लाइफ स्टाइल : सुबह की चाय हो या शाम की हल्की भूख, घर में बनी खस्ता मठरी दोनों ही मौकों का स्वाद बढ़ा देती है। आमतौर पर मठरी मैदा से तैयार की जाती है, लेकिन कई लोग मैदा से परहेज करते हुए गेहूं के आटे का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। गेहूं के आटे की मठरी बनाना आसान है, लेकिन इसमें मैदा वाली मठरी जैसा खस्तापन और परतें लाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
दरअसल, अच्छी मठरी बनाने का पूरा खेल आटे में सही मात्रा में मोयन डालने, उसे ठीक तरीके से गूंथने और धीमी आंच पर तलने का है। अगर इन बातों का ध्यान रखा जाए तो गेहूं के आटे से भी कुरकुरी और परतदार मठरी बनाई जा सकती है। आटा और देसी घी का खास पेस्ट इसकी हर परत को अलग रखने में मदद करेगा।
मठरी बनाने के लिए दो कप गेहूं का आटा, स्वादानुसार नमक, एक छोटा चम्मच अजवाइन और एक बड़ा चम्मच देसी घी लें। परत बनाने वाला पेस्ट तैयार करने के लिए दो चम्मच गेहूं का आटा और एक चम्मच देसी घी की जरूरत होगी। इसके अलावा मठरी तलने के लिए आवश्यकतानुसार तेल या घी रखें।
सबसे पहले एक बड़ी परात या गहरे बर्तन में दो कप गेहूं का आटा डालें। इसमें स्वादानुसार नमक मिलाएं। अजवाइन को हथेलियों के बीच हल्का मसलकर डालें, ताकि उसकी खुशबू और स्वाद अच्छी तरह आटे में मिल जाए। चाहें तो इसमें थोड़ी कुटी काली मिर्च या जीरा भी मिला सकते हैं।
अब आटे में मोयन डालने की बारी है। इसके लिए देसी घी को हल्का गर्म करके पिघला लें और आटे में डालें। घी को आटे के साथ हथेलियों से अच्छी तरह मसलकर मिलाएं। मोयन सही है या नहीं, यह जांचने के लिए थोड़ा आटा मुट्ठी में लेकर दबाएं। अगर आटा आकार पकड़ ले और तुरंत बिखरे नहीं, तो समझें कि मोयन सही मात्रा में लगा है।
इसके बाद आटे में थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाते हुए इसे गूंथ लें। आटा न ज्यादा सख्त होना चाहिए और न ही बहुत नरम। इसे सामान्य पूरी के आटे से थोड़ा मुलायम रखा जा सकता है। तैयार आटे को ढककर 10 से 15 मिनट के लिए रख दें। इससे आटे में नमी समान रूप से फैल जाएगी और बेलते समय किनारे टूटेंगे नहीं।
आटा सेट होने तक परतों के लिए पेस्ट तैयार करें। एक कटोरी में दो चम्मच गेहूं का आटा और एक चम्मच पिघला हुआ देसी घी डालें। दोनों को अच्छी तरह मिलाकर चिकना पेस्ट बना लें। पेस्ट न ज्यादा गाढ़ा होना चाहिए और न ही इतना पतला कि रोटी पर लगाने के बाद बहने लगे।
अब गूंथे हुए आटे की छह बराबर लोइयां बना लें। पहली लोई को बहुत पतली रोटी की तरह बेलें। इसके ऊपर तैयार आटा और घी वाला पेस्ट लगाएं और थोड़ा सूखा आटा छिड़क दें। इसके ऊपर दूसरी पतली बेली हुई रोटी रखें। दूसरी रोटी पर भी पेस्ट लगाकर सूखा आटा छिड़कें। इसी प्रक्रिया को दोहराते हुए छह रोटियों को एक के ऊपर एक रखें।
सभी रोटियां रखने के बाद बेलन से इन्हें हल्का बेल लें, ताकि परतें आपस में चिपक जाएं। अब एक किनारे से इन्हें कसकर रोल करना शुरू करें। रोल जितना टाइट होगा, मठरी में परतें उतनी ही सुंदर बनेंगी। तैयार रोल को चाकू की मदद से बराबर आकार के टुकड़ों में काट लें।
प्रत्येक टुकड़े को कटे हुए हिस्से की ओर से रखकर हथेली से हल्का दबाएं। फिर बेलन से थोड़ा बेलकर मठरी का आकार दें। इसे बहुत पतला न बेलें, क्योंकि पतली मठरी तलने पर अधिक सख्त हो सकती है। इसी तरह सभी मठरियां तैयार कर लें।
कड़ाही में तेल या घी गर्म करें। तेल बहुत ज्यादा गर्म न हो। मठरियों को धीमी से मध्यम आंच पर डालें और दोनों तरफ से सुनहरा एवं कुरकुरा होने तक तलें। तेज आंच पर तलने से मठरी बाहर से जल्दी रंग पकड़ लेगी, लेकिन अंदर से कच्ची और मुलायम रह सकती है। तैयार मठरियों को पूरी तरह ठंडा करने के बाद एयरटाइट डिब्बे में रखें। ध्यान रखें कि गेहूं के आटे से बनी होने के बावजूद तली हुई मठरी का सेवन सीमित मात्रा में ही करें।