विजयवाड़ा। आंध्र प्रदेश में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्षी युवाजन श्रमिक रायतू कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को राज्य चुनाव आयोग से 22 प्रभावित शहरी स्थानीय निकायों में नए सिरे से नामांकन प्रक्रिया आयोजित करने या चुनाव स्थगित करने की मांग की है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के कार्यकर्ताओं ने विपक्षी उम्मीदवारों को धमकाया, उनके नामांकन पत्र फाड़ दिए और कई स्थानों पर नामांकन दाखिल करने से रोका। इन आरोपों के समर्थन में वाईएसआरसीपी ने राज्य चुनाव आयुक्त को वीडियो साक्ष्य और तीन ज्ञापन सौंपे हैं।
चुनाव आयोग को सौंपे वीडियो साक्ष्य
वाईएसआरसीपी के विधान परिषद सदस्य और प्रदेश महासचिव लेल्ला अप्पी रेड्डी ने पूर्व विधायक टीजेआर सुधाकर बाबू, नारायण मूर्ति और अन्य नेताओं के साथ राज्य चुनाव आयुक्त अनिल चंद्र पुनेठा से मुलाकात की।प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयुक्त को एक पेन ड्राइव सौंपी, जिसमें कथित हमलों, धमकियों और नामांकन पत्र नष्ट किए जाने की घटनाओं के वीडियो होने का दावा किया गया।इसके अलावा पार्टी ने तीन ज्ञापन देकर चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच और प्रभावित स्थानों पर दोबारा नामांकन की व्यवस्था करने की मांग की।पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग को इन शिकायतों का संज्ञान लेकर उम्मीदवारों को निष्पक्ष चुनाव लड़ने का अवसर देना चाहिए।
TDP कार्यकर्ताओं पर लगाए गंभीर आरोप
पत्रकारों से बातचीत करते हुए अप्पी रेड्डी ने आरोप लगाया कि हार के डर से टीडीपी कार्यकर्ता विपक्षी उम्मीदवारों के नामांकन पत्र फाड़ रहे हैं।उन्होंने दावा किया कि कुछ स्थानों पर विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन केंद्र तक पहुंचने से भी रोका गया।अप्पी रेड्डी ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर टीडीपी कार्यकर्ताओं का साथ दिया और कुछ स्थानों पर स्वयं उम्मीदवारों से नामांकन पत्र छीन लिए।हालांकि, ये आरोप वाईएसआरसीपी की ओर से लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र जांच और आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
809 में से केवल 321 वार्डों में नामांकन का दावा
वाईएसआरसीपी ने चुनाव आयोग को दिए ज्ञापन में दावा किया कि प्रभावित 22 शहरी स्थानीय निकायों के कुल 809 वार्डों और डिवीजनों में से पार्टी केवल 321 स्थानों पर अपने उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल कर सकी।पार्टी के अनुसार, शेष 488 स्थानों पर विभिन्न बाधाओं के कारण उम्मीदवार नामांकन दाखिल नहीं कर पाए।इसके अलावा आठ अध्यक्ष पदों के लिए भी पार्टी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने का आरोप लगाया गया है।वाईएसआरसीपी ने कहा कि इन परिस्थितियों में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना मुश्किल हो सकता है।
मैदुकुर का उदाहरण देकर चुनाव टालने की मांग
अप्पी रेड्डी ने मैदुकुर में हुई घटना का उल्लेख करते हुए चुनाव आयोग से समान कार्रवाई करने की मांग की।उन्होंने दावा किया कि मैदुकुर में 19 नामांकन पत्र नष्ट किए जाने के बाद चुनाव स्थगित कर दिया गया था।पार्टी ने मांग की कि यदि एक स्थान पर ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए चुनाव टाले जा सकते हैं, तो अन्य प्रभावित शहरी निकायों में भी इसी तरह का निर्णय लिया जाना चाहिए।वाईएसआरसीपी का कहना है कि उसके उम्मीदवारों को दोबारा नामांकन का अवसर मिलने से चुनाव प्रक्रिया में विश्वास बहाल करने में मदद मिलेगी।
हाईकोर्ट से भी नहीं मिली नामांकन अवधि बढ़ाने की राहत
इस बीच आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में नामांकन की अंतिम तारीख बढ़ाने का निर्देश देने से इनकार कर दिया है।वाईएसआरसीपी नेता अप्पी रेड्डी की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि नामांकन अवधि समाप्त होने के बाद उसमें हस्तक्षेप करने से चुनाव कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है।अदालत ने मुख्य अपीलों की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर के लिए निर्धारित की है। शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए मतदान 28 अक्टूबर और मतगणना 30 अक्टूबर को निर्धारित है।
निष्पक्ष चुनाव के लिए सुरक्षा की मांग
वाईएसआरसीपी इससे पहले भी स्थानीय निकाय चुनावों में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की मांग कर चुकी है।पार्टी ने राज्य चुनाव आयोग से नामांकन केंद्रों पर पर्याप्त सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया था।पार्टी का कहना है कि सभी पात्र उम्मीदवारों को बिना डर और दबाव के चुनाव लड़ने का अवसर मिलना चाहिए।
चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी नजर
आंध्र प्रदेश में शहरी निकाय चुनावों के बीच सत्तारूढ़ टीडीपी और विपक्षी वाईएसआरसीपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।वाईएसआरसीपी ने चुनाव आयोग को सौंपे गए वीडियो और ज्ञापनों के आधार पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। हालांकि, इन साक्ष्यों की सत्यता और शिकायतों पर आयोग के अंतिम निर्णय की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य चुनाव आयोग 22 शहरी स्थानीय निकायों में दोबारा नामांकन या चुनाव स्थगन की मांग पर क्या निर्णय लेता है।
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