मोतिहारी। बीमारी छोटी हो या बड़ी, इलाज के लिए लोग दवाओं पर भरोसा करते हैं, लेकिन अगर वही दवाएं नियमों को ताक पर रखकर बेची जा रही हों तो यह लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। पताही प्रखंड क्षेत्र में बिना अनुज्ञप्ति दवा दुकानों के संचालन और किराना व पान दुकानों तक अंग्रेजी दवाओं की बिक्री की शिकायतों ने दवा कारोबार की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हाल ही में ड्रग्स विभाग की ओर से की गई छापेमारी में 34 प्रकार की दवाएं जब्त किए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। विभाग की कार्रवाई के बाद क्षेत्र में अवैध तरीके से दवा बिक्री करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं, स्थानीय लोगों ने दवा दुकानों की नियमित जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, पताही प्रखंड क्षेत्र में कई जगहों पर बिना लाइसेंस के दवा बिक्री किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। आरोप है कि कुछ स्थानों पर किराना दुकानों, पान दुकानों और अन्य छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठानों से भी अंग्रेजी दवाओं की बिक्री की जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इन दवाओं की खरीद कहां से की जा रही है और इन्हें बेचने वाले लोगों को इसकी जानकारी और अनुमति किस आधार पर मिली है।

सरकार ने दवाओं के कारोबार को नियंत्रित करने के लिए कई नियम बनाए हैं। खुदरा और थोक दवा विक्रेताओं के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य है। इसके अलावा दवाओं के भंडारण, बिक्री और रिकॉर्ड रखने के लिए भी निर्धारित मानकों का पालन करना होता है। इन नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को सही गुणवत्ता वाली और सुरक्षित दवाएं मिल सकें।

इसके बावजूद कई क्षेत्रों में नियमों की अनदेखी की शिकायतें सामने आती रहती हैं। पताही प्रखंड में भी ऐसी ही शिकायतों के बाद ड्रग्स विभाग ने कार्रवाई की। छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में दवाएं बरामद होने से यह स्पष्ट हुआ कि क्षेत्र में दवा बिक्री की निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बिना चिकित्सकीय सलाह और बिना लाइसेंस वाले स्थानों से दवाएं खरीदना लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। कई बार दुकानदारों को दवाओं के सही उपयोग, मात्रा और उसके दुष्प्रभाव की पूरी जानकारी नहीं होती। ऐसे में गलत दवा या गलत मात्रा में दवा लेने से मरीज की हालत बिगड़ सकती है।

ड्रग्स विभाग की कार्रवाई के बाद अब यह जांच का विषय है कि जब्त की गई दवाएं कहां से लाई गई थीं और इन्हें किन लोगों को बेचने की तैयारी थी। विभाग इस बात की भी पड़ताल कर सकता है कि क्या इस कारोबार के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार लोग मजबूरी में नजदीकी दुकानों से दवाएं खरीद लेते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि केवल लाइसेंस प्राप्त दुकानों पर ही दवाओं की बिक्री हो। लोगों ने मांग की है कि समय-समय पर अभियान चलाकर अवैध दवा कारोबार पर रोक लगाई जाए।

दवा कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि नियमों का पालन करने वाले दुकानदारों को भी नुकसान उठाना पड़ता है, क्योंकि अवैध रूप से दवा बेचने वाले लोग बिना मानकों का पालन किए बाजार में प्रतिस्पर्धा पैदा करते हैं। इससे पूरे दवा कारोबार की छवि प्रभावित होती है।

ड्रग्स विभाग की हालिया कार्रवाई के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि क्षेत्र में दवा दुकानों की जांच और तेज होगी। विभाग की जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि लोगों तक पहुंचने वाली हर दवा सुरक्षित और मानकों के अनुरूप हो।

फिलहाल पताही क्षेत्र में अवैध दवा बिक्री का मामला स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी के लिए एक चुनौती बनकर सामने आया है। आने वाले दिनों में विभाग की ओर से की जाने वाली कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कितनी सख्ती बरती जाती है।

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