गुवाहाटी: असम के बोडोलैंड विश्वविद्यालय के तीन फैकल्टी सदस्यों को 'स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर वर्ल्ड्स टॉप 2% साइंटिस्ट्स' (विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों) के 2026 डेटाबेस में शामिल किया गया है। उन्हें पर्यावरण विज्ञान, ऊर्जा और पादप जीव विज्ञान (प्लांट बायोलॉजी) के क्षेत्रों में उनके शोध योगदान के लिए यह मान्यता मिली है।
यह उपलब्धि प्रो. हेमेन सरमा, प्रो. संजय बसुमतारी और डॉ. संजीब बरुआ के शोध योगदान को रेखांकित करती है, जिससे असम और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में विश्वविद्यालय की शोध प्रोफाइल और मजबूत हुई है।
'टॉपसाइनेट' (TopSciNet) प्लेटफॉर्म के अनुसार, वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रो. हेमेन सरमा ने पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में 933वीं रैंक हासिल की है। वे लगातार चौथे वर्ष इस डेटाबेस में शामिल हुए हैं, जो पर्यावरण विज्ञान और उससे जुड़े अन्य अंतर्विषयक क्षेत्रों में उनके निरंतर शोध योगदान को दर्शाता है।
ऊर्जा श्रेणी में शामिल प्रो. संजय बसुमतारी ने 2,323वीं रैंक प्राप्त की है। उनका लगातार तीसरे वर्ष इस सूची में आना, ऊर्जा और उससे संबंधित वैज्ञानिक क्षेत्रों में उनके निरंतर शोध योगदान को उजागर करता है।
वहीं, वनस्पति विज्ञान विभाग के संजीब बरुआ पहली बार इस डेटाबेस में शामिल हुए हैं। उन्होंने पादप जीव विज्ञान और वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में 2,675वीं रैंक हासिल की है। उनका इस सूची में शामिल होना उनके शोध करियर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और इससे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों के रिकॉर्ड में भी इजाफा हुआ है।
'स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर वर्ल्ड्स टॉप 2% साइंटिस्ट्स' डेटाबेस, विभिन्न वैज्ञानिक क्षेत्रों के शोधकर्ताओं का मूल्यांकन करने के लिए 'स्कोपस' (Scopus) डेटा से प्राप्त मानकीकृत साइटेशन संकेतकों का उपयोग करता है। यह शोधकर्ताओं के पूरे करियर के वैज्ञानिक प्रभाव और किसी एक विशेष वर्ष में उनके शोध के प्रभाव का अलग-अलग मूल्यांकन प्रदान करता है।
बोडोलैंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी. एल. आहूजा ने इन तीनों फैकल्टी सदस्यों को बधाई दी। उन्होंने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त किया और शोध के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की।
उन्होंने फैकल्टी सदस्यों को उच्च गुणवत्ता वाला शोध करने, नवाचार को बढ़ावा देने और विभिन्न विषयों के बीच सहयोग (इंटरडिसिप्लिनरी कोलैबोरेशन) को मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिष्ठा और शोध की दृश्यता (रिसर्च विजिबिलिटी) को बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
उम्मीद है कि यह मान्यता शोधार्थियों, छात्रों और करियर की शुरुआत कर रहे फैकल्टी सदस्यों को वैज्ञानिक खोजों की ओर बढ़ने और ज्ञान के विस्तार में योगदान देने के लिए प्रेरित करेगी। 2026 के डेटाबेस में तीन फैकल्टी सदस्यों का शामिल होना बोडोलैंड यूनिवर्सिटी के लिए एक और उपलब्धि है, जो अपने शोध परिवेश को मजबूत करने और पूर्वोत्तर क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान तथा नवाचार में अपना योगदान बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।