गयाजी। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला महासंगम-2026 के शुभारंभ के अवसर पर गयाजी का दौरा किया। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और बिहार की शांति, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की। इसके बाद उन्होंने फल्गु नदी के देवघाट पहुंचकर श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।गयाजी में पितृपक्ष मेला 25 सितंबर से शुरू हुआ है और 10 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पूर्वजों की स्मृति में पिंडदान और तर्पण करने के लिए गयाजी पहुंचते हैं। बिहार पर्यटन विभाग की आधिकारिक जानकारी में भी मेले की अवधि 25 सितंबर से 10 अक्टूबर निर्धारित है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विष्णुपद मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद देवघाट की ओर रुख किया। देवघाट पिंडदान और तर्पण के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के प्रमुख स्थलों में शामिल है। यहां मुख्यमंत्री ने साफ-सफाई, श्रद्धालुओं के आवागमन, सुरक्षा और दूसरी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से तैयारियों के बारे में जानकारी भी ली।पितृपक्ष मेले के दौरान विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी के घाटों और विभिन्न पिंडवेदियों पर श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ पहुंचती है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने मेला क्षेत्र में सुविधाओं को व्यवस्थित करने पर जोर दिया है। श्रद्धालुओं के ठहरने से लेकर पेयजल, स्वच्छता, परिवहन, यातायात और सुरक्षा तक की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री ने गांधी मैदान में श्रद्धालुओं के लिए बनाई गई टेंट सिटी का भी उद्घाटन किया। इस टेंट सिटी में बाहर से आने वाले तीर्थयात्रियों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक गांधी मैदान की टेंट सिटी में करीब 2,500 श्रद्धालुओं के ठहरने की क्षमता तैयार की गई है।सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुविधा सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष के अवसर पर देश के अलग-अलग राज्यों के साथ विदेशों से भी लोग गयाजी आते हैं। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि उन्हें यहां बेहतर व्यवस्था मिले और वे अच्छा अनुभव लेकर वापस जाएं।मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा से जुड़े इंतजामों पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रशासन ने मेले के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए यातायात और पार्किंग की अलग व्यवस्था की है। गयाजी जिला प्रशासन की आधिकारिक व्यवस्था के अनुसार बसों और छोटे वाहनों के लिए अलग-अलग पार्किंग स्थल निर्धारित किए गए हैं।
मेला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है। जिला प्रशासन ने पितृपक्ष मेले के दौरान CCTV कैमरे, ड्रोन कैमरे और वीडियो कैमरों जैसी निगरानी व्यवस्थाओं के लिए पहले ही प्रक्रिया शुरू की थी। इसका उद्देश्य मेला क्षेत्र में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की निगरानी को मजबूत करना है।पितृपक्ष के दौरान गयाजी का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां पिंडदान और तर्पण का विशेष महत्व है। विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी और अक्षयवट पितृपक्ष के दौरान प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल रहते हैं। श्रद्धालु अपने पूर्वजों की स्मृति में धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए इन स्थानों पर पहुंचते हैं।
मेले को देखते हुए विष्णुपद मंदिर और आसपास के क्षेत्र को सजाया गया है। विष्णुपद से चांदचौरा तक फूलों और रंगीन रोशनी से सजावट की गई है। सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन, प्रवचन और धार्मिक कार्यक्रमों के लिए भी व्यवस्था की गई है। देवघाट पर लाइट एंड साउंड के जरिए गयाजी की धार्मिक और ऐतिहासिक गाथा दिखाने की योजना भी तैयार की गई है।श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन के सामने भीड़ प्रबंधन भी बड़ी जिम्मेदारी है। मेले की शुरुआत से पहले जिला प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण के लिए विस्तृत योजना तैयार की। प्रमुख धार्मिक स्थलों, घाटों और आवागमन वाले रास्तों पर अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है।
पितृपक्ष मेले के लिए डिजिटल सुविधाओं को भी बढ़ाया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक श्रद्धालुओं को ऑनलाइन पंजीकरण, आवास और परिवहन से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने के साथ डिजिटल माध्यमों से मार्गदर्शन देने की व्यवस्था की गई है। आपातकालीन सेवाओं और परिवहन से जुड़ी सुविधाओं को भी मेले की तैयारियों का हिस्सा बनाया गया है।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने दौरे के दौरान अधिकारियों से कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए। बड़ी संख्या में आने वाले लोगों के लिए स्वच्छता, पेयजल, आवास और सुरक्षित आवागमन जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं लगातार सुचारु रखी जाएं। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया।
पितृपक्ष मेला गयाजी के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल है। इसकी शुरुआत के साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं का पहुंचना तेज हो गया है। प्रशासन का अनुमान है कि मेले के दौरान बड़ी संख्या में तीर्थयात्री शहर पहुंचेंगे, जिसके चलते घाटों, मंदिरों और पिंडदान स्थलों पर भीड़ बढ़ेगी।मुख्यमंत्री के विष्णुपद मंदिर में पूजा-अर्चना, देवघाट के निरीक्षण और टेंट सिटी के उद्घाटन के साथ पितृपक्ष मेला महासंगम-2026 की औपचारिक शुरुआत हो गई है। अब प्रशासन का मुख्य जोर 10 अक्टूबर तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं, सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने पर रहेगा।
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