बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर ने पुलिस के खिलाफ EC में शिकायत की

Update: 2026-08-02 12:07 GMT

पटना, बिहार: जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने रविवार को आरोप लगाया कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान उनकी पार्टी के नेताओं और समर्थकों को पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कहने पर गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया। इस मामले को लेकर जन सुराज ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) में पटना पुलिस के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

प्रशांत किशोर ने रविवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनकी पार्टी ने चुनाव आयोग को शिकायत के साथ संबंधित साक्ष्य भी सौंपे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदान से पहले के दो दिनों में पुलिस ने कुल 54 लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी शामिल थे।

किशोर ने कहा कि पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) की ओर से यह दावा किया गया था कि मतदान से पहले 48 घंटे की साइलेंस पीरियड यानी प्रचार-मुक्त अवधि के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बाहरी लोगों को हिरासत में लिया गया था। उन्होंने इस दावे को गलत बताते हुए कहा कि हिरासत में लिए गए कई लोग बांकीपुर क्षेत्र के ही स्थानीय निवासी थे।

उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली थी और इससे मतदाताओं तथा पार्टी कार्यकर्ताओं में भय का माहौल पैदा हुआ। प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि जिन लोगों को हिरासत में लिया गया, उनमें से कई ऐसे थे जिनके खिलाफ किसी तरह की आपराधिक गतिविधि का कोई रिकॉर्ड नहीं था।

जन सुराज प्रमुख ने कहा कि पुलिस ने जिन लोगों को हिरासत में लिया, उनमें से कई लोगों ने न तो किसी कानून का उल्लंघन किया था और न ही वे निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पुलिस ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144, जिसे अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत धारा 163 के रूप में जाना जाता है, के उल्लंघन का भी कोई ठोस आधार नहीं दिखाया।

प्रशांत किशोर के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ स्थानीय लोग भी मौजूद थे, जिन्होंने अपनी हिरासत से जुड़ी घटनाओं के बारे में जानकारी दी। इनमें कम से कम तीन ऐसे लोग शामिल थे, जिन्हें या जिनके परिवार के सदस्यों को पुलिस ने कथित तौर पर रात के समय उनके घरों से हिरासत में लिया था।

इन लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस देर रात उनके घर पहुंची और बिना पर्याप्त कारण बताए उन्हें या उनके परिवार के सदस्यों को अपने साथ ले गई। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं दी गई कि उन्हें किस आधार पर हिरासत में लिया जा रहा है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव के दौरान निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि आयोग इस मामले की जांच करे और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार के पक्ष में प्रशासनिक शक्ति का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई से जन सुराज के चुनाव अभियान और समर्थकों की गतिविधियों पर असर पड़ा। किशोर ने कहा कि पार्टी ने चुनाव आयोग के सामने सभी तथ्यों को रखा है और उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच की जाएगी।

वहीं, पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। पुलिस प्रशासन पहले यह कह चुका है कि मतदान से पहले सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और चुनावी नियमों के पालन के लिए आवश्यक कदम उठाए गए थे। चुनाव के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी।

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान सुरक्षा और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर उठे इस विवाद ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। जन सुराज ने जहां इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया है, वहीं प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब इस मामले में चुनाव आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। जन सुराज की शिकायत और उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों के आधार पर आयोग आगे क्या कदम उठाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

फिलहाल, यह मामला बिहार की चुनावी राजनीति में एक नया विवाद बनकर सामने आया है। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की जांच और प्रशासन की प्रतिक्रिया से इस विवाद की दिशा तय होगी।

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