केंद्र ने राज्यों को दी बड़ी वित्तीय सौगात, बिहार समेत कई राज्यों को अग्रिम कर हिस्सेदारी जारी

Update: 2026-08-02 04:29 GMT

बिहार : केंद्र सरकार ने राज्यों के विकास कार्यों और पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) को गति देने के उद्देश्य से बड़ा वित्तीय फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने शनिवार को राज्यों को करों में उनकी हिस्सेदारी के रूप में 1,09,019 करोड़ रुपये की अग्रिम किस्त जारी कर दी। यह राशि आगामी 10 अगस्त को जारी होने वाले नियमित मासिक कर हस्तांतरण से अलग है। सरकार का मानना है कि इस अग्रिम वित्तीय सहायता से राज्यों को विकास योजनाओं, आधारभूत संरचना परियोजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह अग्रिम कर हस्तांतरण राज्यों की वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्यों के पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहें और धन की कमी के कारण विकास परियोजनाएं प्रभावित न हों। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह राशि नियमित मासिक कर हस्तांतरण के अतिरिक्त दी गई है, जिससे राज्यों को अतिरिक्त वित्तीय राहत मिलेगी।

इस कर वितरण में उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक 19,208 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। वहीं बिहार समेत अन्य राज्यों को भी उनके निर्धारित हिस्से के अनुसार अग्रिम धनराशि उपलब्ध कराई गई है। यह राशि राज्यों के वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने के साथ-साथ विकास कार्यों में तेजी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

बिहार के लिए यह वित्तीय सहायता विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राज्य में सड़क, पुल, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, ग्रामीण विकास और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर लगातार कार्य चल रहा है। अतिरिक्त धनराशि मिलने से इन परियोजनाओं के लिए संसाधनों की उपलब्धता बढ़ेगी और योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी। साथ ही राज्य सरकार को सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं के संचालन में भी वित्तीय मजबूती मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि समय से पहले कर हिस्सेदारी जारी करने का फैसला राज्यों के लिए काफी लाभकारी साबित हो सकता है। कई राज्यों में मानसून के दौरान सड़क निर्माण, सिंचाई परियोजनाओं और अन्य विकास कार्यों की गति बढ़ जाती है। ऐसे समय में पर्याप्त धन उपलब्ध होने से परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जा सकती है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की संभावना है।

केंद्र सरकार का कहना है कि राज्यों को समय पर संसाधन उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है। राज्यों की वित्तीय स्थिति मजबूत होने से वे अपने विकास कार्यक्रमों को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ा सकते हैं। यही कारण है कि नियमित कर हस्तांतरण के अतिरिक्त अग्रिम किस्त जारी करने का निर्णय लिया गया है।

करों में राज्यों की हिस्सेदारी भारतीय संघीय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। संविधान और वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार केंद्र सरकार विभिन्न करों से प्राप्त राजस्व का एक हिस्सा राज्यों को उपलब्ध कराती है। इससे राज्यों को अपनी प्रशासनिक, विकासात्मक और जनकल्याणकारी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन मिलते हैं।

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि अग्रिम कर हस्तांतरण से राज्यों की नकदी स्थिति बेहतर होती है। इससे उन्हें परियोजनाओं के भुगतान, ठेकेदारों के बकाया, कर्मचारियों के वेतन और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो जाते हैं। साथ ही पूंजीगत निवेश बढ़ने से दीर्घकाल में आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलती है।

बिहार सहित कई राज्यों में वर्तमान समय में सड़क, रेलवे, शहरी विकास, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं और ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़ी अनेक परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिलने से इन परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है। इसके अलावा कृषि, सिंचाई और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यक्रमों को भी इसका लाभ मिल सकता है।

केंद्र सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि राज्यों के साथ समन्वय बनाकर विकास कार्यों को गति देना उसकी प्राथमिकता है। राज्यों को समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि पूंजीगत निवेश में वृद्धि से रोजगार सृजन, औद्योगिक गतिविधियों और बुनियादी ढांचे के विस्तार को बढ़ावा मिलेगा।

कुल मिलाकर, 1,09,019 करोड़ रुपये की अग्रिम कर हिस्सेदारी जारी करने का केंद्र सरकार का फैसला राज्यों के लिए बड़ी वित्तीय राहत माना जा रहा है। इससे बिहार सहित सभी राज्यों को विकास कार्यों में तेजी लाने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी। नियमित मासिक कर हस्तांतरण से अलग जारी की गई यह अग्रिम राशि राज्यों की वित्तीय क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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