पटना। बिहार में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदेश में उद्योगों के विस्तार के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर काम शुरू किया है। उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने शुक्रवार को बताया कि वर्ष 2025 से अब तक बिहार को 1 लाख 21 हजार 863 करोड़ रुपये के कुल 1,091 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावित परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से 68,807 से अधिक लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इसके अलावा बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार यानी बियाडा ने 521 औद्योगिक इकाइयों को 727 एकड़ से अधिक भूमि आवंटित की है।

उद्योग मंत्री ने पटना के सूचना भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य सरकार की औद्योगिक योजनाओं और निवेश की स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बिहार के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और प्रदेश को औद्योगिक रूप से मजबूत बनाने के लिए संकल्पित हैं। सरकार का विशेष ध्यान निवेशकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने, उद्योग लगाने की प्रक्रिया आसान बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने पर है।

1091 निवेश प्रस्तावों से बदलेगी बिहार की औद्योगिक तस्वीर

उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने बताया कि बिहार में निवेशकों की रुचि बढ़ रही है। वर्ष 2025 से अब तक प्राप्त 1,091 प्रस्तावों में कुल 1,21,863 करोड़ रुपये के संभावित निवेश का उल्लेख है।

इन प्रस्तावों से जुड़े उद्योग स्थापित होने पर 68,807 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है। हालांकि, प्रस्तावित निवेश और वास्तविक निवेश में अंतर होता है। परियोजनाओं के निर्माण, उत्पादन शुरू होने और विस्तार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही रोजगार के अवसर वास्तविक रूप से उपलब्ध होंगे।

मंत्री ने कहा कि सरकार निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने के लिए औद्योगिक सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है।

521 औद्योगिक इकाइयों को मिली 727 एकड़ जमीन

बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 से अब तक 521 औद्योगिक इकाइयों को लगभग 727 एकड़ भूमि आवंटित की है।

इन इकाइयों से करीब 18,380 करोड़ रुपये के निवेश और 49,167 रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।

सरकार का मानना है कि उद्योगों को समय पर जमीन उपलब्ध कराने से निवेश परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

बियाडा द्वारा विकसित औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने में आने वाली शुरुआती परेशानियां कम हो सकती हैं।

25 जिलों में बनेंगे 28 नए औद्योगिक क्षेत्र

उद्योग मंत्री ने बताया कि बिहार में नए उद्योग स्थापित करने के लिए जमीन की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है।

राज्य के 25 जिलों में 28 स्थानों पर नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजना है। इसके लिए करीब 14,600 एकड़ भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

इस पहल का उद्देश्य उद्योगों को केवल कुछ प्रमुख शहरों तक सीमित रखने के बजाय राज्य के विभिन्न हिस्सों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।

नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकसित होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने और छोटे कारोबारियों को भी लाभ मिलने की संभावना है।

गया में 1670 एकड़ में बनेगी मैन्युफैक्चरिंग सिटी

बिहार सरकार की महत्वपूर्ण औद्योगिक परियोजनाओं में गया जिले के डोभी में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी भी शामिल है।

यह परियोजना करीब 1,670 एकड़ भूमि पर विकसित की जाएगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से 24 अक्टूबर को इस परियोजना के पोर्टल का शुभारंभ और भूमि आवंटन प्रक्रिया शुरू करने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।

इस औद्योगिक शहर में विभिन्न विनिर्माण इकाइयों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

यहां साझा अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र और एकीकृत कमांड एवं कंट्रोल सेंटर स्थापित करने की योजना भी है। इससे औद्योगिक गतिविधियों की निगरानी और पर्यावरण प्रबंधन में मदद मिलने की उम्मीद है।

निवेशकों के लिए तैयार बुनियादी सुविधाएं

उद्योग मंत्री के अनुसार, राज्य में 94 औद्योगिक क्षेत्रों का नेटवर्क विकसित किया गया है।

इन क्षेत्रों में करीब 32 लाख वर्ग फुट से अधिक प्लग एंड प्ले आधारभूत संरचना उपलब्ध है।

प्लग एंड प्ले व्यवस्था के तहत उद्यमियों को पहले से तैयार औद्योगिक स्थान उपलब्ध कराया जाता है। इससे कंपनियों को अपना कारखाना स्थापित करने के लिए शुरुआत से पूरी संरचना विकसित करने की आवश्यकता कम हो सकती है।

सरकार का उद्देश्य उद्योग स्थापित करने में लगने वाले समय और प्रारंभिक लागत को कम करना है।

इसके अतिरिक्त निवेशकों की सुविधाओं के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। इसके माध्यम से नौ विभागों की 62 सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पर विशेष जोर

बिहार सरकार परंपरागत उद्योगों के साथ आधुनिक तकनीक आधारित उद्योगों के विकास पर भी ध्यान दे रही है।

उद्योग मंत्री ने बताया कि बिहार सेमीकंडक्टर नीति 2026 के माध्यम से उच्च तकनीक वाले उद्योगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

पटना में 171 करोड़ रुपये की लागत से 15 एकड़ भूमि पर नया प्रौद्योगिकी केंद्र विकसित करने की योजना है।

इसके अतिरिक्त राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी स्थापित करने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है। इसे जल्द मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की तैयारी है।

सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक आधारित उद्योगों के आने से इंजीनियरिंग, तकनीकी प्रशिक्षण और अन्य क्षेत्रों के युवाओं के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

स्टार्टअप और छोटे उद्यमियों को भी मिलेगा बढ़ावा

बड़े निवेशकों के साथ छोटे और मध्यम उद्यमों को प्रोत्साहित करना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

उद्योग विभाग के अनुसार, मुख्यमंत्री उद्यमी योजना की विभिन्न उपयोजनाओं के तहत हजारों लाभार्थियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है।

बिहार लघु उद्यमी योजना के अंतर्गत 71,740 लाभार्थियों को 581 करोड़ रुपये की सहायता राशि वितरित की गई है।

इसके अलावा राज्य में 1,762 स्टार्टअप पंजीकृत होने और उन्हें लगभग 103 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

नए उद्यमियों को सहयोग देने के लिए इन्क्यूबेशन सेंटर, स्टार्टअप सेल और साझा कार्यस्थल विकसित किए गए हैं।

युवाओं को रोजगार देना सरकार की प्राथमिकता

उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी राज्य के युवाओं को रोजगार और नौकरी के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

उन्होंने बताया कि सरकार औद्योगिक निवेश बढ़ाने, नई इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित करने और स्थानीय उद्यमियों को बेहतर माहौल देने की दिशा में काम कर रही है।

सरकार का लक्ष्य है कि युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार के अधिक अवसर मिलें, जिससे उन्हें काम की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख कम करना पड़े।

फिलहाल 1.21 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव बिहार की औद्योगिक संभावनाओं को दर्शाते हैं। हालांकि, इन प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलना सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी।

आने वाले समय में निवेश परियोजनाओं की प्रगति, कारखानों में उत्पादन की शुरुआत और वास्तविक रोजगार सृजन से ही इन योजनाओं की सफलता का आकलन किया जा सकेगा।

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