बिहार में कार्यपालक अभियंता अरविन्द कुमार चौधरी के ठिकानों पर EOU की छापेमारी
पटना। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने गुरुवार को लघु जल संसाधन विभाग, सासाराम में तैनात कार्यपालक अभियंता अरविन्द कुमार चौधरी के कई ठिकानों पर छापेमारी की। ईओयू की टीम ने पटना, मुजफ्फरपुर, सासाराम और बांका में स्थित उनके छह ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की। प्रारंभिक जांच में अधिकारी के पास आय से अधिक संपत्ति होने के आरोपों की जांच की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, अरविन्द कुमार चौधरी बिहार लघु जल संसाधन विभाग में कार्यपालक अभियंता के पद पर तैनात हैं। ईओयू को शिकायत और जांच के दौरान यह जानकारी मिली कि करीब 12 वर्षों की सरकारी सेवा अवधि में उन्होंने बड़ी मात्रा में चल और अचल संपत्ति अर्जित की है। इसके बाद आर्थिक अपराध इकाई ने मामले की जांच शुरू की और पर्याप्त आधार मिलने के बाद न्यायालय से अनुमति लेकर छापेमारी की कार्रवाई की गई।
गुरुवार सुबह ईओयू की अलग-अलग टीमों ने एक साथ कई स्थानों पर पहुंचकर तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी के दौरान संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, बैंक खातों की जानकारी, निवेश से संबंधित कागजात, जमीन-जायदाद के रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच की जा रही है। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि अधिकारी ने अपनी घोषित आय के मुकाबले कितनी अधिक संपत्ति अर्जित की है।
ईओयू अधिकारियों का कहना है कि आय से अधिक संपत्ति के मामलों में सरकारी अधिकारी की वैध आय, खर्च और अर्जित संपत्तियों का मिलान किया जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत अरविन्द कुमार चौधरी की संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है। छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
बताया जा रहा है कि जांच एजेंसी ने अधिकारी के पटना स्थित आवास और अन्य ठिकानों के अलावा मुजफ्फरपुर, सासाराम और बांका में भी तलाशी ली। सभी स्थानों पर ईओयू की टीमें दस्तावेजों और अन्य सामग्रियों को खंगाल रही हैं। जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि संपत्तियां अधिकारी के नाम पर हैं या उनके परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर खरीदी गई हैं।
ईओयू की कार्रवाई के बाद विभागीय स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। सरकारी विभागों में तैनात अधिकारियों की संपत्ति और कार्यप्रणाली को लेकर समय-समय पर निगरानी एजेंसियां जांच करती रही हैं। बिहार में आर्थिक अपराध इकाई लगातार भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों में कार्रवाई कर रही है।
जांच एजेंसी के अधिकारियों के मुताबिक, छापेमारी अभी जारी है और पूरी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही बरामद दस्तावेजों और संपत्तियों का विस्तृत आकलन किया जा सकेगा। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल टीम हर दस्तावेज की बारीकी से जांच कर रही है ताकि संपत्ति अर्जित करने के स्रोत और उसकी वैधता का पता लगाया जा सके।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अरविन्द कुमार चौधरी ने सरकारी सेवा में रहते हुए कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। ईओयू अब उनके सेवा रिकॉर्ड, वेतन विवरण, बैंक खातों और संपत्ति संबंधी जानकारी का मिलान कर रही है। जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
आर्थिक अपराध इकाई का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। सरकारी पद का दुरुपयोग कर अवैध संपत्ति अर्जित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। एजेंसी का उद्देश्य ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच कर दोषियों को कानून के दायरे में लाना है।
इस मामले में फिलहाल अधिकारी या उनके परिवार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ईओयू की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि छापेमारी में कितनी संपत्ति और कौन-कौन से महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं।
अरविन्द कुमार चौधरी के ठिकानों पर हुई इस कार्रवाई को बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम की एक बड़ी कड़ी माना जा रहा है। अब सबकी नजर ईओयू की आगे की रिपोर्ट और जांच के निष्कर्षों पर है।