बिहार में एमएलसी पर नियम तोड़ने का आरोप, अधिकारियों के रोकने के बावजूद जहाज पर चढ़ाई कार
भागलपुर। बिहार के भागलपुर जिले के नवगछिया स्थित जाह्नवी गंगा घाट पर रविवार शाम एक जनप्रतिनिधि की गाड़ी को कथित रूप से नियमों के विरुद्ध जहाज पर चढ़ाने का मामला सामने आया है। कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के निवर्तमान विधान परिषद सदस्य एवं प्रत्याशी डॉ. एनके यादव पर आरोप है कि उन्होंने प्रशासनिक प्रतिबंध के बावजूद अपनी चारपहिया गाड़ी जहाज पर चढ़वाकर गंगा नदी पार की। आरोपों के अनुसार, घाट पर मौजूद मजिस्ट्रेट, पुलिस पदाधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने वाहन को जहाज पर चढ़ाने से रोकने का प्रयास किया, लेकिन चालक ने निर्देशों का पालन नहीं किया। बताया जा रहा है कि घटना के समय डॉ. यादव स्वयं भी गाड़ी में मौजूद थे। इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक नियमों के पालन और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, घटना से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मजिस्ट्रेट और पुलिसकर्मियों के रोकने पर भी नहीं रुकी गाड़ी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना रविवार, 18 अक्टूबर की शाम नवगछिया के जाह्नवी गंगा घाट पर हुई। घाट से यात्रियों को गंगा नदी पार कराने के लिए जहाज सेवा संचालित की जा रही है।
आरोप है कि इसी दौरान डॉ. एनके यादव की चारपहिया गाड़ी घाट पर पहुंची। वाहन चालक ने गाड़ी को जहाज पर चढ़ाने का प्रयास किया।
मौके पर मौजूद मजिस्ट्रेट और पुलिसकर्मियों ने चालक को रोकने की कोशिश की। प्रशासनिक व्यवस्था के तहत जहाज पर चारपहिया वाहनों को चढ़ाने पर प्रतिबंध होने की बात कही गई, लेकिन आरोप है कि चालक ने अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी की।
इसके बाद गाड़ी जहाज पर चढ़ा दी गई और उसी जहाज से उसे गंगा नदी के दूसरे किनारे तक पहुंचाया गया।
गाड़ी में मौजूद थे निवर्तमान एमएलसी
घटना से संबंधित विवरण में दावा किया गया है कि जिस समय चालक वाहन को जहाज पर चढ़ा रहा था, उस समय डॉ. एनके यादव स्वयं भी गाड़ी में बैठे हुए थे।
इस कारण मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि यदि अधिकारियों ने वाहन रोकने का प्रयास किया था, तो उनके निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि वाहन चालक ने किस आधार पर गाड़ी को जहाज पर चढ़ाया और क्या इसके लिए किसी स्तर पर विशेष अनुमति ली गई थी।
इस संबंध में डॉ. यादव अथवा वाहन चालक का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
जहाज पर चारपहिया वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध
जिला प्रशासन की ओर से संचालित फेरी सेवा में यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जहाज पर चारपहिया वाहनों को चढ़ाने की अनुमति नहीं है।
ऐसे प्रतिबंधों का उद्देश्य जहाज की क्षमता, संतुलन और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।
किसी जहाज पर निर्धारित क्षमता से अधिक भार होने अथवा बिना अनुमति भारी वाहन चढ़ाए जाने से सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, नदी परिवहन में यात्रियों और वाहनों की संख्या तथा भार सीमा का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
इसलिए प्रशासनिक निर्देशों की अनदेखी का कोई भी आरोप गंभीर जांच का विषय हो सकता है।
विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद बढ़ी जहाजों पर निर्भरता
भागलपुर और नवगछिया के बीच गंगा नदी पार करने के लिए वर्तमान में फेरी सेवा महत्वपूर्ण माध्यम बनी हुई है।
विक्रमशिला सेतु पर मरम्मत कार्य के कारण 30 सितंबर की मध्यरात्रि से यातायात प्रतिबंधित किए जाने के बाद एक अक्टूबर से भागलपुर के बियाडा घाट और नवगछिया के जाह्नवी घाट के बीच नियमित जहाज सेवा शुरू की गई थी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों को आवागमन में होने वाली परेशानी से राहत देना है।
पहले दिन ही बड़ी संख्या में यात्रियों ने जहाज और मोटरबोट के माध्यम से गंगा नदी पार की थी।
