अमरावती : 28 अक्टूबर 2026। आंध्र प्रदेश में चक्रवात 'अर्णब' के कारण भारी बारिश, तेज हवाओं और बाढ़ जैसी परिस्थितियों के बीच सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि चक्रवात प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता की जरूरत है, जबकि मुख्यमंत्री चुनावी गतिविधियों पर ध्यान दे रहे हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री द्वारा राहत कार्यों की अनदेखी किए जाने के इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, राज्य सरकार का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत अभियान लगातार जारी है।
चक्रवात से तटीय जिलों में व्यापक नुकसान
बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात अर्णब ने बुधवार को आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों को प्रभावित किया। तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण कई स्थानों पर पेड़ उखड़ गए, बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हुए और सड़कों पर यातायात बाधित हो गया।कोनासीमा, काकिनाडा, पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी, अनाकापल्ली और कृष्णा जिलों में चक्रवात का व्यापक असर दर्ज किया गया। कई निचले इलाकों में पानी भरने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए प्रशासन ने बड़े पैमाने पर अभियान चलाया।
YSRCP ने सरकार की प्राथमिकताओं पर उठाए सवाल
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने चक्रवात के दौरान राहत और पुनर्वास व्यवस्था को प्राथमिकता देने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के समय सरकार की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा और उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करना है।पार्टी अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने प्रशासन से राहत शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था करने का आग्रह किया है।उन्होंने गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम करने की आवश्यकता भी जताई है। साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं से प्रभावित लोगों की सहायता करने और राहत गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है।
चुनावी व्यस्तता के बीच मुख्यमंत्री की भूमिका पर बहस
चक्रवात के समय मुख्यमंत्री की चुनाव संबंधी व्यस्तता को लेकर राजनीतिक चर्चा हो रही है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नायडू चुनावी गतिविधियों में शामिल रहने के बावजूद जिला कलेक्टरों और वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार संपर्क में थे।मुख्यमंत्री ने मंगलवार को कहा था कि प्रत्येक नागरिक की जान बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन तैयार रहे।सरकार का कहना है कि चक्रवात की चेतावनी मिलने के बाद से ही जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और अन्य एजेंसियों को सक्रिय कर दिया गया था।
हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
चक्रवात के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने बड़े पैमाने पर निकासी अभियान चलाया। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, आंध्र प्रदेश और पड़ोसी ओडिशा में कुल मिलाकर एक लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।सरकारी जानकारी के मुताबिक, आंध्र प्रदेश के प्रभावित जिलों में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की 16 और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की 11 टीमें तैनात की गईं।मुख्यमंत्री नायडू ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर चक्रवात से हुए नुकसान के आकलन के लिए केंद्रीय टीम भेजने और केंद्रीय एजेंसियों का सहयोग जारी रखने का अनुरोध भी किया है।
किसानों को भारी नुकसान, फसलों पर संकट
चक्रवात के कारण राज्य के कृषि क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचा है। प्रारंभिक सरकारी आकलन के अनुसार, लगभग 70,900 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल जलभराव से प्रभावित हुई है।इसके अतिरिक्त लगभग 10,450 हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी फसलों को नुकसान पहुंचने की सूचना है। इस प्रकार कृषि और बागवानी की कुल लगभग 81,350 हेक्टेयर फसल प्रभावित होने का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है।हालांकि, वास्तविक नुकसान का आंकड़ा विस्तृत सर्वेक्षण पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।YSRCP अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी ने किसानों को लंबित इनपुट सब्सिडी का भुगतान जल्द करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाना आवश्यक है, ताकि वे अपनी आजीविका दोबारा शुरू कर सकें।
बिजली, पानी और सड़कों की बहाली बड़ी चुनौती
चक्रवात के बाद प्रभावित क्षेत्रों में बिजली और पेयजल आपूर्ति बहाल करना प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है। कई जगह सड़कों पर गिरे पेड़ों के कारण आवाजाही बाधित हुई है।मुख्यमंत्री नायडू ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सड़कों से गिरे पेड़ जल्द हटाए जाएं और मौसम अनुकूल होते ही बिजली आपूर्ति बहाल की जाए।उन्होंने राहत शिविरों में रह रहे लोगों को पर्याप्त भोजन, पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया है।राज्य सरकार का दावा है कि आपदा प्रबंधन और संबंधित विभागों के अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
राहत कार्यों को लेकर सियासत तेज
आंध्र प्रदेश में चक्रवात के बाद सरकार और विपक्ष के बीच राहत व्यवस्था को लेकर राजनीतिक मतभेद सामने आए हैं। विपक्ष जहां प्रभावित लोगों की जरूरतों और सरकारी प्राथमिकताओं पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्तारूढ़ प्रशासन अपने राहत एवं बचाव अभियानों का विवरण दे रहा है।ऐसे में प्रभावित परिवारों तक सहायता की वास्तविक पहुंच, फसलों के नुकसान का सटीक आकलन और पुनर्वास कार्यों की गति आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण मुद्दे रहेंगे।फिलहाल सबसे जरूरी है कि प्रभावित लोगों को सुरक्षित आश्रय, भोजन, पीने का साफ पानी, चिकित्सा सहायता और आजीविका बहाल करने के लिए आवश्यक सहयोग मिले। राहत कार्यों की प्रभावशीलता का आकलन जमीनी परिस्थितियों और प्रभावित परिवारों तक पहुंचने वाली सहायता के आधार पर किया जा सकेगा।