वैशाली की डीएम वर्षा सिंह खेत में उतरीं, महिलाओं के साथ की धान की रोपनी

Update: 2026-07-31 06:19 GMT

वैशाली। बिहार के वैशाली जिले की जिलाधिकारी वर्षा सिंह एक बार फिर अपने सहज और जमीनी अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ आम लोगों के बीच सीधे पहुंचने वाली डीएम वर्षा सिंह ने इस बार खेत में उतरकर किसानों के बीच एक अलग संदेश दिया। उन्होंने कीचड़ से भरे धान के खेत में महिलाओं के साथ खुद रोपनी की और किसानों का उत्साह बढ़ाया।

डीएम का यह अंदाज देखकर खेतों में मौजूद किसान और महिलाएं भी उत्साहित नजर आए। उन्होंने न केवल किसानों के साथ समय बिताया, बल्कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की अपील भी की।

जानकारी के अनुसार, वैशाली जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से डीएम वर्षा सिंह शुक्रवार को बिदुपुर प्रखंड की शहदुल्लापुर धोबौली पंचायत के खजवत्ता गांव पहुंचीं। यहां उन्होंने किसानों से मुलाकात की और खेती से जुड़ी उनकी समस्याओं व अनुभवों को जाना।

गांव पहुंचने के बाद डीएम सीधे खेतों में गईं। धान की रोपनी कर रही महिलाओं के बीच पहुंचकर उन्होंने खेती की प्रक्रिया को समझा और खुद भी खेत में उतरकर धान के पौधे लगाए। इस दौरान उनके साथ मौजूद अधिकारियों और ग्रामीणों ने भी इस पहल की सराहना की।

डीएम वर्षा सिंह ने कहा कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना चाहिए।

उन्होंने किसानों को रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अधिक उपयोग से बचने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और लंबे समय तक कृषि उत्पादन को बेहतर बनाया जा सकता है।

ग्रामीणों के बीच डीएम की मौजूदगी ने एक सकारात्मक संदेश दिया। आमतौर पर अधिकारी कार्यालयों और बैठकों तक सीमित रहते हैं, लेकिन डीएम वर्षा सिंह ने खेत में पहुंचकर किसानों के साथ संवाद किया। इससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति भरोसा बढ़ने की बात कही जा रही है।

इस दौरान डीएम ने किसानों से उनकी समस्याओं की जानकारी भी ली। किसानों ने खेती से जुड़ी चुनौतियों, सिंचाई, लागत और बाजार व्यवस्था से संबंधित मुद्दों को उनके सामने रखा। डीएम ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने की बात कही।

स्थानीय महिलाओं ने भी डीएम के साथ धान रोपनी करने पर खुशी जताई। उनका कहना था कि जिले की सबसे बड़ी अधिकारी का इस तरह खेत में आना और उनके साथ काम करना उनके लिए प्रेरणादायक अनुभव है।

डीएम वर्षा सिंह पहले भी अपने जनसंपर्क और अलग कार्यशैली को लेकर चर्चा में रही हैं। वह समय-समय पर सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए गांवों का दौरा करती रही हैं और आम लोगों से सीधे संवाद करती हैं।

प्रशासन का कहना है कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूत करना है। इसके लिए किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी और सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, प्राकृतिक खेती में स्थानीय संसाधनों के इस्तेमाल पर जोर दिया जाता है, जिससे खेती की लागत कम हो सकती है। साथ ही, इससे मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

डीएम के खेत में उतरने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गए हैं। लोग उनके इस प्रयास को प्रशासन और जनता के बीच दूरी कम करने वाली पहल बता रहे हैं।

वैशाली प्रशासन की ओर से लगातार प्रयास किया जा रहा है कि किसानों को नई तकनीकों और बेहतर कृषि पद्धतियों के बारे में जानकारी दी जाए। डीएम वर्षा सिंह की यह पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

खेत में महिलाओं के साथ धान की रोपनी कर डीएम ने यह संदेश देने की कोशिश की कि किसानों की मेहनत और ग्रामीण जीवन को समझना प्रशासनिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है। उनकी इस पहल से जिले के किसानों में उत्साह और प्राकृतिक खेती को लेकर जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है।

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