भोजपुर। बिहार के भोजपुर जिले में मानसून की कमजोर स्थिति ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अगस्त महीने में भी उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं होने से खेतों में नमी की कमी हो गई है। धान की रोपाई कर चुके किसानों के सामने अब फसल बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त महीने में अब तक जिले में सामान्य से करीब 56 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। लगातार धूप निकलने और बारिश नहीं होने से खेतों की स्थिति खराब होती जा रही है। कई रोपा वाले खेतों में पानी की कमी के कारण दरारें पड़ने लगी हैं।

किसानों का कहना है कि धान की फसल के लिए इस समय पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। शुरुआती चरण में धान के पौधों को लगातार नमी मिलना जरूरी होता है, लेकिन बारिश नहीं होने से खेत सूखने लगे हैं। इससे किसानों की मेहनत और लागत दोनों पर खतरा मंडरा रहा है।

मानसून की बेरुखी का असर केवल बारिश तक सीमित नहीं है, बल्कि सिंचाई व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। जिले की नहरों में भी क्षमता के अनुसार पानी नहीं पहुंच रहा है। जानकारी के मुताबिक, नहरों में निर्धारित क्षमता की तुलना में करीब 35 प्रतिशत पानी ही आ रहा है।

नहरों में कम पानी आने के कारण किसान सिंचाई के लिए परेशान हैं। जिन किसानों के पास निजी सिंचाई के साधन उपलब्ध नहीं हैं, उनके सामने सबसे बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। कई किसान डीजल पंप या अन्य साधनों से खेतों में पानी पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे उनकी लागत बढ़ रही है।

किसानों का कहना है कि धान की खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर रहती है। समय पर बारिश नहीं होने से पौधों की बढ़वार प्रभावित हो रही है। अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अब आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। उनका कहना है कि जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश होने की उम्मीद थी, लेकिन मानसून कमजोर रहने से खेती का पूरा चक्र प्रभावित हो रहा है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, धान की फसल के लिए खेत में पर्याप्त नमी जरूरी होती है। लंबे समय तक सूखे की स्थिति रहने पर पौधों की जड़ों पर असर पड़ सकता है और उत्पादन में गिरावट आ सकती है।

किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि नहरों में पानी की उपलब्धता बढ़ाई जाए, ताकि वे अपनी फसलों को बचा सकें। उनका कहना है कि बारिश की कमी के बीच सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी है।

कई इलाकों में किसान निजी संसाधनों से खेतों की सिंचाई कर रहे हैं। लेकिन छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह आसान नहीं है। डीजल और बिजली खर्च बढ़ने से खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।

कृषि विभाग की ओर से किसानों को फसल प्रबंधन को लेकर सलाह दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मौसम की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार किसानों को आवश्यक सुझाव दिए जाएंगे।

मौसम विभाग की ओर से आने वाले दिनों में बारिश की संभावना जताई जा रही है, लेकिन किसान अभी भी चिंतित हैं। उनका कहना है कि समय पर पर्याप्त बारिश होना ही फसल को नुकसान से बचा सकता है।

भोजपुर जिले में धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है और हजारों किसान इससे जुड़े हैं। ऐसे में मानसून की कमजोर स्थिति का असर पूरे कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है।

किसानों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से तेज धूप के कारण खेतों में नमी तेजी से खत्म हो रही है। रोपे गए धान के पौधों को बचाने के लिए लगातार पानी की जरूरत पड़ रही है, लेकिन बारिश और नहर दोनों से पर्याप्त मदद नहीं मिल रही है।

फिलहाल किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। अगर जल्द अच्छी वर्षा नहीं हुई तो खरीफ फसल के उत्पादन पर संकट गहरा सकता है।

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