अमरावती। आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान कथित हिंसा और नामांकन प्रक्रिया में बाधा डालने की घटनाओं को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री देविनेनी उमा महेश्वर राव ने विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में चल रहे चुनावों के दौरान वाईएसआरसीपी कार्यकर्ता हिंसा और गुंडागर्दी के जरिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टीडीपी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका जा रहा है और पुलिसकर्मियों पर भी हमले किए जा रहे हैं।
टीडीपी नेता ने वाईएसआरसीपी पर साधा निशाना
बुधवार, 21 अक्टूबर को एनटीआर भवन स्थित टीडीपी के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में देविनेनी उमा महेश्वर राव ने विपक्षी पार्टी के रवैये की आलोचना की।उन्होंने आरोप लगाया कि वाईएसआरसीपी के नेता और कार्यकर्ता जानबूझकर चुनावी माहौल खराब कर रहे हैं। उनका दावा है कि कुछ स्थानों पर टीडीपी उम्मीदवारों को नामांकन केंद्रों तक पहुंचने से रोका गया और उनके साथ धक्का-मुक्की की गई।देविनेनी उमा ने कहा कि चुनाव में प्रत्येक उम्मीदवार को स्वतंत्र रूप से हिस्सा लेने का अधिकार है। ऐसे में किसी भी प्रत्याशी को बलपूर्वक नामांकन दाखिल करने से रोकना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।
नामांकन पत्र फाड़ने और पुलिस पर हमले का आरोप
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि वाईएसआरसीपी से जुड़े लोग चुनावी नामांकन दस्तावेज फाड़ रहे हैं और उम्मीदवारों को डराने-धमकाने का प्रयास कर रहे हैं।उन्होंने दावा किया कि कुछ घटनाओं में पुलिसकर्मियों को भी निशाना बनाया गया। उनके अनुसार, महिला कांस्टेबलों सहित पुलिसकर्मियों पर बिना किसी उकसावे के हमले किए गए।देविनेनी उमा ने इन घटनाओं की निंदा करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले कर्मचारियों के खिलाफ हिंसा स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। हालांकि, इन विशिष्ट आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
चुनाव में हार के डर से हिंसा का दावा
टीडीपी नेता ने पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआरसीपी अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव में हार की आशंका के कारण विवाद पैदा कर रहा है।देविनेनी उमा ने दावा किया कि गठबंधन के उम्मीदवारों को स्थानीय निकाय चुनावों में व्यापक समर्थन मिल रहा है। उन्होंने गठबंधन की 90 प्रतिशत से अधिक सीटों पर जीत का अनुमान भी जताया। हालांकि, यह उनका राजनीतिक दावा है, चुनाव परिणाम नहीं।
कई जिलों में चुनावी झड़पों से तनाव
आंध्र प्रदेश में निकाय चुनावों की नामांकन प्रक्रिया के दौरान कई स्थानों पर दोनों प्रमुख दलों के कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की घटनाएं सामने आई हैं।पुंगनूर में टीडीपी और वाईएसआरसीपी समर्थकों के बीच पथराव और लाठी-डंडों से झड़प होने की खबर है। चित्तूर में पूर्व उप मुख्यमंत्री के. नारायण स्वामी के वाहन पर कथित हमले की घटना भी सामने आई।इसी तरह कडपा में नामांकन प्रक्रिया के दौरान दोनों दलों के समर्थकों के बीच पथराव हुआ। पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
YSRCP ने भी TDP पर लगाए हिंसा के आरोप
दूसरी ओर, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने भी टीडीपी कार्यकर्ताओं और प्रशासन पर उसके उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने के आरोप लगाए हैंवाईएसआरसीपी का दावा है कि कई क्षेत्रों में उसके उम्मीदवारों के नामांकन पत्र फाड़े गए और उन्हें धमकाया गया। पार्टी ने राज्य चुनाव आयोग से उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा प्रभावित क्षेत्रों में दोबारा नामांकन का अवसर देने की मांग की है।इस प्रकार दोनों दल एक-दूसरे पर चुनावी हिंसा और लोकतांत्रिक अधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा चुनावी विवाद
नामांकन प्रक्रिया में कथित बाधाओं का मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है। बुधवार को शीर्ष अदालत ने आंध्र प्रदेश राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह हिंसा और नामांकन रोकने संबंधी शिकायतों की जांच करे।अदालत ने आयोग से 22 अक्टूबर तक यह निर्णय लेने को कहा है कि प्रभावित क्षेत्रों में नामांकन की समय-सीमा बढ़ाने की आवश्यकता है या नहीं। यदि समय बढ़ाया जाता है, तो उम्मीदवारों को कम से कम 48 घंटे का अतिरिक्त अवसर देना होगा।
निष्पक्ष मतदान कराना बड़ी चुनौती
आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए मतदान 28 अक्टूबर को और मतगणना 30 अक्टूबर को निर्धारित हैचुनावों से पहले लगातार सामने आ रही हिंसा और धमकी की शिकायतों ने प्रशासन की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। ऐसे में राज्य चुनाव आयोग और पुलिस के सामने शांतिपूर्ण वातावरण में चुनाव संपन्न कराने की जिम्मेदारी है।फिलहाल देविनेनी उमा के आरोपों और वाईएसआरसीपी के जवाबी दावों के बीच राज्य की राजनीति गरमा गई है। आरोपों की निष्पक्ष जांच से ही घटनाओं की वास्तविक परिस्थितियां और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।
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