बाजार में उपलब्ध हो, तो इसे संतुलित मात्रा में अपनी डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है।
हालांकि, यदि किसी व्यक्ति को किसी विशेष फल से एलर्जी है, कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है या वह किसी चिकित्सकीय उपचार से गुजर रहा है, तो नियमित रूप से करौंदा खाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा। सही मात्रा और संतुलित आहार के साथ करौंदा बरसात के मौसम में स्वास्थ्य के लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है।