यात्रियों का दबाव बढ़ने के बाद प्रशासन ने अतिरिक्त जहाजों की व्यवस्था करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं।
यात्रियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने बनाए नियम
गंगा नदी के जलस्तर और घाटों की स्थिति को देखते हुए प्रशासन समय-समय पर फेरी सेवा के संचालन में बदलाव करता रहा है।
अक्टूबर के पहले सप्ताह में जलस्तर बढ़ने और नवगछिया की ओर संपर्क मार्ग पर कटाव होने के कारण जहाजों पर मोटरसाइकिल ले जाने पर भी अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया था।
बाद में परिस्थितियों की समीक्षा करने के बाद 11 अक्टूबर से निर्धारित घाटों पर मोटरसाइकिल के साथ फेरी सेवा दोबारा शुरू करने की अनुमति दी गई।
इससे स्पष्ट होता है कि नदी परिवहन में वाहनों की अनुमति परिस्थितियों और प्रशासनिक निर्णयों के आधार पर निर्धारित की जाती है।
हालांकि, मोटरसाइकिलों को अनुमति मिलने का अर्थ चारपहिया वाहनों को स्वतः अनुमति मिलना नहीं है।
कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव मैदान में हैं एनके यादव
डॉ. एनके यादव बिहार विधान परिषद के कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निवर्तमान सदस्य हैं।
भारतीय जनता पार्टी ने अक्टूबर 2026 में होने वाले विधान परिषद चुनाव के लिए उन्हें दोबारा उम्मीदवार बनाया है।
इस निर्वाचन क्षेत्र से वह पहले भी विधान परिषद सदस्य निर्वाचित हो चुके हैं। आगामी चुनाव के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं।
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, संबंधित विधान परिषद सीटों पर मतदान 23 अक्टूबर को निर्धारित है।
चुनाव से कुछ दिन पहले सामने आए इस आरोप के कारण घटना राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन सकती है। हालांकि, इसका चुनाव से कोई प्रत्यक्ष संबंध होने की पुष्टि नहीं हुई है।
नियमों के पालन पर उठे सवाल
जाह्नवी गंगा घाट की कथित घटना ने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया है कि प्रशासनिक नियमों का पालन सभी यात्रियों के लिए समान रूप से सुनिश्चित हो रहा है या नहीं।
नदी परिवहन जैसी सार्वजनिक सेवाओं में सुरक्षा संबंधी निर्देश सभी यात्रियों और वाहन चालकों पर समान रूप से लागू होने चाहिए।
यदि किसी वाहन को नियमों के विपरीत जहाज पर चढ़ाया गया, तो यह पता लगाना आवश्यक होगा कि इसके लिए कौन जिम्मेदार था।
साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि वाहन को रोकने के लिए तैनात अधिकारियों ने कौन-कौन से कदम उठाए और उनके निर्देशों का पालन क्यों नहीं हो सका।
इन सवालों के जवाब प्रशासनिक जांच से सामने आ सकते हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में इस घटना के संबंध में किसी प्राथमिकी, जुर्माने या अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।
यह भी स्पष्ट नहीं है कि घाट पर मौजूद मजिस्ट्रेट अथवा पुलिस पदाधिकारियों ने घटना की लिखित रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी है या नहीं।
इसलिए संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया और घटनाक्रम के साक्ष्यों के आधार पर ही किसी प्रकार की जिम्मेदारी निर्धारित की जा सकेगी।
जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति
नवगछिया के जाह्नवी गंगा घाट पर हुई इस कथित घटना ने फेरी सेवा के संचालन और सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर चर्चा बढ़ा दी है।
एक तरफ प्रशासन गंगा नदी पार करने वाले यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए जहाजों का संचालन कर रहा है, वहीं दूसरी ओर नियमों का उल्लंघन किए जाने के आरोप सामने आए हैं।
अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि डॉ. एनके यादव की गाड़ी को जहाज पर चढ़ाने के दौरान वास्तव में किन परिस्थितियों में अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी हुई।
संबंधित पक्षों के बयान और प्रशासनिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही मामले की पूरी सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल एमएलसी पर लगे आरोप जांच और आधिकारिक पुष्टि का विषय हैं।