सरकारी योजना का झांसा देकर खाते से राशि ट्रांसफर कराने का आरोप, नौ ग्रामीणों ने की शिकायत
मैनाटांड। प्रखंड क्षेत्र के मधुरी पंचायत अंतर्गत पकुहवा पूर्वी गांव के नौ ग्रामीणों ने सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर बैंक खाते से राशि ट्रांसफर कराने और नगदी निकासी कर लेने का आरोप लगाया है। इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और पुरुषोत्तमपुर थाना में लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ लोगों ने सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर ग्रामीणों से आधार कार्ड, पहचान पत्र और बैंक पासबुक की छायाप्रति ले ली। इसके बाद उनके बैंक खातों में आई योजना की राशि को दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दिया गया और कुछ मामलों में नगदी निकासी कर राशि ले ली गई।
पकुहवा पूर्वी निवासी सहेंद्र महतो ने दिए गए आवेदन में बताया है कि जुलाई माह में पुरुषोत्तमपुर थाना क्षेत्र के मधुरी निवासी पंचायत समिति सदस्य सतीश शाह उर्फ विपिन और शेख एमामुल गांव पहुंचे थे। दोनों ने ग्रामीणों को कई सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मिलने वाली राशि सीधे ग्रामीणों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।
ग्रामीणों के अनुसार, योजना का लाभ मिलने की उम्मीद में उन्होंने दोनों व्यक्तियों को अपने जरूरी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए। इसमें आधार कार्ड, पहचान पत्र और बैंक पासबुक की छायाप्रति शामिल थी। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनके बैंक खातों से जुड़ी जानकारी का किसी अन्य तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।
आवेदन में बताया गया है कि अंतिम देवी, सत्येंद्र महतो की पत्नी सिमिंतर देवी, सत्येंद्र महतो, भोला महतो, उपेंद्र महतो की पत्नी चिंता देवी, शोभा देवी, संध्या देवी, चंद्रावती देवी, पूजा देवी और राजकुमार महतो सहित अन्य ग्रामीणों ने अपने दस्तावेज उपलब्ध कराए थे।
ग्रामीणों का कहना है कि दस्तावेज देने के बाद 31 जुलाई के आसपास कई लोगों के बैंक खातों में 21-21 हजार रुपये की राशि जमा हुई। ग्रामीणों को लगा कि यह राशि किसी सरकारी योजना के तहत भेजी गई है। लेकिन इसके बाद कथित रूप से उनके खातों से राशि दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी गई या फिर निकासी कर ली गई।
पीड़ित ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन्हें इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी। उनका कहना है कि यदि उन्हें पहले से पता होता कि बैंक खाते की जानकारी का इस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है तो वे अपने दस्तावेज किसी को नहीं देते।
शिकायतकर्ताओं ने बीडीओ और पुलिस प्रशासन से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं और इस तरह की धोखाधड़ी से उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मामले की शिकायत मिलने के बाद अब प्रशासन और पुलिस की भूमिका अहम हो गई है। अधिकारियों की ओर से जांच शुरू किए जाने की संभावना है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि ग्रामीणों के खातों में आई राशि किस योजना से संबंधित थी, राशि किस माध्यम से ट्रांसफर हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
ग्रामीणों ने मांग की है कि बैंक खातों और दस्तावेजों के दुरुपयोग की जांच कर उन्हें न्याय दिलाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर यदि किसी ने धोखाधड़ी की है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं, इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में साइबर और बैंकिंग धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे को उजागर किया है। प्रशासन लगातार लोगों से अपील करता रहा है कि वे किसी भी व्यक्ति को बैंक खाते की गोपनीय जानकारी, एटीएम पिन, ओटीपी या जरूरी दस्तावेज बिना जांच-पड़ताल के उपलब्ध न कराएं।
फिलहाल ग्रामीणों की शिकायत के बाद सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि वास्तव में योजना की राशि के साथ क्या हुआ और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।